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जंतर मंतर से बंगाल के सुदूर गंगा तट तक गंगा प्रेमियों की एक आवाज

नई दिल्ली / 114 दिन से अनशनरत युवा संत आत्मबोधानंद अपने गुरु जी श्री शिवानंद जी व साथियों सहित कल देर रात कुंभ, गंगा किनारे अपने कैंप से, मातृ सदन, हरिद्वार पहुंचे। शिवानंद जी ने आरोप लगाया कि कुंभ के बारे में बहुत झूठा प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर अपना क्षोभ व्यक्त किया कि गंगा किनारे पूरे मंत्रिमंडल की बैठक करने का व मंत्रिमंडल के साथ कुंभ स्नान करने का विश्वव्यापी प्रचार किया जा रहा है परन्तु उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा एक बार भी आकर इस युवासंत का कुशल नहीं पूछा गया ना ही उन्होंने अपनी सरकार के किसी नुमाइंदे को भेजा। युवा संत 24 जनवरी से कुम्भ में थे जहाँ वे आम जन तक अपनी बात पहुंचाते रहे।

पर्यावरण कार्यकर्ता देबादित्यो सिन्हा ने गंगा के जल प्रवाह के बारे में कहा कि हमें पूरे साल ऐसा ही जल चाहिए गंगाजी में, सिर्फ कुम्भ के वक़्त टिहरी बांध से जल छोड़ने से क्या फायदा?जहाँ भी पुनर्वास और पर्यावरण की शर्तों को पूरा नहीं किया गया है। गंगा में अगर मछलियां, कछुए, मगरमच्छ, घड़ियाल, सूंस, ऊदबिलाव इत्यादि नहीं रहे तो यह सिर्फ बांधों के दुष्परिणाम के कारण है।

दक्षिण की प्रसिद्ध मठ तेजावुर के प्रमुख स्वामी जी ने दक्षिण के मठों को गंगा के मुद्दे पर एक साथ आने की अपील की तथा दक्षिण से गंगा के लिए चल रही इस कठिन तपस्या के लिए समर्थन दिया।

दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रतीकात्मक धरना जारी है, संसद के सामने गंगा की आवाज उठाने का क्रम रोज क्रमिक अनशन के रूप में जारी है। विभिन्न संगठनों के लोग आकर रोज प्रधानमंत्री को पत्र भेजते हैं, साथ ही ऑनलाइन पिटिशन और व्यक्तिगत रूप से भी प्रधानमंत्री, नितिन गडकरी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को पत्र भेज रहे हैं।

सर्वोच्च न्यायालय के वकीलों ने भी वरिष्ठ अधिवक्ता पी0 एस0 शारदा के नेतृत्व में 1 दिन का धरना देकर कानून के रखवालो का भी ध्यान खींचने का प्रयास किया ।

4 दिसंबर को दिल्ली के अति सुरक्षित अस्पताल से गायब हुए संत गोपाल दास जी के पिता ने जंतर मंतर पर साथियों सहित धरने पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अपने पुत्र के गायब होने /कराये जाने पर चिंता व्यक्त की । उन्होंने सरकार से ये सवाल पूछा कि युवा संत आत्मबोधानंद जी से संवाद करने के बजाय सरकार क्यों मौन है?

पश्चिमी बंगाल में  शांतिपुरा से गुप्तीपुरा तक साइकिल यात्रा निकाली गई और 1 दिन का उपवास धरना कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें अन्य साथियों के साथ नदी जल विशेषज्ञ एवं वकील सुप्रीतम करमाकर, कलोल राय एवं प्रोफेसर चंद्रिम भट्टाचार्य भी शामिल हुए।

बिहार की राजधानी पटना में गंगा किनारे जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय की ओर से  कार्यक्रम आयोजित किया गया। मजदूर किसानों के बीच काम करने वाले आशीष रंजन व कोसी नदी व उसके किनारे के निवासियों के बीच काम करने वाले महेंद्र यादव अपने साथियों सहित धरने पर बैठे। उन्होंने कहा कि गंगा देश की नदियों और उत्तर भारत की नदियों की जीवन प्राण है, सरकार कितने भी दावे करे किंतु बिहार तक गंगाजल नहीं पहुंचता है। हम इसीलिए युवा संत आत्मबोधानंद जी की अविरल और निर्मल गंगा प्रवाह की मांग का समर्थन करते हैं।

नितिन गडकरी जी ने पिछले समय में कई बार गंगा पर भविष्य में बांध ना बनने देने की बात कही है किंतु देश के पर्यावरण कार्यकर्ता, गंगा प्रेमी और सच्चे गंगा संत इस बात को नहीं समझ पा रहे हैं कि सरकार फिर मौन क्यों है वह क्यों नहीं इस मुद्दे पर बात करती?

This article was last modified on February 16, 2019 2:15 AM

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