भारत अब अपना 70% कच्चा तेल ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ के पारंपरिक मार्ग के बजाय अधिक सुरक्षित समुद्री मार्गों से प्राप्त कर रहा है, जो पहले केवल 55% था. देश की सभी रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता के साथ संचालन कर रही हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में कोई कमी न हो.

मध्य पूर्व एशिया में पिछले 22 दिनों से जारी संघर्ष ने पूरी एनर्जी मार्केट को झकझोर कर रख दिया है। क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं, जबकि ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया है। यह स्थिति भारत के लिए भी चुनौतीपूर्ण बन गई है, क्योंकि कच्चे तेल का आयात अब कहीं अधिक महंगा हो रहा है।

पेट्रोलियम मंत्रालय के अधीन आने वाले पीपीएसी (PPAC) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बास्केट में कच्चे तेल की औसत कीमत मार्च महीने में 117.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। खासकर 19 मार्च को यह दर $156.29 प्रति बैरल के ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिसने साल 2008 के उस रिकॉर्ड $147 प्रति बैरल को पीछे छोड़ दिया, जिसे अब तक सबसे ऊंची कीमत माना जाता था।

सिर्फ 20 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में 70% तक की जबरदस्त उछाल देखने को मिली है.

फरवरी 2026 तक कच्चे तेल का बाजार काफी संतुलित था, और इसकी औसत कीमत लगभग $69.01 प्रति बैरल थी. लेकिन युद्ध के शुरू होते ही हालात तेजी से बदल गए और कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि होने लगी. फरवरी के मुकाबले 19 मार्च तक कच्चे तेल की कीमतों में 48.08 डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो लगभग 69.67% के इजाफे के बराबर है. चूंकि भारत अपनी कुल तेल की जरूरत का 85% हिस्सा 40 से अधिक देशों से आयात करता है, ऐसे में बढ़ता आयात बिल सरकार के लिए एक गंभीर परेशानी का कारण बन गया है.

भारत का प्लान-B: ‘एक्वा टाइटन’ दे रहा है राहत

अभूतपूर्व चुनौतियों से निपटने के लिए भारत सरकार ने अपनी वैकल्पिक आयात व्यवस्था को सक्रिय कर लिया है। इसी रणनीति के तहत, रूसी टैंकर ‘एक्वा टाइटन’, जिसमें 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल लदा हुआ है, 21 मार्च की रात तक न्यू मैंगलोर बंदरगाह पर पहुंचने वाला है। इससे पहले, 18 मार्च को ‘जग लाडकी’ नामक जहाज ने मुंद्रा पोर्ट पर तेल की एक बड़ी खेप उतारी थी। बीते 22 दिनों में, भारत चार बड़े जहाजों के माध्यम से तेल और गैस का सुरक्षित भंडारण करने में सफल रहा है।

रूट डाइवर्सिफिकेशन के कारण सुनिश्चित हुई सप्लाई पेट्रोलियम मंत्रालय ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि भारत की क्रूड ऑयल आपूर्ति पूरी तरह से सुरक्षित है। मंत्रालय के मुताबिक, देश में प्रतिदिन 55 लाख बैरल की खपत होती है, जिसे पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।

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