Gen Z की कार्यशैली काफी अनोखी और अलग होती है। हाल ही में सोशल मीडिया पर मुंबई की एक कंपनी में काम कर रहे एक युवा कर्मचारी ने वर्क फ्रॉम होम के कठोर नियमों के खिलाफ अपने तरीके से असहमति जताई। उसने अपने मैनेजर को ऐसा जवाब दिया जो हल्का व्यंग्यपूर्ण था, लेकिन उसमें एक गहरी समझदारी दिखी। इस कदम ने ऑफिस में कामकाज के नियमों पर चर्चा छेड़ दी और प्रबंधन को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया।
एक सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, एक कर्मचारी ने हाल ही में एक नई कंपनी में काम शुरू किया, जहां पहले ही दिन से मैनेजमेंट ने स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी स्थिति में वर्क फ्रॉम होम की अनुमति नहीं दी जाएगी. कर्मचारी ने इस नियम पर कोई आपत्ति या बहस नहीं की. उसने बिना किसी विरोध के ऑफिस के तय नियमों का पालन किया, समय पर पहुंचा, अपने काम पूरे किए और काम खत्म होते ही सही समय पर लॉग ऑफ कर दिया. उसकी दिनचर्या बिल्कुल सामान्य थी, कोई अतिरिक्त सवाल नहीं, कोई शिकायत नहीं. लेकिन एक शाम, कुछ ऐसा हुआ जिसने ऑफिस के तयशुदा नियमों को पूरी तरह बदल कर रख दिया.
एक रात करीब 8 बजे, एक कर्मचारी को क्लाइंट का मैसेज मिला, लेकिन उसने उस समय जवाब न देने का फैसला किया। अगले दिन, जब मैनेजर ने उससे इस बारे में पूछताछ की कि उसने मैसेज को नजरअंदाज क्यों किया, तो कर्मचारी का शांत और स्पष्ट जवाब सुनकर मैनेजर भी स्तब्ध रह गया। रोहित ने कहा, “सर, मैंने सोचा कि ऑफिस के घंटों के बाद घर से जवाब देना ‘वर्क फ्रॉम होम’ की श्रेणी में आएगा, और आपने तो इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित कर रखा है।” रोहित का यह जवाब सीधा-सपाट होने के साथ-साथ अप्रत्याशित रूप से गहरा भी था।
विद्रोह नहीं, अनुशासन इस घटना का मुख्य आकर्षण विरोध नहीं, बल्कि अनुशासन था। कर्मचारी ने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया, बल्कि कंपनी के नियमों का पूरी निष्ठा के साथ पालन किया। यही वजह है कि यह बात उभरकर सामने आई कि ऑफिस में काम के दौरान तो अनुशासन की सख्ती रहती है, लेकिन उसके बाद भी कर्मचारियों से हमेशा काम के लिए तत्पर रहने की अपेक्षा की जाती है। एक्स पर साझा की गई इस पोस्ट के मुताबिक, आजकल कई Gen Z कर्मचारी सीधे विरोध करने की बजाय शांति से नियमों का सहारा लेकर अपनी सीमाएं तय कर रहे हैं। कई बार सबसे बड़ा विरोध यह होता है कि बिना कुछ कहे नियमों का ठीक उसी रूप में पालन किया जाए, जैसे वे लिखे गए हैं।

