निट में हरियाणा इकॉनोमिक एसोसिएशन के 30वें दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन का दूसरा दिन

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरूक्षेत्र में संस्थान के व्यवसायिक प्रशासनिक विभाग द्वारा हरियाणा इकॉनोमिक के 30वें वार्षिक सम्मेलन के दूसरे दिन तृतीय सत्र में हरियाणा में कृषि संकट क्षेत्रीय विसमता, बेरोजगारी, दरिद्रता एवं राज्य की अर्थव्यवस्था की चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। समापन समारोह में सर्वप्रथम प्रो. सुरेन्द्र कुमार, निदेशक गिरि इंरूटीट्यूट ऑफ डेवलपमेंन्ट स्टडीस, लखनऊ ने संबोधित किया। प्रो. कुमार राजकीय अर्थशास्त्र, विकास अर्थशास्त्र एवं ऊ र्जा अर्थशास्त्र में पी.एच.डी. की उपाधि से सम्मानित है। प्रो. कुमार ने अर्थशास्त्रों के सिद्वांतों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए समाज में चल रहे पक्षपात पूर्ण व्यवहार पर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने गुरू एवं शिष्य की महत्ता पर भी प्रकाश डाला, साथ ही जीविकोपार्जन पर भी अपने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के मुख्यअतिथि डा. एस.डी. चमोला ने भ्रष्ट्राचार एवं नीतिशास्त्र पर अपने बहुमूल्य विचार व्यक्त करते हुए भारत में भष्ट्राचार की शुरूआत से अब तक की कहानी पर प्रकाश डाला। उन्होंने ब्रीटिश शासन काल, स्वतंत्रता के बाद भारत में भ्रष्ट्राचार का विवरण व वर्तमान समय में भारत में भ्रष्ट्राचार की स्थिति पर कई विशेष पहलुओं को छुआ। साथ ही उन्होंने कहा कि आज भारत में विश्व में भ्रष्ट्रचार सूचकांक में 81वें स्थान पर है। साथ ही उन्होंने इस स्थिति को थर्ड ड्रिग्री कैंसर और एड्स जैसी गंभीर बिमारियों की उपाधि दी। उन्होंने महान अर्थशास्त्री कौटिल्य का भी उदाहरण दिया और बताया कि कौटिल्य ने 40 प्रकार के भ्रष्ट्राचार की बात कही थी। उन्होंने 1991 के एल.पी.जी. सुधार पर अपने विचार व्यक्त करते हुए चिरकालिक पूंजीवाद पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने इस राजनैतिक, आर्थिक सामाजिक व प्रशासनिक वैधानिक प्रणाली में खामियों को भ्रष्ट्राचार का मुख्य कारण बताया।

मुख्य अतिथियों एवं सभी उपस्थितगणों का धन्यवाद व्यक्त करते हुए डा. राजेन्द्र कुमार, विभागाध्यक्ष प्रबंधन संस्थान ने महान कूटनीतिज्ञ चाण्क्य का उदाहरण देते हुए सभी से ईमानदारी एवं सदाचरण का पालन करने का आह्वान किया। साथ ही अपना मत व्यक्त करते हुए उन्होंने नागरिकों की मानसिकता में सही दिशा में बदलाव एवं जिम्मेदार नागरिकों की तरह नियमों का सही रूप से पालन करने को देश की उन्नति एवं प्रगति में एक महत्वपूर्ण कारक बताया। अंत में उन्होंने सभी उपस्थितगणों का धन्यवाद व्यक्त किया। डा. विकास चौधरी ने डा. सुरेन्द्र कुमार को एवं डा. नीरज कौशिक ने डा. एस.डी. चमौला को सम्मानित कर उनकी उपस्थिति के लिए उनका धन्यवाद किया।

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