दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि समय और जरूरत के अनुसार परिवर्तन जरूरी है, और शिक्षा परिवर्तन का सबसे बड़ा उपकरण है। देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए इनोवेशन, रिसर्च और बिजनेस डेवलपमेंट पर काम होना चाहिए। कुलपति ने यह बात गुरुवार, 16 अप्रैल को “कॉफी विद वाइस-चांसलर”के दूसरेअध्याय में हंसराज कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान विद्यार्थियों के प्रश्नों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कही। इस अवसर पर कॉलेज के विद्यार्थियों ने कुलपति से डीयू की व्यवस्था एवं उनके निजी जीवन को लेकर भी प्रश्न किए, जिनका कुलपति ने खुलकर उत्तर दिया।
प्रो. योगेश सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि आपकी पीढ़ी पहली वह भाग्यशाली पीढ़ी है, जो विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए सीधे तौर पर जुड़ी है। आपकी पीढ़ी की जिम्मेदारियाँ भी बहुत अधिक हैं और अपेक्षाएँ भी बहुत अधिक हैं। अगले 20-25 साल भारत का स्वर्णिम इतिहास लिखने के हैं, और हमें उसमें अपनी-अपनी भूमिका तय करनी है। सरकार अपने स्तर पर ऐसी चीजें लागू कर रही है जो की जानी चाहियें। एक विद्यार्थी ने विश्वविद्यालय के पहले डीयू साहित्य महोत्सव के आयोजन पर खुशी जताते हुए कुलपति से प्रश्न किया कि आपको यह विचार कहां से आया? कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने उत्तर देते हुए कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में सभी तरह के विभाग हैं। ऐसे में हमने सोचा कि अगर विश्वविद्यालय ऐसा आयोजन करे तो उसका प्रभाव बहुत व्यापक होगा और हमारे विद्यार्थियों को इससे काफी अच्छे अनुभव प्राप्त होंगे। कुलपति ने कहा कि इसके परिणाम काफी अच्छे रहे हैं, साहित्य महोत्सव का आयोजन अब प्रतिवर्ष किया जाएगा और इसमें कुछ और चीजें भी जोड़ी जाएंगी।
एनईपी 2020 को लेकर एक विद्यार्थी के सवाल का जवाब देते हुए कुलपति ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति को बेहतर इंसान बनाना है। ऐसे में वक्त की जरूरत के अनुसार परिवर्तन जरूरी हैं। शिक्षा में जब कोई चीज बदलती है तो उसे विद्यार्थी केंद्रित और विद्यार्थियों के हित में होना चाहिए। बदलते वक्त के साथ तकनीक और अनुसंधान को बढ़ावा देने की जरूरत है। एनईपी 2020 में इस पर ज़ोर दिया गया है। स्नातक में चौथे वर्ष को लेकर पूछे गए प्रश्न पर कुलपति ने कहा कि आज अकादमिक और कॉर्पोरेट सैक्टर में रिसर्च माइंडसेट चाहिए इसलिए इसमें रिसर्च पर ज़ोर दिया गया है। इससे कॉर्पोरेट और अकादमिक में भी रास्ते खुलते हैं। यह शुरुआती दौर है, भविष्य में इसके काफी अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे।
एक विद्यार्थी द्वारा कुलपति से जब एआई को लेकर प्रश्न किया गया कि अगर आप आज के समय में विद्यार्थी होते तो क्या अपने असाइनमेंट्स के लिए चैट जीपीटी को कैसे प्रयोग करते? कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने उत्तर देते हुए कहा कि मैं आज भी चैट जीपीटी को देखता हूँ, लेकिन मात्र विषय की पृष्ठभूमि देखने के लिए। आप असाइनमेंट्स के लिए केवल एआई पर ही निर्भर न रहें, इसे सहायक की तरह इस्तेमाल करें और अपने ऊपर हावी न होने दें। डाटा और सूचना व जानकारी के लिए यह अच्छा है, लेकिन अपनी रीडिंग, राइटिंग और स्पीकिंग की स्किल्स के साथ समझौता न करें।
वाइस रीगल लॉज के काउंसिल रूम में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन डीयू दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को सीधे कुलपति से संवाद का मौका मिले और वे अपनी बात खुल कर उनके सामने रख सकें। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के पहले सत्र में मिरांडा हाउस कॉलेज की 10 छात्राओं ने भाग लिया था। इस बार दूसरे सत्र में हंसराज कॉलेज के 13 विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में भाग लेने के पश्चात विद्यार्थियों ने कहा कि वह इस आयोजन से काफी खुश हैं। उन्हें पहली बार अपने विचार एवं समस्याएं निजी तौर पर सीधे कुलपति के साथ साझा करने का अवसर मिला है। विद्यार्थियों ने कहा कि क्लासरूम से निकाल कर सीधे कुलपति के साथ निसंकोच अपनी बात रखना उनके लिए अनूठा अनुभव था। जिस प्रकार कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने उनके साथ खुले माहौल में बातचीत की, जिससे वे काफी प्रभावित हुए।–


Anoop Lather
Consultant
Media Relations/ PRO
University of Delhi

