एपिस हिमालया हनी के साथ अपने जीवन में सेहतमंद स्वाद भरिए – ‘‘हर बूंद में शुद्धता’’

कानपुर : भारत में गुणवत्तायुक्त शहद के अग्रणी उत्पादकों, वितरकों और निर्यातकों में से एक एपिस इंडिया ने भारत में हनी ब्रांड के दो सेहतमंद वैरिएंट – एपिस हिमालया और एपिस हिमालया गोल्ड पेशा किए हैं। शुद्ध शहद की गुणवत्ता के साथ एपिस इंडिया ने ग्राहकों के लिए अपने 1 किग्रा., 500 ग्रा. और 225 ग्रा. की पैकेजिंग पर आकर्षक वन प्लस वन (एक पर एक) ऑफर पेश किया है।

एपिस इंडिया भारत में और विश्व में शहद के उत्पादन में अग्रणी है। यह विश्वस्तरीय लैबोरेटरी अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करते हुए कठोर क्वालिटी कंट्रोल प्रक्रियाओं का पालन करती है। शुद्ध शहद के फायदे सुरक्षित रखते हुए एपिस हिमालया का निर्माण भी इसी सुविधा में किया गया है।

सेहत के प्रति जागरुक ग्राहकों के लिए एपिस हिमालया शक्कर का एक पोशण से भरपूर विकल्प पेश करता है और इसमें सेहत के लिए कई फायदे भी हैं।

एपिस गुणवत्तायुक्त शहद के सबसे बड़े उत्पादकों/प्रोसेसर्स तथा निर्यातकों में से एक है। एपिस हिमालया ब्रांड नेम के तहत इसका उत्पाद भारत में ब्रांडेड हनी सेगमेंट में एक महत्वपूर्ण उत्पाद बन गया है। कंपनी खासकर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एकेशिया रेप, यूकेलिप्टस, हिमालया हनी, लीची, सनफ्लॉवर और वाईल्ड फ्लॉवर फॉरेस्ट जैसे अन्य वैरिएंट भी पेश करती है।

इसके पास स्पेशियलाईज़्ड हनी जैसे जिंजर, लेमन, ऑर्गेनिक हनी तथा हनी विथ नट्स भी हैं। कंपनी शहद के लिए ट्रू सोर्स्ड सर्टिफाईड कंपनियों में से एक है। यह नॉन-जीएमओ स्टेटस से भी सर्टिफाईड है, जो शहद के मामले में बहुत दुर्लभ है। इससे शहद में पोशक तत्वों की सर्वाधिक मात्रा सुनिश्चित करने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन भी होता है। कंपनी के पास रुड़की, उत्तराखंड डमें एक विशाल निर्माण सुविधा है। एपिस हिमालया के उत्पाद 20 ग्रा. से लेकर 1 किग्रा. तक के रिटेल पैक्स में उपलब्ध हैं।

एपिस हिमालया हनी भारत में उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ वानस्पतिक परिवेश से प्राप्त किया जाता है और इसमें व्यक्ति की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने की सामर्थ्य है। यह पी वी संधू के साथ इस ब्रांड के कम्युनिकशन में भी प्रदर्शित किया गया है। शहद नियमित तौर से खाने से न केवल प्रतिरोधी क्षमता का विकास होता है, बल्कि आपको भरपूर ऊर्जा भी मिलती है। एपिस इंडिया को हाल ही में बेहतरीन निर्यात प्रदर्शन तथा प्राकृतिक हनी के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए वित्तवर्ष 2015-16 की एपीईडीए ट्रॉफी भी मिली है।

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