नई दिल्ली, 03 सितंबर। दिल्ली विश्वविद्यालय में बने भारत के पहले कार्बन गार्डन का उद्घाटन डीयू के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने गुरुवार, 03 सितंबर को किया। इस अवसर पर उन्होंने कार्बन गार्डन में अपने हाथों से एक कल्प वृक्ष का पौधा भी लगाया। विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा विभाग के सामने के लॉन में स्थापित इस कार्बन गार्डन में विभिन्न प्रजातियों के ऐसे पौधे लगाए गए हैं जिनका पर्यावरण में अहम योगदान होता है। इस अवसर पर संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि इस गार्डन का क्षेत्रफल बेशक छोटा है, लेकिन इसके पीछे का आइडिया बहुत बड़ा है।

प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि दुनिया भर में हर साल वायु प्रदूषण के कारण 70 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है। वायु प्रदूषण के कारण भारत में हर साल लगभग 17 लाख लोग अपनी जान गंवाते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की जो समस्या लोगों के द्वारा किए जा रहे असंतुलित कार्यों से पैदा हुई है, उसका समाधान अकेले तकनीक से नहीं किया जा सकता। इसके लिए दूसरे कदम भी उठाने होंगे। हमें ऐसे प्रयास करने होंगे जो सतत समाधान का साधन हों। कार्बन गार्डन इसी कड़ी में एक सराहनीय प्रयास है। प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है। यहां प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है; अगर हमने सही कदम नहीं उठाए तो यह दिल्ली प्रदूषण की राजधानी बन जाएगी। उन्होंने आह्वान किया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और कॉलेजों में भी कार्बन गार्डन की स्थापना की जाए। कुलपति ने कहा कि हमारे देश में भवन निर्माण करते हुए बिना सोचे समझे पश्चिमी देशों का अंधानुसरण करना शुरू कर दिया है। इसी का परिणाम है कि काँच की बहुमंज़िला इमारतें खड़ी कर दी गई हैं; यह नहीं सोचा गया कि उन देशों के पर्यावरण के अनुसार उन्हें अधिक रोशनी की जरूरत होती है, जबकि हमारे देश में तो 300 दिन सूरज की भरपूर रोशनी उपलब्ध रहती है। ऐसे में इन इमारतों को ठंडा रखने के लिए भारत में कम से कम 30-40% अधिक बिजली की जरूरत पड़ती है। इसलिए हमें विकास की योजनाएं बनाते हुए हमारे देश की पर्यावरणीय परिस्थिति और जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए।  

अपने स्वागत भाषण में डीयू वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रमुख एवं कार्बन गार्डन के संस्थापक प्रो. दीनबंधु साहू ने भारत के पहले कार्बन गार्डन के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कार्बन गार्डन बढ़ते वायु प्रदूषण और मिट्टी के प्रदूषण से निपटने का एक समाधान है। उन्होंने बताया कि 2000 वर्ग फुट के छोटे से इलाके में विकसित यह गार्डन भीड़-भाड़ वाले शहरी इलाके के बीच एक मिनी बायोडायवर्सिटी पार्क भी है। इस गार्डन में पौधों की 50 प्रजातियां हैं, जिनमें जड़ी-बूटियां, झाड़ियाँ और पेड़ शामिल हैं। कार्यक्रम के समापन पर प्रो. रेनू देसवाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर कई विभागों के प्रमुखों सहित विभिन्न कॉलेजों के प्रिंसिपल और अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित काफी संख्या में विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।–

Anoop Lather

Consultant

Media Relations/ PRO

University of Delhi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *