पंकज त्रिपाठी ‘कवि सम्मेलनों’ को लोकप्रिय बनाना चाहते हैं

पंकज त्रिपाठी चुनिंदा अभिरूचियों के व्यक्ति हैं। न्यूटन में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने से लेकर रजनीकांत अभिनीत अपनी पहली तमिल फिल्म काला और हॉकी प्लेेयर हरजीत सिंह पर आधारित हरजीता नामक पंजाबी बायोपिक से अपना डेब्यूम करने के साथ इस मासन अभिनेता का वर्ष 2018 का पहला भाग काफी दिलचस्पज रहा है। उनकी इस वर्ष पहले ही दो प्रभावशाली हिन्दी फिल्में फेमस और अंग्रेजी में कहते हैं, रिलीज हो चुकी हैं और कई अन्य् फिल्में इस वर्ष पाइपलाइन में हैं। वे अपने काम में काफी व्य स्तम हैं, लेकिन जब उनकी हॉबीज को पूरा करने की बात आती है, तो ये प्रतिभाशाली अभिनेता निश्चित तौर पर उनके लिए समय निकाल सकता है।

पंकज हमेशा से ही हिंदी साहित्य को आगे बढ़ाने की पैरवी करते रहे हैं। क्षेत्रीय साहित्यिक रचनाओं के एक उत्साही पाठक होने के साथ ही साथ, वे कवि सम्मेहलनों के प्रति प्रेम के बारे में भी मुखर रहे हैं। कवि सम्मे‍लन भारत की राजसभाओं की एक पुरानी परंपरा रही है, जहां प्रसिद्ध कवि एकसाथ अपने काम को प्रदर्शित करते थे और संगीतमय कविता पाठ में भाग लेते थे। हालांकि कवि सम्मेसलन इन देश में एक आम बात है, लेकिन यह सभी क्षेत्रों में व्याापक स्तेर पर आयोजित नहीं किये जाते हैं, पंकज इसको बदलना चाहते हैं। ऐसे कई सम्मेसलनों में भाग ले चुके, यह न्यूकटन अभिनेता यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यह एक भूली-बिसरी कला बनकर न रह जाये, जो अभी भारत के गौरवशाली इतिहास का एक हिस्सा है और इसे पूरे देश में लोकप्रिय बनाना चाहिए।

हमें विश्वास है कि पंकज इस नए प्रयास में भी सफल होंगे!

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