योग दिवस पर

सब वैदिक विधि गुमनाम हुई,
अब घर घर घूमे रोग दिवस.
हम जगत गुरु थे किसी समय,
अब भूल रहे हैं योग दिवस.
हम अन्तिम शो के चलते अब,
दो तीन बजे तक सोते हैं.
चढ जाये सूरज चांद तलक,
तब तक बिस्तर में होते हैं.
यदि योग प्रयोग की बात है,
श्री राम देव जी वाकी हैं,
हम पशु प्रवृत्ति वालों को तो,
एक यूट्यूब ही काफी है.
मुन्नी और शीला के ठुमके,
हर रोज आज कल देख रहे.
आस्था वैदिक और संस्कार,
इन सब में हर दिन लेट रहे,
रेचक और कुम्भक छोड़ छाड़,
व्यूटीपार्लर में जिन्दा हैं,
लड़के तो जांघिया छोड़ चुके,
लड़कियाँ देख शर्मिंदा हैं.
अब बज्रासन और शीर्षासन,
मयूरासन की विधि भूल रहे.
अब साधे कौन योगमुद्रा,
जब हर मुद्रा से दूर रहे.
अंग्रेजी औषधियों के तो,
हम सब मेडिकल खोल रहे,
पुश्तैनी जड़ीबूटियों को,
हम ओछापन में छोड़ रहे.
है समय आज भी जग जाओ,
सब योगशिविर का यत्न करो,
योगाभ्यास कर स्वस्थ्य रहो,
नित योगासन का प्रयत्न करो.
यह वीज तो हिन्द देश का है,
सारी दुनियां में फैलाओ,
जो जगत गुरु से दूर हुए,
अब योगगुरु तो कहलाओ.

– रीतेश दुबे

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