ओयो के साझेदार मुश्किल में

भारत में डिजिटल प्लेटफाॅम्र्स की वृद्धि के कारण उद्योगों के डिजिटलीकरण में व्यापक परिवर्तन आया है। भारी वृद्धि के साथ बाजार प्लेटफाॅर्म एग्रीगेटर्स के आधार पर परिवर्तित हो रहे हैं, लेकिन इन सबका वेंडर्स पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, यह देखना भी आवष्यक है।

पूर्व में की गई बिज़नेस केस स्टडीज़ में सामने आया है कि स्केल की अर्थव्यवस्थाओं द्वारा ग्राहकों को बेहतर मूल्य प्राप्त होते हंं और विक्रेता के लिए ज्यादा मार्जिन एवं एफिषियंसी मिलती है।

यद्यपि कई मर्तबा उद्योग में परिवर्तन का इच्छुक एग्रीगेटर उसी लहर पर सवार हो जाता है, जिसकी शुरुआत वह करता है।

ओरेवल स्टेज़ प्राईवेट लिमिटेड द्वारा संचालित, होटल एग्रीगेटर ओयो रूम्स इसी उलझन में है। एक तरफ कंपनी तेजी से विदेषी धरातलों पर विस्तार कर रही है, जिनमें चीन, मलेशिया और अब लंदन में यूके शामिल हो गए हैं, वहीं दूसरी तरफ रितेश अग्रवाल का यह स्टार्टअप अपने स्थानीय साझेदारों की खुशी बनाए रखने में काफी संघर्श का सामना कर रहा है। इसमें सबसे ऊपर झूठे वायदे और नए आॅनबोर्ड पार्टनरों के लिए बड़ा कमीशन दिया जाना दिखाई देते हैं, वहीं निवेशकों का मार्जिन और बाजार अंष बढ़ाने व उन्हें खुश रखने के प्रयास में पुराने पार्टनरों पर दबाव डाला जाना शामिल हैं।

प्रारंभ में जब ओयो साझेदारों के पास स्वयं गया था, तब न्यूनतम गारंटी, एडवांस और उच्च कमीशन की संरचना के साथ दिखाई दिए जाने वाले बिज़नेस के आकर्षक अवसर हस्तांतरित किया जाना बहुत मुष्किल था, लेकिन बाद में ऐसा एहसास हुआ कि यह उनके दीर्घकालिक फायदे के लिए नहीं था, बल्कि नए साझेदारों को आॅन-बोर्ड आने के लिए आकर्षित करने की एक तरीका था।

हाल में ओयो रूम्स पर सूचीबद्ध होने वाले विभिन्न होटल पार्टनर एवं होटल मालिक अपना रोश एवं क्रोध प्रदर्शित करते रहे हैं। झूठे वायदों एवं घटते कमीश ने बाजार में असंतुलन पैदा कर दिया है। एग्रीगेटर नए पार्टनर को सूचीबद्ध करने के लिए न केवल कमीशन का उपयोग कर रहा है, बल्कि आॅक्युपैंसी बढ़ाने और पोंज़ी स्कीम की याद दिलाने के लिए प्रिडेटरी प्राईसिंग भी लागू कर रहा है।

होटल पार्टनर के रूप में ओयो रूम्स से जुड़ने वाले जयपुर-स्थित होटल के मालिक, साजिद खान ने कहा, ‘‘वेबसाईट हमारी सहमति के बिना कमरों की दरों में भारी बदलाव कर देती है और हमें वो दरें वापस प्राप्त करने में बहुत मुश्किल होती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारे बाद जुड़ने वाले कई होटलों को काफी अच्छे किराए मिल रहे हैं और एक नए पार्टनर एवं पुराने पार्टनरों को दिए जाने वाले कमीशनों में काफी अंतर है।’’

कई होटल मालिक उन प्रतिस्पर्धियों को शामिल करना चाहते हैं, जो अपने सौदे में ज्यादा निष्पक्ष और पारदर्शी प्रतीत होते हैं।

मुंबई-स्थित ओयो रूम्स पार्टनर, जो एयरपोर्ट के पास एक बुटीक होटल चला रहे हैं, ने बताया कि स्थित बहुत कुछ ऊबर और ओला की तरह है। ‘‘जब ओला ने नए जुड़ने वाले कार आॅपरेटर्स को वर्तमान आॅपरेटर के मुकाबले बेहतर कमीषन देना प्रारंभ किया, तब कई लोग ऊबर से जुड़ गए, जिससे काफी तीव्र वृद्धि हुई। होटल सेक्टर में भी यही होता है।’’

खान ने कहा, ‘‘हम वर्तमान में एग्रीमेंट से बंधे हैं, लेकिन इस बार इसकी अवधि पूरी हो जाने के बाद, हम इसे आगे नहीं बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।’’

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