लोकसभा में संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन भी काफी हलचल देखने को मिली। जब महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयकों पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बोलना शुरू किया, तो उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत बचपन की एक कहानी से की। लेकिन जैसे-जैसे यह कहानी आगे बढ़ी, माहौल में तनाव और शोरगुल बढ़ गया। दरअसल, राहुल गांधी ने अपनी बात रखते हुए उन्हीं कहानियों के माध्यम से बीजेपी पर तीखा प्रहार किया और अपनी बात स्पष्ट शब्दों में रखी।

राहुल गांधी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके विचारों में भ्रम है। उन्होंने कहा कि बीजेपी खुद को भारत के लोग और भारत की सेना मानती है, लेकिन ऐसा नहीं है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी कायरों की तरह आम जनता और सेना की आड़ ले रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब हम आलोचना करते हैं तो वह सरकार के खिलाफ होती है, न कि देश की जनता या सेना के खिलाफ। इसी दौरान उन्होंने अमेरिका के साथ हुई एक डील का जिक्र किया, लेकिन स्पीकर ने उन्हें रोकते हुए कहा कि जब मैं सदन में बैठा हूं, तो विधेयक पर ही चर्चा होनी चाहिए।

राहुल गांधी ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी इस बिल को पास नहीं होने देगी। महिला आरक्षण विधेयक पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यह असली महिला आरक्षण कानून नहीं है, क्योंकि 2023 में ही महिला आरक्षण का कानून पारित हो चुका है। उन्होंने मौजूदा विधेयक पर गंभीर आरोप लगाए, इसे देश के चुनावी नक्शे में बदलाव की कोशिश बताया। राहुल गांधी ने दावा किया कि यह बिल एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के अधिकार छीनने की साजिश का हिस्सा है।

उन्होंने सरकार पर डर के माहौल में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जो उसने असम और जम्मू‑कश्मीर में किया, वही अब पूरे देश में लागू करना चाहती है। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि इस विधेयक का असल मकसद महिला सशक्तिकरण नहीं बल्कि सत्ता पर कब्जा बनाए रखना है।

उन्होंने कहा कि आप सत्ता पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। यह बिल देश विरोधी है, और हम सरकार को ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे। उत्तर और दक्षिण भारत के बीच भेदभाव का आरोप लगाते हुए, उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया से दलितों और आदिवासियों की भागीदारी में कमी आ रही है। राहुल गांधी ने यह दावा किया कि यह बदलाव न केवल सामाजिक न्याय, बल्कि संघीय ढांचे के भी खिलाफ है।

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