वेतन वृद्धि की मांग को लेकर नोएडा के मजदूरों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया है. उनका आरोप है कि 8 घंटे की ड्यूटी के बावजूद उनसे 10 से 12 घंटे काम कराया जाता है, जबकि उन्हें केवल 10 से 11 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता है. उनका सवाल है कि वर्तमान महंगाई के दौर में इतने कम वेतन पर जीवनयापन कैसे संभव है।

नोएडा के फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स में शुरू हुआ मजदूरों का विरोध प्रदर्शन, जो वेतन वृद्धि की मांग को लेकर था, अब पूरे शहर तक फैल चुका है। फेज-2 और इकोटेक-3 के बाद अब हालात यह हैं कि नोएडा के सेक्टर-62 और सेक्टर-15 में भी श्रमिक सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को इन प्रदर्शनकारियों का आंदोलन अचानक हिंसक स्वरूप ले लिया।

नोएडा में मजदूर आंदोलन का कारण रिचा ग्लोबल को माना जा रहा है। फरीदाबाद, हरियाणा में स्थित रिचा ग्लोबल की एक यूनिट में पिछले कुछ दिनों से श्रमिकों द्वारा वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा था। इस प्रदर्शन के बाद, हरियाणा सरकार के वेतन बढ़ोतरी के फैसले के तहत कंपनी प्रबंधन ने श्रमिकों के वेतन में 35 प्रतिशत तक वृद्धि को मंजूरी दी। इसके तहत, टेक्निकल स्टाफ का वेतन 20,000 रुपये और नॉन-टेक्निकल स्टाफ का वेतन 15,000 रुपये कर दिया गया। इस निर्णय के बाद ही नोएडा फेस-2 में स्थित रिचा ग्लोबल की चार अन्य फैक्ट्रियों में काम करने वाले सैकड़ों श्रमिकों ने भी समान वेतन वृद्धि की मांग शुरू कर दी।

नोएडा फेज-2 स्थित रिचा ग्लोबल में ऑपरेटर के पद पर कार्यरत अनुज कुमार (बदला हुआ नाम) ने aajtak.in से बातचीत में अपनी बात रखते हुए कहा कि उनकी मुख्य मांग वेतन वृद्धि की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब रिचा ग्लोबल ने हरियाणा की फरीदाबाद यूनिट में अपने कर्मचारियों और मजदूरों का वेतन बढ़ाया है, तो फिर नोएडा के कर्मचारियों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है? इसी मुद्दे को लेकर जब हम मजदूरों ने कंपनी के जीएम और एचआर से बात की, तो उन्होंने हरियाणा के समान वेतन देने से साफ इनकार कर दिया। नोएडा में केवल 361 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जो उनकी नजर में बिल्कुल भी उचित नहीं है।

महंगी गैस बनी जनआक्रोश का कारण

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के चलते एलपीजी गैस की किल्लत ने सबसे ज्यादा असर मजदूर वर्ग पर डाला है। रिचा ग्लोबल में काम करने वाले सुनील कुमार के अनुसार, अब गैस आसानी से उपलब्ध नहीं हो रही है। जो गैस पहले 80 रुपये प्रति किलो मिलती थी, उसकी कीमत अब 400 से 500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, और इसे हासिल करने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। उनके अनुसार, कई सहकर्मी बढ़ती कीमतों की वजह से गैस खरीदने में असमर्थ हो गए हैं और मजबूरी में नौकरी छोड़कर चले गए हैं। कंपनी प्रशासन की तरफ से इस गंभीर परिस्थिति को समझने या संवाद करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। महंगी गैस की यह समस्या मजदूरों की जीविका पर सीधा प्रभाव डाल रही है, जो उनके सड़क पर आंदोलन के लिए उतरने का मुख्य कारण बन गई है।

इंडिया फेडरेशन ट्रेड यूनियन के सचिव जय प्रकाश का कहना है कि रिचा गारमेंट्स ग्लोबल में लगभग 20,000 कर्मचारी कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें मात्र 11,282 रुपये का वेतन दिया जा रहा है। वर्तमान समय में बढ़ती महंगाई के मद्देनज़र यह वेतन बेहद नाकाफी है। आज के दौर में रसोई गैस की कीमत 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। ऐसे में 11,283 रुपये के मासिक वेतन में घर चलाना अत्यंत मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि मजदूर सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हुए हैं।

नोएडा में घर का किराया और खाने-पीने की चीजों की कीमतें दिल्ली के समान हैं, लेकिन यहां काम करने वाले श्रमिकों का वेतन दिल्ली के स्तर पर नहीं है। सिलाई फैक्ट्री में कार्यरत अनुज शर्मा बताते हैं कि जिस एक कमरे का किराया वे पहले 3300 रुपये प्रति माह देते थे, उसके मकान मालिक ने अब उसे बढ़ाकर 4500 रुपये कर दिया है। खाने-पीने की हर चीज की कीमत बढ़ गई है—तेल, दाल और सब्जियां सभी महंगी हो चुकी हैं—लेकिन उनकी सैलरी अभी भी वही पुरानी है।

अनुज बताते हैं कि उनका मासिक वेतन 11,283 रुपये निर्धारित किया गया है, लेकिन उन्हें मात्र 10,500 रुपये ही दिए जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिस कागज पर वेतन के लिए हस्ताक्षर कराए जाते हैं, उसमें 16,000 रुपये दर्ज होता है। वह कहते हैं, “दस हजार रुपये में नोएडा में गुजारा करना मुश्किल है। हम बिहार के मधुबनी से यहां आए हैं, और इतनी महंगाई में इतने कम पैसे में अपना जीवन कैसे चलाएं? जितनी सैलरी मिलती है, वह पूरी तरह घर के किराए और खाने-पीने के खर्चों में चली जाती है।”

विरोध प्रदर्शन में शामिल सरिता ने बताया कि वह मदरसन में काम करती हैं, जहां उन्हें कम सैलरी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उनकी मांग उचित सैलरी की है, ताकि वे मौजूदा महंगाई के दौर में अपने घर का खर्च चला सकें। सरिता ने यह भी बताया कि जब उन्होंने अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर धरना दिया, तो उनकी किसी गलती के बिना उन पर हमला किया गया।

उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडर, सब्ज़ियां और अन्य ज़रूरी चीज़ें बहुत महंगी हो चुकी हैं, जिससे गुज़ारा मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें चोट भी आई है और उनके पैरों पर गहरी चोट लगी। उनकी मांग है कि सैलरी 20,000 रुपये प्रति माह होनी चाहिए, ताकि वे नोएडा में ठीक से गुज़ारा कर सकें।

सरिता बताती हैं कि उनकी ड्यूटी तो 8 घंटे की होती है, लेकिन असल में उनसे 10 से 12 घंटे काम कराया जाता है. इसके अलावा, अतिरिक्त काम के लिए कोई अलग से भुगतान भी नहीं किया जाता. वर्तमान समय में नोएडा जैसे शहर में जीवन यापन के लिए कम से कम 18 से 20 हजार रुपये मासिक वेतन की आवश्यकता है, लेकिन उन्हें केवल 11,000 रुपये मिलते हैं, जबकि ऑपरेटर को तकरीबन 13,500 रुपये दिए जा रहे हैं. इतनी कम आय में गुजारा करना बेहद मुश्किल है, क्योंकि सिर्फ गैस सिलेंडर का खर्च ही लगभग 4,000 रुपये तक पहुंच जाता है और कमरे का किराया भी 4,000 रुपये के आसपास होता है. इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई के खर्च को भी अलग से वहन करना पड़ता है.

मजदूरों ने स्पष्ट रूप से अपनी बात रखते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों से कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे, और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वर्तमान में क्षेत्र की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, और श्रमिकों का विरोध लगातार जारी है। इस दौरान मजदूरों ने अपनी समस्याएं सामने रखते हुए बताया कि जहां हरियाणा सरकार ने वेतन में वृद्धि की है, वहीं उत्तर प्रदेश में अब भी पुराने वेतन के आधार पर काम करना पड़ रहा है।

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