अष्टलक्ष्मी दर्शन यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत आईआईएम शिलांग (मेघालय) जा कर आए दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने सीधा संवाद किया। इस अवसर पर कुलपति ने उनके अनुभवों को गौर से सुना और सुझाव भी आमंत्रित किए। कुलपति ने कहा कि दिल्ली में बैठ कर गरीबी का एहसास करना संभव नहीं है। भारत सरकार द्वारा देश में करीब 80 करोड़ लाभार्थियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत नि:शुल्क खाद्यान्न उपलब्ध करवाया जा रहा है। देश धीरे-धीरे दरिद्रता से बाहर निकलने का प्रयास कर रहा है।
नई दिल्ली, 11 मार्च। कुलपति ने विकसित भारत के संकल्प को लेकर सभी विद्यार्थियों से उनके विचार और सुझाव सुने और कहा कि हम सभी को “विकसित भारत 2047” को केंद्र में रख कर कार्य करना है। अगले 20 वर्ष तक सरकार और देश का ध्यान आर्थिक ग्रोथ पर केन्द्रित होना चाहिए। विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिये अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ाने की जरूरत है। प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि समृद्धि आएगी तो बहुत कुछ साथ लेकर आएगी। उन्होंने कहा कि आजादी के 60 साल बाद देश की अर्थव्यवस्था एक ट्रिलियन डॉलर थी, जो 2025 में 4 ट्रिलियन डॉलर बन गई है। इससे साफ है कि समय के साथ भारत की आर्थिक गति लगातार तेज हुई है। अगले 20 वर्षों में हमें 25 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है। इसके लिए सभी का सहयोग जरूरी है।
प्रो. योगेश सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि आप सब विकसित भारत के एम्बेसडर हैं। आप सबको यह अहसास रखना है कि सभी हमारे भाई-बहन हैं और हम सब एक ही परिवार हैं। ये देश हमारा है और हमें ही इसकी चिंता करनी है। हमें छोटे- छोटे हितों से बाहर निकल कर देश के व्यापक हित में काम करना है। इसके साथ ही कुलपति ने कहा कि भारत की संस्कृति प्राचीन काल से बहुत ही समृद्ध रही है; हमें अपनी प्राकृतिक जीवन शैली को संरक्षित करने की जरूरत है। इस अवसर पर दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार त्रिपाठी और डीन अकादमिक प्रो. के. रत्नाबली सहित कई शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
एक से चौदह फरवरी तक आयोजित प्रोग्राम में लिया डीयू के 20 विद्यार्थियों ने भाग: प्रो. रंजन कुमार त्रिपाठी
छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार त्रिपाठी ने बताया कि अष्टलक्ष्मी दर्शन यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के 9वें बैच का आयोजन एक से चौदह फरवरी 2026 तक आईआईएम शिलांग (मेघालय) में हुआ, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के 20 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। ये विद्यार्थी भारत के 15 अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के अलग-अलग कॉलेजों और विभागों में पढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि डेवलपमेंट ऑफ़ नॉर्थ ईस्टर्न रीजन मंत्रालय (MDoNER) और नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (NEC) के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मकसद युवाओं में कल्चरल एक्सचेंज, एकेडमिक लर्निंग और नेशनल इंटीग्रेशन को बढ़ावा देना था।
इन प्रतिभागियों ने आईआईएम शिलांग और एनईएचयू में कैट की तैयारी, नॉर्थ ईस्ट इंडिया की जियोग्राफी और बायोडायवर्सिटी, टूरिज्म पोटेंशियल तथा रीजनल डेवलपमेंट जैसे विषयों पर एकेडमिक सेशनों में हिस्सा लिया। इंस्टीट्यूशनल विज़िट में ईस्टर्न एयर कमांड, नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल, आईसीसीआर शिलांग, लोक भवन और आईसीएआर रिसर्च कॉम्प्लेक्स शामिल थे, जिससे इनको गवर्नेंस, डिफेंस और रिसर्च जैसी पहलों के बारे में जानकारी मिली।
Anoop Lather
Consultant
Media Relations/ PRO
University of Delhi

