Category: Poems

0

पिता

शाम ढले वो कुछ अलकसाया सा था। दिन भर की थकन से मुरझाया सा था।। अजीब सी बेचैनी चेहरे पर तैर रही थी उसके। जिम्मेदारियों से वो कभी ना घबराया था।। आज एक तरफ...

0

वो मेट्रो वाली लड़की

मुझे रोज़ सुबह मिलती है मैं किसी पतंगे सा बदहवास वो किसी फूल सा खिलती है मैं धक्के-मुक्की से ही परेशान वो किसी रोशनी सी बिखरती है दरवाज़े के एक कोने पे खड़ा मैं...

0

आलिंगन

हृदय से आलिंगन कर लूं, पास आ ओ प्रियवर….! धड़कनो का स्पंदन सुन ले, नही है मुझको अब सबर…! माथे पर तुम्हारे चुम्बन, का वो मखमली स्पर्श…..! पग-पग चलूँ मैं सँग, चाहूँ तेरा ही...

0

एहसास ही खत्म हो गए

रोशनी चुभने लगी है आँखो में, एक अरसे से अंधेरे में रहा हूँ मैं, सपने आते ही नही अब सोने पर, एक अरसे से सोया नही हूँ मैं, मुस्कुराहट आती है,दर्द लिए चेहरे पर,...

0

चाँद बनके रातों को छत पे बुलाते क्यों रहे

जब मोहब्बत था तो छुपाते क्यों रहे आग समंदर में फिर लगाते क्यों रहे ।।1।। जब जाना था ज़माने में रुसवा करके तो भरी महफ़िल में हक़ जताते क्यों रहे ।।2।। एक जुदाई भर...

0

दर्शन दो अब नंद गोपाल

जय हो जय हो नंद गोपाल, आ जाओ अब बाल गोपाल, मथुरा है दर्शन की प्यासी, इन्तेजार में हर ब्रजवासी, तुमको अब आना ही होगा, कंस को अब मिटाना ही होगा, तुम्हारे चरण छूने...

0

मैं बदलते दौर में भी इज़्ज़तदारों का खानदान हूँ

मैं अपनी मुख़्तलिफ़ शाइस्तगी से ही परेशान हूँ खबर है दुनिया कि और खुद से ही अन्जान हूँ ।।1।। दोस्त जितने थे आज सब रसूख़दार हो गए एक ज़माने से मैं दुश्मनों के ही...

0

मेरे कृष्ण कन्हाई

काली अंधियारी रात को जन्म है जिसने पाया, भादो कृष्ण अष्टमी को उस दिन रोहिणी नक्षत्र आया। मोर मुकुट सिर धारण किया है कटि पे सुंदर लंगोट लिया है, कानों में कुंडल विराजे है...

0

अदभुत कान्हा नाम तुम्हारे

कान्हा अद्धभुत तुम्हारा रूप है अद्धभुत तुम्हारे नाम। देवताओं के स्वामी हो तुम तभी तो आदिदेव कहलाते।। जीवन और मृत्यु के जीता तूने,इसलिए अजया कहलाते। सब मे सर्वप्रथम तुम ही प्रभु,तभी तो अनादिह कहलाते।।...

0

आसमान रात भर पिघलता रहा

कैसे तय होंगी इश्क़ की तदबीरें हुश्न हर घड़ी चेहरा बदलता रहा वो मेरा होकर भी मेरा नहीं हुआ जिस्म में बसा,रूह से निकलता रहा सदियों में जीने की ख्वाहिश थी और वक़्त हाथ...