“भाईचारे की मिसाल”

कोई जब त्योहार आता है
हम सब मिलकर मनाते हैं
ईद हो या दीपावली चाहे
हँसकर गले हम लगाते हैं

मन की बात हम नहीं छिपाते है
एक दूजे को झट से ही बताते है
मजहब न जाति आड़े आती है
हम सुख दुख में साथ निभाते है

नए कपड़े रहमान जब लाता है
राम को भी नए कपड़े दिलाते है
प्यार से हम रहना सीखते आए
गीता और कुरान यही सिखाते है

भाईचारे की मिसाल है भारत
विश्व मे आज भी लोग कहते है
विविधता में है एकता जहाँ पर
सारे महापुरूष यही बताते हैं

सारे मिलकर रहो जहां वालों
ये मुहम्मद साहब भी कहते है
करो नेक काम दुनियां में तुम
सारे ग्रंथ देखो यही जताते है

– कवि राजेश पुरोहित

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