गुजरात के वर्तमान मुख्यमंत्री को कड़ी टक्कर दे रहे हैं कांग्रेस के इंद्रनील राजगुरू

राजकोट : गुजरात विधान सभा के लिए राजकोट (पूर्व) निर्वाचन क्षेत्र के मौजूदा विधायक श्री इंद्रनील राजगुरु ने आज राजकोट पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र (गुजरात विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र नं. 69) से कांग्रेस (आई) के उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दायर किया। कांग्रेस पार्टी ने मौजूदा भाजपा विधायक और गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजय रूपानी को कड़ी टक्कर देने के लिए युवा नेता इंद्रनील राजगुरू में पूर्ण विश्वास जाहिर किया है। श्री इंद्रनील राजगुरु ने स्वयं इस निर्वाचन क्षेत्र को चुना है क्योंकि उनका दावा है कि इस क्षेत्र के लोगों का सत्तारूढ़ भाजपा सरकार और उसके कमजोर मुख्यमंत्री से पूरी तरह से मोहभंग हो चुका है और लोगों में भाजपा के प्रति गहरी नाराजगी है जिसका फायदा उन्हें मिलेगा।

कुछ स्वतंत्र एजेंसियों के विभिन्न सर्वेक्षणों के अनुसार, श्री इंद्रनील राजगुरु इस विधानसभा चुनाव में भाजपा के श्री रूपानी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। राजकोट (पूर्व) के विधायक के रूप में अपने पांच सालों के कार्यकाल में और यहां तक कि जब वे नगर निगम में थे या उससे पहले भी, श्री राजगुरु राजकोट शहर के कल्याण के लिए बढ़- चढ़ कर काम करते रहे हैं। उन्होंने शहर की बिगड़ती कानून और व्यवस्था की स्थिति, उच्च बेरोजगारी दर, बढ़ती मुद्रास्फीति, शिक्षा संस्थानों द्वारा लगाए गए उच्च शुल्क, स्थानीय हेल्थकेयर प्रणाली में गिरावट, शहर के लिए कोई नया औद्योगिक क्षेत्र नहीं होने, नए राजकोट हवाईअड्डे पर आगे कोई काम नहीं होने, अंडरब्रिज की बाढ़, अपर्याप्त डैम आदि जैसे षहर के मुद्दों को बार- बार उठाया है। शहर के अधिकतर लोगों का मानना है कि अगर वे उनके प्रतिनिधि हैं तो वे विधानसभा में अपने मुद्दों को उठाना जारी रखेंगे जिससे राजकोट और उसके नागरिकों को काफी राहत मिलेगी।

उन्होंने श्री विजय रूपानी को अपने साथ खुली बहस करने के लिए लगातार चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मौजूदा प्रधान मंत्री श्री मोदी और वर्तमान मुख्यमंत्री श्री रुपानी सहित दो मुख्यमंत्रियों को चुने जाने के बावजूद, राजकोट पश्चिम की गुजरात के किसी भी दूसरे शहर की तुलना में अधिक उपेक्षा की गई है। राजकोट पश्चिम से कांग्रेस (आई) के उम्मीदवार श्री इंद्रनील राजगुरु कहते हैं, ‘‘इस निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के लगातार पिछले 32 सालों में अहमदाबाद, सूरत और बड़ौदा के विपरीत इस शहर को वास्तव में किसी भी बड़े विकास कार्यक्रम से वंचित रखा गया। सड़कों, पार्कों और छोटे कॉस्मेटिक सौंदर्यीकरण का किसी भी तरह से वास्तविक विकास नहीं हुआ। औद्योगिक क्षेत्रों या बड़ी सरकारी परियोजनाओं के प्रारंभ होने से रोजगार के अवसरों के साथ-साथ व्यवसाय के अवसरों का भी निर्माण होता है, और वह वास्तविक विकास होगा और इस मायने में, राजकोट के साथ जितना संभव हो सौतेला व्यवहार किया गया है।’’

श्री राजगुरु ने कहा, ‘‘कांग्रेस के पास औद्योगिक इकाइयों के पक्ष में नीतियों को लाने और रोजगार सृजन कर मुद्रास्फीति को सफलता पूर्वक नियंत्रित करने, कानून और व्यवस्था में सुधार करने का एक सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड है, जिसे हम सत्ता में आने पर जारी रखेंगे। मेरा मानना है कि नागरिकों के लिए सही विचार और अंतर्दृष्टि के साथ, हम शहर पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।’’ यह स्पष्ट है कि श्री राजगुरु के पास कुछ ठोस विचार हैं जो शहर की अर्थव्यवस्था को निर्णायक, रचनात्मक और प्रगतिशील भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाएंगे। उनके विचार और उद्देश्य हमेशा कांग्रेस पार्टी की रणनीतियों के अनुरूप रहे हैं जिन्हें पूरा किया जा सकता है और जो सुगम हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि बीजेपी के उम्मीदवार और उनके प्रचारक अब भी शराब पर प्रतिबंध, गौ हत्या पर प्रतिबंध आदि जैसे मुद्दों को ही उठा रहे हैं जिन पर आधी सदी पहले ही कानून बना दिये गये हैं (सजा की गंभीरता को बदलने से नए कानून नहीं बन जाते हैं) क्योंकि वे असली मुद्दों से भाग गए हैं। यदि ऐसा नहीं था, तो भाजपा नेता, जो चुनाओं के दौरान झूठे वादे करते हैं और भव्य शैली के भाषणों के दौरान मतदाताओं के लिए हवा महल का निर्माण करते हैं, वे भी इस बार निश्फल हो जाएंगे, क्योंकि मतदाता को अभी भी सारी बातें याद है कि धोलरा हवाई अड्डे पर क्या हुआ, विशाल निवेष के समझौते को कभी पूरा नहीं किया गया, लोक कल्याण मेला (जहां ब्रांडिंग पर काफी अधिक खर्च किये गये) और गरीबों को बहुत कम राशि मिली।

श्री राजगुरु पिछले कुछ महीनों में अपने अभियान में आक्रामक रहे हैं, जिसमें ‘कॉफी विद कांग्रेस’ नाम से चलाए जा रहे एक बहुत ही सफल सार्वजनिक आउटरीच प्रोग्राम भी शामिल है। उन्होंने राजकोट के स्थानीय मुद्दों को समझने और उनके समाधान खोजने के लिए एक प्रभावी उपकरण के रूप में पहल की है। इसकी षुरुआत कॉफी के साथ शहर की समस्याओं पर चर्चा करने के लिए विभिन्न प्रकार के लोगों की एक छोटी सी बैठक से हुई। यह सुनिश्चित करने के लिए कि व्यक्त राय किसी पक्षपाती पूर्वाग्रह से रहित थी, कांग्रेस पार्टी के सदस्यों को इन चर्चाओं में शामिल होने की अनुमति नहीं थी। इन बैठकों में से प्रत्येक बैठक में 100 से ज्यादा प्रतिभागियों को शामिल किया गया था जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया।

श्री राजगुरु के षालीन चरित्र और उनके हमेषा मदद करने के व्यवहार से उन्हें वर्ग, जाति और धार्मिक समूहों में प्रमुख आधार काटने में मदद मिली है। सार्वजनिक प्रशासन में इससे पहले वह राजकोट (पूर्व) के लिए विधायक रह चुके हैं, नगर निगम में भी उन्होंने काम किया है और वह सफल व्यवसायों के प्रबंधन के लिए भी जाने जाते हैं। श्री राजगुरू जानते हैं कि एक सच्चा नेता कैसे बना जाता है और एक पूर्ण टीम सदस्य कैसे बनाया जाता है। वह आत्मविश्वास से भरे हैं और आक्रामक हैं, फिर भी परंपरा का निर्वाह करने वाले हैं और स्वभाव से विनम्र हैं और उनके इसी स्वभाव ने राजकोट के सभी निवासियों के महत्वपूर्ण नस पर प्रभाव डाला है और वे इस प्रतिष्ठित निर्वाचन क्षेत्र को जीतने की उम्मीद कर रहे हैं।

श्री इंद्रनील राजगुरू के नामांकन दिवस के कार्यक्रम से उनके समर्थन के आधार का पता चला। उस दिन की षुरुआत राजगुरू वाड़ी (नील के सिटी कैंपस) में पूजा के साथ हुई जहां उनके परिवार और निकट सहयोगियों ने उन्हें भगवान से आशीर्वाद लेते हुए देखा। अगली सुबह 11 बजे, उन्होंने किसानपाड़ा चौक पर लगभग 50 हजार समर्थकों की एक सभा को संबोधित किया। और अंत में, वे अपने दल के साथ 1 बजे जिला कलेक्टर के कार्यालय पहुंचे जहां उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया।

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