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Change.org का राष्ट्रव्यापी सर्वे : देश की आधी आबादी चाहती है कि 2019 चुनावों के केंद्र मेंहों महिलाओं से जुड़े मुद्दे

Change.org के पहले राष्ट्रव्यापी सर्वे #SheVotes में खुलासा हुआ कि भारी संख्या में लोग, राजनीति में महिलाओं को बढ़ावा देने, और ज़्यादा महिलाउम्मीदवारों को मौका देने के पक्ष में हैं। महिलाएं और पुरुष, दोनों ने सर्वे में जवाब दिया कि वो उन महिला उम्मीदवारों के लिए ज़रूर वोट करेंगे जो उनके हिसाब सेदक्ष हैं।

सर्वे में हिस्सा लेने वाले ज़्यादातर लोगों का मानना था कि भारतीय संसद में महिलाओं का नेतृत्व कम है, जबकि महिलाओं को लेकर आम राय ये है कि वो“जनता की समस्याओं को और बेहतर तरीके से सुनती और समझती हैं।”

देशभर से Change.org के 20,000 से भी ज़्यादा यूज़र्स ने सर्वे में हिस्सा लिया। जिसके नतीजे, दिल्ली के कमला नेहरू कॉलेज में आयोजित #SheVotesकार्यक्रम में दिखाए गए। इस कार्यक्रम में देश की बड़ी पार्टी की महिला नेताओं ने महिलाओं के राजनीतिक सफर की कठिनाइयों और मौकों पर चर्चा की।

कार्यक्रम में ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष, सुष्मिता देव ने कहा, “राजनीति में महिलाओं की भूमिका को अहमियत मिलनी चाहिए–वोटर के तौर पर भीऔर नेता के तौर पर भी। स्वाभाविक तौर पर महिलाएं नेता होती हैं। हम राजनीति में महिलाओं को और मौके देने के लिए कांग्रेस शासित सभी राज्यों में उन्हें33% आरक्षण देने की दिशा में काम कर रहे हैं।”

श्वेता शालिनी, प्रवक्ता, भारतीय जनती पार्टी ने कहा, “न्यायसंगत लोकतंत्र वो नहीं जहाँ महिलाओं को बस चुनने का अधिकार हो। बल्कि न्यायसंगत लोकतंत्र वो हैजहाँ महिलाओं के पास चुने जाने के भी एकसमान अवसर हों। समय की मांग है कि राजनीति में महिलाओं का और ज़्यादा नेतृत्व हो और कोई इससे मुंह नहीं फेरसकता।”

Change.org की कंट्री डायरेक्टर निदा हसन ने बताया, “Change.org का #SheVotes सर्वे दर्शाता है कि महिलाएं, नेताओं से सीधा संवाद स्थापित करना चाहतीहैं, पर वो अभी भी आमने-सामने बैठकर बात करने में हिचकिचाती हैं। वो ऑनलाइन पेटीशन के माध्यम से जनता के प्रतिनिधियों से जुड़ती हैं। हमारा सर्वे ये भीदर्शाता है कि लैंगिक मुद्दे आने वाले आम चुनावों में कितना महत्व रखेंगे।”

सर्वे के कुछ चौंकाने वाले आंकड़े

2019 के आम चुनावों के लिए महिलाओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है लैंगिक न्याय, पर्यावरण, स्वतंत्रता एवं मानसिक स्वास्थ्य। वहीं दूसरी ओर पुरुषों कीप्राथमिकताएं हैं–भ्रष्टाचार पर लगाम, नौकरी के और मौके, सड़क एवं इंफ्रास्ट्रक्चर।

लैंगिक मुद्दों में 5 सबसे बड़े मुद्दे कुछ इस प्रकार हैं:

  1. महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा और अपराध
  2. धर्म, शिक्षा और शादी में महिलाओं को स्वतंत्रता
  3. माहवारी से जुड़ी सेवाएं
  4. बच्चियों की शिक्षा
  5. गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य और नवजात बच्चों की मृत्यू

महिलाओं और पुरुषों ने किस मुद्दे के लिए किया कितना वोट?

  • महिलाओं के लिए लैंगिक मुद्दे, पुरुषों से कहीं ज्यादा महत्व रखते हैं।
  • ‘महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा’ और अपराध महिलाओं के लिए नंबर 1 मुद्दा रहा। वहीं पुरुषों के लिए ये मुद्दा 15वें स्थान पर रहा।
  • ‘मैरिटल रेप’ लगभग 31% महिलाओं के लिए एक मुद्दा था, जिसको 25वां स्थान प्राप्त हुआ। पुरुषों के लिए ये मुद्दा 37वें स्थान पर रहा, जहाँ करीब 16%पुरुषों ने इसके लिए वोट किया।
  • 40% महिलाओं ने ‘चुनने की स्वतंत्रता’ पर वोटकर इसे अपने लिए 11वां स्थान दिया। महिलाओं के लिए धर्म, शिक्षा और शादी में स्वतंत्रता एक बड़ा मुद्दाहै। पुरुषों के लिए ये मुद्दा 27वें स्थान पर है, करीब 23% पुरुषों ने इसके लिए वोट किया।
  • ‘नौकरी और काम के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी’ पर 33% महिलाओं ने वोट किया और ये मुद्दा महिलाओं के लिए 20वें स्थान पर रहा। केवल 21%पुरुषों ने इसके लिए वोट किया और ये मुद्दा उनके लिए 31वें स्थान पर रहा।

लैंगिक मुद्दों के अलावा क्या हैं महिलाओं के सबसे बड़े मुद्दे?

  • मानसिक स्वास्थ्य: महिला(34%) पुरुष(20%)
  • धार्मिक स्वतंत्रता :  महिला(32%) पुरुष(23%)
  • पर्यावरण संबंधी मुद्दे
    • कचरा नियंत्रण
    • वायु प्रदूषण
    • जंगलों का बचाव


वोटिंग पैटर्न

  • उम्मीदवार के ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर वोट: महिलाएं 17%, पुरुष 21.9%
  • Change.org यूज़र्स की भारी संख्या, पुरुष उम्मीदवारों के बजाए दक्ष महिला उम्मीदवारों को वोट देंगे, लगभग 56.64% ने ऐसी इच्छा जाहिर की।
  • Change.org यूज़र्स लोकतंत्र में बड़ी भूमिका निभाना चाहते हैं, जो वोट करने की भूमिका से बड़ी हो और उससे आगे जाती हो। वो चाहते हैं कि नितिनिर्धारण (पॉलिसी मेकिंग) में जनता की राय (57.53%) और ऑनलाइन पेटीशन(55.76%) को जगह मिले।
  • Change.org यूज़र्स चाहते हैं कि उनके जनप्रतिनिधी जनता से ऑफलाइन और ऑनलाइन, दोनों जगह संवाद करें
    • ऑफलाइन- सार्वजनिक मीटिंग (57.5 %)
    • ऑनलाइन – ऑनलाइन पेटीशन (55.7 %)
  • महिलाएं चुने हुए प्रतिनिधियों से सीधे मुलाकात करने में थोड़ा कतराती हैं
    • महिलाएं सार्वजनिक मीटिंग और ऑनलाइन पेटीशनों के माध्यम से चुने हुए प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित करना चाहती हैं(28.21 %)

This article was last modified on February 1, 2019 3:27 AM

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