एनएमसी बिल के विरोध में आई एम ऐ की साइकिल रैली में एक लाख से अधिक चिकित्साकर्मियों ने शिरकत की

नई दिल्लीः देशभर के एक लाख से अधिक चिकित्साकर्मियों ने आई एम ऐ द्वारा आयोजित साइकिल रैली में शिरकत की। यह मुहिम समाज के साथ जुड़ने के लिए और देशभर में जागरूकता लाने के मकसद से शुरू की गई है। यह चिकित्सा जगत पर थोपे गए विभिन्न कानून खासकर मेडिकल कमीशन आयोग के दुष्प्रभावों के बारे में आम नागरिकों को जागरुक करना था।

साइकिल यात्रा 12 और 18 मार्च 2018 को देश के चार हिस्सों से आयोजित की जाएगी और नई दिल्ली में 25 मार्च 2018 को होने वाली डॉक्टरों की महापंचायत में इसका समापन हो जाएगा।

मौजूदा बिल के मसौदे में कई सारी जटिलताएं हैं जिन पर उच्च स्तरीय बहस होने की जरूरत है। आईएमए देशभर की 1725 स्थानीय शाखाओं में डॉक्टरों द्वारा संचालित एक स्वायत्त संस्था है और इसने आम जनता के बीच जागरूकता का संदेश फैलाने के लिए एक साथ यात्रा शुरू की है- इसमें हेल्थ फस्र्ट यानी स्वास्थ्य को प्राथमिकता तथा आम जनता में एनएमसी बिल को लेकर जागरूकता बढ़ाने का संदेश है।

आईएमए के महासचिव डाॅ. आर. एन. टंडन ने कहा, “इस बिल के मुताबिक एमबीबीएस के छात्रों के लिए एक्सिट कॉम्पिटेंसी परीक्षा पास करना जरूरी होगा जिसके किए बगैर छात्र चिकित्सा प्रैक्टिस नहीं कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, आयुष के छात्र ब्रिज कोर्स पूरा करने के बाद ही आधुनिक चिकित्सा की भी प्रैक्टिस कर सकते हैं। आधुनिक चिकित्सा और आयुष का विलय करने का दुष्प्रभाव जन स्वास्थ्य पर पड़ेगा। देश में डॉक्टरों की कमी दूर करने का यह तरीका कतई उपयुक्त नहीं हो सकता।”

उन्होंने आगे कहा, “अन्य चिकित्सा पद्धतियों (आयुष) के ग्रैजुएट्स के लिए ब्रिज कोर्स एमबीबीएस के छात्रों को छलने वाला होगा क्योंकि ब्रिज कोर्स करने के बाद कोई भी ग्रैजुएट एलोपैथिक चिकित्सा की प्रैक्टिस कर सकता है। इस तरह के उदार प्रावधान यदि लागू हो जाते हैं तो इससे सिर्फ अधकचरे ज्ञान और गलत इलाज वाली प्रैक्टिस शुरू होने लगेगी और इससे देश की जनता का स्वास्थ्य दांव पर लग जाएगा।”

आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं डाॅक्टर्स महापंचायत के संयोजक डाॅ.विनय अग्रवाल का कहना है, “इस आयोग के मुताबिक, निजी चिकित्सा संस्थानों का शुल्क ढांचा तैयार एवं निर्धारित करने के लिए बनाए गए गाइडलाइंस 40 फीसदी तक सीमित होंगे। इस गाइडलाइंस से इतर बाकी बची 60 फीसदी सीटों के लिए बहुत ज्यादा फीस वसूली जाएगी, यह प्रावधान बनावटी प्रकृति का है जिसमें अमीरों की हितैषी आरक्षण प्रणाली का प्रावधान है। यदि यह लागू हो जाता है तो इसका मतलब होगा कि अधिक फीस वसूली के लिए निजी एवं डीम्ड विश्वविद्यालयों के लिए आवंटित 15 फीसदी का अनुपात बढ़कर 60 फीसदी तक हो जाएगा और यह अपने आप में एक हास्यास्पद फैसला होगा।”

डाॅक्टर और मरीज का रिश्ता बहुत नाजुक होता है और इस प्रावधान से डाॅक्टर तथा मरीज के बीच भरोसा और कम होता जाएगा। इस साइकिल रैली का मुख्य उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है कि एनएमसी बिल जनविरोधी है और इससे सिर्फ इलाज की गुणवत्ता ही प्रभावित होगी और इलाज का खर्च भी बढ़ेगा।

आईएमए के पूर्व महासचिव और साइकिल यात्रा के राष्ट्रीय संयोजक डाॅ. नरेंद्र सैनी का कहना है कि एनएमसी बिल में देश की मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने की क्षमता है और यदि इसे मौजूदा स्वरूप में ही पारित कर दिया जाता है तो इससे होने वाली क्षति अपूरणीय होगी।

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