पद्म श्री प्रो. जी. डी. यादव ने “वेस्ट टू वेल्थ” और डॉ. राजेंद्र सिंह ने भारत की जल प्रणालियों और नदियों को पुनर्जीवित करने पर की बात
शिक्षक की असली विरासत वे छात्र होते हैं जिन्हें वे प्रेरित करते हैं, पढ़ाते हैं और जिनका मार्गदर्शन करते हैं: प्रो. योगेश सिंह
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर।
प्रोफेसर अशोक प्रसाद मेमोरियल एजुकेशनल ट्रस्ट (PAPMET) द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के सहयोग से ‘तीसरा प्रोफेसर अशोक प्रसाद मेमोरियल लेक्चर’ आयोजित किया। डीयू के सर शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में पद्म श्री प्रो. जी. डी. यादव (पूर्व कुलपति, इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, मुंबई) ने “वेस्ट टू वेल्थ” पर बात की। कार्यक्रम के दौरान ‘वॉटरमैन ऑफ़ इंडिया’ डॉ. राजेंद्र सिंह ((रेमन मैग्सेसे पुरस्कार और स्टॉकहोम जल पुरस्कार से सम्मानित) मुख्य अतिथि रहे जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने की। इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के अलग-अलग विभागों से 400 से अधिक विद्यार्थी और 200 फैकल्टी सदस्य शामिल हुए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने प्रो. अशोक प्रसाद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि एक शिक्षक की असली विरासत वे छात्र होते हैं जिन्हें वे प्रेरित करते हैं, पढ़ाते हैं और जिनका मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने अपने शिक्षक के सम्मान में ट्रस्ट की स्थापना करने के लिए प्रो. बी. के. सिंह की सराहना की और छात्रवृत्ति के माध्यम से वंचित पृष्ठभूमि के मेधावी छात्रों की सहायता करने की PAPMET की पहल का स्वागत किया। आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में पर्यावरणीय नवाचार के महत्व पर जोर देते हुए, प्रो. सिंह ने विश्वविद्यालयों से शोध, शिक्षण और कैंपस की गतिविधियों में स्थिरता को शामिल करने का आह्वान किया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि 2047 तक विकसित भारत का विजन, एक स्वच्छ और टिकाऊ राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ-साथ चलना चाहिए। प्रो. योगेश सिंह ने छात्रों को नवाचार और उद्यमिता को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, उनसे आह्वान किया कि वे पारंपरिक तरीकों से हटकर सोचें और समकालीन चुनौतियों के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करें। कुलपति ने अभिनव विचारों का समर्थन करने और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दोहराया और युवा मस्तिष्कों को अपनी रचनात्मकता को सार्थक कार्यों में बदलने के लिए प्रेरित किया। अपने विजन का सार बताते हुए, उन्होंने इस मार्गदर्शक सिद्धांत पर जोर दिया: “दुनिया से सीखें, लेकिन भारत के लिए डिजाइन करें।”
पद्म श्री प्रो. गणपति डी. यादव ने मूल्यवान कार्बन और आणविक निर्माण खंडों (मॉलिक्यूलर बिल्डिंग ब्लॉक्स) के स्रोतों के रूप में कृषि अवशेषों, नगरपालिका के ठोस कचरे, बेकार प्लास्टिक और औद्योगिक कार्बन की क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने रासायनिक रीसाइक्लिंग, पायरोलिसिस, गैसीफिकेशन, उत्प्रेरण (कैटालिसिस), कार्बन कैप्चर और उपयोग, तथा कार्बन डाइऑक्साइड को उपयोगी उत्पादों में बदलने सहित तकनीकी तरीकों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
डॉ. राजेंद्र सिंह ने भारत की जल प्रणालियों और नदियों को पुनर्जीवित करने तथा पारंपरिक जल-प्रबंधन प्रथाओं को बहाल करने की तत्काल आवश्यकता पर बात की। राजस्थान में समुदाय के नेतृत्व में दशकों तक किए गए कार्यों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान तभी सार्थक होता है जब समुदाय इसे अपनाते हैं और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए इसका उपयोग करते हैं। उन्होंने युवाओं से सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति कार्य-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया और उन्हें अपने ज्ञान को ऐसे सार्थक कार्यों में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया जो जल सुरक्षा और सतत विकास में योगदान दें।
कार्यक्रम के आरंभ में दिवंगत प्रो. अशोक प्रसाद को श्रद्धांजलि देने के पश्चात “प्रोफेसर अशोक प्रसाद की यात्रा” नामक एक लघु वृत्तचित्र में उनके शैक्षणिक सफर, शोध में उनके योगदान और छात्रों व शोधकर्ताओं की पीढ़ियों पर उनके स्थायी प्रभाव को दिखाया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रो. राजीव गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने रसायन विज्ञान विभाग के गौरवशाली इतिहास और भारत में विज्ञान की प्रगति में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। PAPMET के अध्यक्ष और वियाट्रिस फार्मा के पूर्व ग्लोबल हेड (API) डॉ. चंद्र हास खंडूरी ने उपस्थित लोगों को PAPMET की स्थापना और भूमिका के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम का समापन दिल्ली विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. बी. के. सिंह (जो PAPMET के सचिव भी हैं) द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव और उसके बाद राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इस मेमोरियल लेक्चर का उद्देश्य रसायन विज्ञान विभाग के प्रतिष्ठित सदस्य स्वर्गीय प्रो. अशोक के. प्रसाद (1961–2023) की विरासत को सम्मान देना है। बायो ऑर्गेनिक केमिस्ट्री, नेचुरल प्रोडक्ट सिंथेसिस और बायोएक्टिव कंपाउंड्स में उनके काम को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली थी; उनके नाम 200 से अधिक रिसर्च पेपर और 10 पेटेंट दर्ज हैं। इस लेक्चर सीरीज़ की शुरुआत वैज्ञानिक उत्कृष्टता, मार्गदर्शन और रसायन विज्ञान को आगे बढ़ाने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को जारी रखने के लिए की गई थी।–


Anoop Lather
Consultant
Media Relations/ PRO
University of Delhi

