हां! मैं कविता हूं

भावनाओं के गर्भ से जन्मी

शब्दों की सौगात हूं

जिसमें अवगुंठित है

हृदय की पीड़ा भी

मधुर भावों की भीनी सुगंध भी

मैं कल्पना का

असीमित आगार हूं।

हां! मैं कविता हूं

सृजन की आवाज़ हूं

कवि के चिंतन से निकलकर

कागज़ पर उतरती

पावन गंगा सी प्रवाहित

अनंत विचारों की, उद्गारों की,

शांत, निर्मल रसधार हूं।

हां! मैं कविता हूं

मिट्टी, पानी, हवा, धूप की भांति

स्वतः निर्मित प्रकृति हूं

प्रेम में भीगी

 मधुर फुहार हूं

अक्षर अक्षर में ध्वनित

स्नेहिल झंकार हूं।

हां! मैं कविता हूं

दोहा, मुक्तक, छंद, सोरठा,

चौपाई सी,

अनेक विधाओं से सज्जित

गीतों का अनुबंध हूं

अम्बर के असंख्य तारकों की भांति

अनगिनत भावों का

उद्गार हूं।

हां! मैं कविता हूं

सैनिकों के हृदयों में

देशप्रेम जाग्रत करने की

जोशभरी हुंकार हूं

वीर शहीदों के बलिदान,

सम्मान का

अनमोल श्रृंगार हूं !!!

स्मृति श्रीवास्तव

एवीके न्यूज सर्विस

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