नारी के रूप

रूप जितने भी है नारी के
मेरी नज़र में सभी पूजनीय है
नारी हर रूप में समर्पण करती
कल्याण की सर्वदा सोचती
खुद भूखी प्यासी रहती
लेकिन परिवार को पालती
ईंटे पत्थर उठाती नारी
उबलती धूप में जलती नारी
शराब पीकर पति आता
अपशब्दों से रोज रुलाता
सारे दुख सह कर भी
उफ तक नहीं कहती
कितनी पाबन्दियों में
रिश्ते निभाती नारी
बच्चों को पढ़ाने के लिए
दूसरों के झूंठे बर्तन माँजती
गंदे मैले कुचैले कपडे धोती
पोंछा लगाती श्रम करती
सारी गुलामी करने पर भी
उसे अच्छी नज़रों से नहीं
लोग घूरते हैं बाज़ारों में
निरीह अबला समझ कर
हवस के भूखे उसे
एक दिन खा जाते
क्या यही है नारी की कहानी
नारी को सम्मान मिले
सिर्फ एक दिन के लिए
बाकी दिन क्यों नहीं पूछते
नारियों का सम्मान ऐसे नहीं
चार फ़ोटो अखबार में छपे
खबर छपी
क्या हो गई कर्तव्य की
इति श्री
नहीं हमें जागना होगा
नारी के सम्मान व
नारी की सुरक्षा के लिए
आओ मिलकर
नई सोच
विकसित करें
नारी का सम्मान करें

कवि राजेश पुरोहित

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