राघव चड्ढा ने एक वीडियो जारी कर आम आदमी पार्टी के आरोपों को पूरी तरह झूठा करार दिया है. उनका कहना है कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है. राघव ने बताया कि वे संसद में जनता से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए पहुंचे हैं और उनका विश्वास है कि उनके खिलाफ फैलाया जा रहा झूठ एक दिन जरूर उजागर होगा.
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को झूठा बताते हुए खारिज किया है. साथ ही, उन्होंने यह भी कहा है कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है. राघव ने बताया कि शुरुआत में वह इन आरोपों का जवाब देने के पक्ष में नहीं थे. हालांकि, बाद में उन्हें लगा कि अगर किसी झूठ को बार-बार दोहराया जाए, तो कुछ लोग उसे सच मान सकते हैं. इसी कारण उन्होंने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देने का निर्णय लिया.
आप सांसद ने अपने वीडियो में कहा कि आम आदमी पार्टी ने तीन आरोप लगाते हुए यह तय किया है कि इन आरोपों के कारण वे राघव चड्ढा को संसद में बोलने का मौका नहीं देंगे। सांसद के अनुसार, राघव चड्ढा पर संसद में बोलने की रोक इसलिए लगाई गई क्योंकि उन्होंने ये तीन गलतियां की थीं। मैं इन तीनों बिंदुओं पर एक-एक करके चर्चा करना चाहूंगा।
राघव ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई देते हुए कहा है कि जब विपक्ष संसद से वॉकआउट करता है, तो उन पर आरोप लगाया जाता है कि वह वहीं बैठे रहते हैं और वॉकआउट में शामिल नहीं होते। इस पर राघव ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यह पूरी तरह से निराधार और गलत आरोप है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि कोई एक उदाहरण दिखाएं, एक ऐसा दिन बताएं जब विपक्ष ने वॉकआउट किया हो और उन्होंने उसका समर्थन नहीं किया हो या वॉकआउट में शामिल न हुए हों। राघव ने आगे जोर देते हुए कहा कि संसद के हर कोने में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, अगर कोई संदेह है, तो कैमरे की फुटेज निकाल कर सच्चाई सामने लाई जा सकती है। इससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। राघव ने इसे झूठा बताते हुए कहा कि उन्हें आम आदमी पार्टी के किसी भी नेता ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के लिए नहीं कहा। राघव चड्ढा ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी के राज्यसभा में कुल दस सांसद हैं, जिनमें से छह या सात सांसदों ने इस प्रस्ताव पर स्वयं ही हस्ताक्षर नहीं किए। ऐसे में उनकी गलती कैसे हो सकती है?
उन्होंने सवाल उठाया कि सारी जिम्मेदारी केवल उन्हीं पर क्यों डाली जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के लिए राज्यसभा में कुल पचास सांसदों के हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है। जब विपक्ष के 105 सांसदों में से केवल 50 दस्तखत ही इस याचिका को पूरा करने के लिए पर्याप्त हैं, तो इतना विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है?


Hi there to all, for the reason that I am genuinely keen of reading this website’s post to be updated on a regular basis. It carries pleasant stuff.
Great information shared.. really enjoyed reading this post thank you author for sharing this post .. appreciated