अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रम, संयुक्त अनुसंधान एवं प्रशिक्षण तथा पेशेवर दक्षताओं के विकास हेतु भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ (आईएईए) एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर गुरुवार को हस्ताक्षर किए गए।
डीयू के वाइस रीगल लॉज में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डीन ऑफ कॉलेजेज़ प्रो. बलराम पाणी ने कहा कि यह एमओयू भास्कर कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज के विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए इन अंतर्राष्ट्रीय अवसरों का और विस्तार करेगा, जिससे वैश्विक जुड़ाव और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। इस अवसर पर भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज की ओर से प्रिंसिपल प्रो. अवनीश मित्तल उपस्थित रहे जबकि भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ की ओर से अध्यक्ष प्रो. एल. राजा, मानद निदेशक प्रो. राजेश और महासचिव सुरेश खंडेलवाल आदि उपस्थित रहे।
प्रो. राजेश ने बताया की इस समझौता ज्ञापन पर काम करने के लिए डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह के संरक्षक में कार्यान्वयन टीम काम करेगी। इसके तहत राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विज़न के अनुरूप, बहु-विषयक शिक्षा, आजीवन सीखने, कौशल विकास और रोज़गार-योग्यता पर विशेष ज़ोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ़ एप्लाइड साइंसेज़ और भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ (आईएईए) के बीच हुए इस समझौता ज्ञापन को कई लक्ष्यों की दिशा में एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
इसके तहत प्रौढ़ शिक्षा और आजीवन सीखने के क्षेत्र में व्यावसायिकता को सुदृढ़ करना; रोज़गार-योग्यता और कौशल विकास के अवसरों को बढ़ाना; अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रलेखन और प्रसार को बढ़ावा देना; क्षमता निर्माण के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को सुगम बनाना; एनईपी 2020 के कार्यान्वयन में सहायता करना (विशेष रूप से चार-वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के संदर्भ में) मुख्य बिन्दु हैं। उन्होंने कहा कि यह सहयोग अकादमिक ज्ञान और क्षेत्रीय अभ्यास के बीच की खाई को पाटेगा, जिससे आजीवन सीखने के लिए एक गतिशील परिवेश का निर्माण होगा।
प्रो. राजेश ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 वैश्विक भागीदारी, अकादमिक आदान-प्रदान और सहयोगात्मक अनुसंधान के माध्यम से उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण पर ज़ोर देती है। डीयू ने जर्मनी के जूलियस-मैक्सिमिलियंस-यूनिवर्सिटैट वुर्ज़बर्ग के साथ एक महत्वपूर्ण अकादमिक सहयोग स्थापित किया है, जिसने प्रौढ़ शिक्षा और आजीवन सीखने के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ के तत्वावधान में, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रौढ़, सतत शिक्षा एवं विस्तार विभाग के सहयोग से स्थापित ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रौढ़ एवं आजीवन शिक्षा संस्थान’ (International Institute of Adult and Lifelong Learning) की शुरुआत 2014 में जर्मनी से प्राप्त अकादमिक सहयोग के साथ हुई थी।
वर्ष 2015 से इस पहल को जूलियस-मैक्सिमिलियंस-यूनिवर्सिटैट वुर्ज़बर्ग (जर्मनी), भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रौढ़, सतत शिक्षा एवं विस्तार विभाग के बीच सहयोग के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ किया गया है। ये दोनों भारतीय संस्थाएँ इस अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में एकमात्र भारतीय भागीदार के रूप में कार्य करती हैं। इस साझेदारी ने अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रम; संयुक्त अनुसंधान और प्रशिक्षण पहल; पेशेवर दक्षताओं का विकास और वैश्विक आजीवन सीखने के ढांचों से परिचय के क्षेत्रों में अहम योगदान दिया है।
Anoop Lather
Consultant
Media Relations/ PRO
University of Delhi

