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पश्चिम यूपी- यादवों के गढ़ में बसपा सुप्रीमो की होगी आधा दर्जन से अधिक रैलियां

लखनऊ। इसे बसपा-सपा-आरएलडी के महागठबंधन की सोची समझी रणनीति ही कहा जाए तो ठीक होगा। दरअसल, पश्चिमी यूपी में यादवों का वर्चस्व वाली संसदीय सीटों पर 11 रेलियां होने जा रही हैं। इन रैलियों को बसपा सुप्रीमो मायावती संबोधित करेंगी और समाजवादी पार्टी के उम्‍मीदवारों के लिए वोट मांगेंगी। इनमें सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, डिंपल यादव, अखिलेश यादव, अक्षय यादव और धर्मेंद्र यादव शामिल हैं।

सूत्रों के मुताबिक यह मात्र संयोग नहीं है बल्कि सोच-समझकर बनाई गई महागठबंधन की रणनीति का हिस्‍सा है। पार्टी के एक सदस्‍य ने कहा, ‘बसपा को पूरा विश्‍वास है कि उसके वोट एसपी को ट्रांसफर हो जाएंगे लेकिन उसे बदले में यादवों के वोटों की जरूरत है। इसलिए मायावती की रैलियों से सपा के कोर यादव मतदाताओं को यह संदेश दिया जाएगा कि बसपा के प्रत्‍याशियों को भी उनकी सीटों पर वे समर्थन करें।


योजना के मुताबिक सपा का गढ़ समझी जाने वाली सीटों पर कुल 9 संयुक्‍त रैलियां आयोजित की जाएंगी। दो रैलियां आरएलडी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी होंगी। माना जा रहा है कि मायावती के राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बने रहने के लिए लोकसभा चुनाव बेहद महत्‍वपूर्ण है। उधर, बसपा के सदस्‍यों ने बताया कि मायावती गठबंधन को सफल बनाने के लिए हरसंभव कोशिश करने को तैयार हैं। बसपा के एक सदस्‍य ने कहा, ‘यह महत्‍वपूर्ण नहीं कि गठबंधन की ज्‍यादातर रैलियां बसपा के बजाय सपा के गढ़ में हो रही हैं।

इसका उद्देश्‍य चुनाव जीतना है और मायावती एक अतिरिक्‍त कदम बढ़ाने को तैयार हैं।’ सहारनपुर के देवबंद में विशाल रैली के बाद अब गठबंधन की रैली 19 अप्रैल को मैनपुरी में होगी जहां से मुलायम सिंह चुनावी मैदान में हैं। इसके बाद 8 मई को आजमगढ़ और 25 मई को कन्‍नौज में संयुक्‍त रैली होगी। यहां से क्रमश: अखिलेश यादव और उनकी पत्‍नी डिंपल यादव चुनावी मैदान में हैं।

बसपा के एक सदस्‍य ने बताया कि मायावती ने अपनी रैलियों में दोनों ही दलों की सीटों को साधने की कोशिश की है। हालांकि रैलीस्‍थल सपा के प्रत्‍याशियों के क्षेत्र हैं। हालांकि इसके पीछे वजह यह है कि ‘बसपा के कार्यकर्ता मायावती को सुनने के लिए ज्‍यादा लंबी दूरी तक यात्रा करने को इच्‍छुक रहते हैं।’

This article was last modified on April 9, 2019 2:26 AM

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