आत्म-मंथन – आरुषि | बारहवीं कक्षा की छात्रा
मैं—मैं में नहीं, मुझसे हूँ। हिम्मत नहीं है मुझमें फिर भी कहूँगी। समझ नहीं है मुझमें फिर भी लिखूँगी। अक्सर लोग निकाल देते हैं मेरे विचार को दिमाग से क्योंकि…
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मैं—मैं में नहीं, मुझसे हूँ। हिम्मत नहीं है मुझमें फिर भी कहूँगी। समझ नहीं है मुझमें फिर भी लिखूँगी। अक्सर लोग निकाल देते हैं मेरे विचार को दिमाग से क्योंकि…
मुझे नफ़रत ज़रा सोच समझ कर करना मोहब्बत होने के आसार होते हैं। मेरी बात औरों से ज़रा सोच समझ कर करना इश्क होने पर सब कुर्बान होते हैं। दिल…
हां मैं लिखता हूं सिर्फ लिखने के लिए नहीं अपने जज्बातों के इज़हार के लिए भी हां मैं लिखता हूं हर अल्फ़ाज़ में तुमको मगर कहता नहीं कभी अपने लफ्जों…
शमशान की राख को सीने से लिपटाए फिरता हूँ, महाकाल का भगत हूँ उनका नाम लिए फिरते हूँ, मैं चुपचाप सभी की सुनता हूं किसी को कुछ बोलता नहीं। आदेश…
अष्टद्रव्य से पूजा करें, भावों का विस्तार, प्रभु चरणों में अर्पित करें, श्रद्धा अपार। जल-चंदन-अक्षत-पुष्प, नैवेद्य दीप उजियार, धूप-फल से पूर्ण हो, प्रभु का सत्कार॥ जल चढ़ाऊँ चरणों में, समर्पण…
तेरे दर्द को अल्फ़ाज़ दूंगा मत सोच तू अकेला हैं हर कदम पर तेरा साथ दूंगा। दर्द का समुंदर जो तेरे अंदर नित्य रफ़्ता रफ़्ता बहता है उसको भी एक…
मेरे लफ़्ज़ों की आख़िरी बात तू, मेरी ख़ामोशी का हर राज़ तू, तुझसे ही चलती है ये धड़कन, मेरे होने का एहसास तू तेरे बिना सब फीका सा लगे, जैसे…
हमें यूं तुमको देखने की आदत है। न है मोहब्बत फिर भी बहुत कुछ कहने की आदत है। कभी सोचा ही नहीं तुमको पाने का बस यूं ही तुमसे दिल…
हां! मैं कविता हूं भावनाओं के गर्भ से जन्मी शब्दों की सौगात हूं जिसमें अवगुंठित है हृदय की पीड़ा भी मधुर भावों की भीनी सुगंध भी मैं कल्पना का असीमित…
मैं गूंजता रहूंगा तेरे शहर में तेरी यादों के संग। मैं अकेला ही सही पर फ़िरता रहूंगा हर जगह तेरी खामोशी को ले अपने संग। लोग पूछेगे मुझें जब क्या…