आईएमए ने भारत यात्रा के जरिये एनएमसी विधेयक-2017 के खिलाफ आंदोलन छेड़ा

नई दिल्लीः नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आईएमए की ओर से डॉक्टरों की महापंचायत बुलाई गई है। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रवि वानखेडकर ने महासचिव डॉ. आर. एन. टंडन के साथ मिलकर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक 2017 के मौजूदा स्वरूप की निंदा और विरोध करने के लिए 25 फरवरी 2018 से कन्याकुमारी से लेकर कोलकाता तक राष्ट्रव्यापी ‘आईएमए भारत यात्रा’ का नेतृत्व शुरू किया है।

आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रवि वानखेडकर ने कहा, “यह विधेयक चिकित्सा शिक्षा के कोर्स को प्रतिकूल तरीके से बिगाड़ने की क्षमता रखता है और यदि मौजूदा स्वरूप में ही इसे पारित कर दिया जाता है तो भारत की स्वास्थ्य सेवा को भी अपूरणीय क्षति पहुंचेगी। संसद सदस्यों ने भी दलगत भावना से ऊपर उठकर इस विधेयक के प्रति चिंता और विरोध व्यक्त किया है जिसे अब स्थायी समिति के पास भेज दिया गया है। इस आयोग का पुरजोर विरोध करते हुए आईएमए ने देशभर में मार्च शुरू कर दिया है और नई दिल्ली में महापंचायत आयोजित करने से पहले पूरे देश में यह मार्च चलेगा। इस महापंचायत में चिकित्सा पेशे से जुड़े 20,000 से अधिक प्रोफेशनल्स के जुटने की उम्मीद है।”
विधेयक के कुछ प्रावधान जबर्दस्त बहस की गुंजाइश रखते हैं। आईएमए देशभर की 1725 से अधिक स्थानीय शाखाओं में डाॅक्टरों द्वारा संचालित एक स्वायत्त संस्था है और इसने जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए पूरे देश में एक साथ यात्रा का आरंभ किया है।

आईएमए के महासचिव डॉ. आर. एन. टंडन ने कहा, “इस आयोग के मुताबिक, निजी चिकित्सा संस्थानों का शुल्क ढांचा तैयार एवं निर्धारित करने के लिए बनाए गए गाइडलाइंस 40 फीसदी तक सीमित होंगे। इस गाइडलाइंस से इतर बाकी बची 60 फीसदी सीटों के लिए बहुत ज्यादा फीस वसूली जाएगी, यह प्रावधान बनावटी प्रकृति का है जिसमें अमीरों की हितैषी आरक्षण प्रणाली का प्रावधान है। यदि यह लागू हो जाता है तो इसका मतलब होगा कि अधिक फीस वसूली के लिए निजी एवं डीम्ड विश्वविद्यालयों के लिए आवंटित 15 फीसदी का अनुपात बढ़कर 60 फीसदी तक हो जाएगा और यह अपने आप में एक हास्यास्पद फैसला होगा।”

एनएमसी विधेयक 2017 की घोषणा के बाद इंडियन मेडिकल काउंसिल अधिनियम की ओर से विदेशी ग्रैजुएट के लिए जांच परीक्षा का प्रावधान खुद-ब-खुद निरस्त हो जाएगा। यह प्रावधान में नियम होगा कि इस विधेयक के लागू होने के तीन साल तक परीक्षा आयोजित होती रहेगी। यह ध्यान देना जरूरी है कि कई छात्र मेडिकल काउंसिल आॅफ इंडिया से पात्रता प्रमाणपत्र हासिल करने के बाद ही भारत के बाहर चिकित्सा संस्थानों में दाखिला पाया है और इसलिए विदेश से ग्रैजुएट चिकित्सा योग्यता प्राप्त करने के बाद ही जांच परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।

आईएमए के पूर्व अध्यक्ष एवं आईएमए महापंचायत के संयोजक डॉ. विनय अग्रवाल कहते हैं, “एक तरफ तो एमबीबीएस करने के लिए प्रतिस्पर्धी परीक्षा है, वहीं दूसरी तरफ अन्य चिकित्सा पद्धतियों (आयुष) से ग्रैजुएट के लिए ब्रिज कोर्स की व्यवस्था है जिसके बाद छात्र एलोपैथिक चिकित्सा की भी प्रैक्टिस कर सकते हैं और एमबीबीए के छात्रों के लिए एक प्रतिकूल फैसला साबित होगा। इस तरह के उदार प्रावधान यदि लागू हो जाते हैं तो अधकचरे ज्ञान पर आधारित गलत चिकित्सा होने लगेगी जिससे भारत के लोगों की सेहत दांव पर लग जाएगी। इसके अलावा क्लिनिकल प्रतिस्थापना अधिनियम और डाॅक्टरों पर तथा अस्पतालों में हिंसा कुछ अन्य मुद्दे हैं। डॉक्टर और मरीज का रिश्ता कमजोर पड़ गया है और इस प्रावधान से डॉक्टर तथा मरीज के बीच भरोसा और कम होता जाएगा।” आईएमए के पूर्व महासचिव और साइकिल यात्रा के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. नरेंद्र सैनी कहते हैं, “11 मार्च से होने वाली इस रैली का मूल विषय लोगों को इस बारे में जागरूक बनाना है कि यह एनएमसी विधेयक जनविरोधी है। इससे इलाज की गुणवत्ता प्रभावित होगी और इलाज का खर्च भी बढ़ जाएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि कोलकाता, कन्याकुमारी, मुंबई और अमृतसर के चार साइक्लिस्ट 25 मार्च को दिल्ली में महापंचायत में शामिल होने के लिए पहुंचेंगे जिनका नागरिकों के लिए संदेश होगा- हेल्थ फस्र्ट और नागरिकों में एनएमसी विधेयक के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

देश में इस मुहिम को शुरू करने और समाज को जोड़ने तथा भाईचारे की भावना को सशक्त बनाने के लिए 11 मार्च 2018 को देशभर में मौजूद आईएमए की 1725 शाखाओं में साइकिल रैली आयोजित करने की योजना है। इस रैली में आम जनता के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक पर मुख्य रूप से केंद्रित रहते हुए चिकित्सा जगत पर विभिन्न कानूनों के दुष्प्रभावों का संदेश प्रसारित किया जाएगा।

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