मैं गूंजता रहूंगा तेरे शहर में

तेरी यादों के संग।

मैं अकेला ही सही

पर फ़िरता रहूंगा हर जगह 

तेरी खामोशी को ले अपने संग।

लोग पूछेगे मुझें जब

क्या दर्द है तुम्हें?

मगर मैं फिर भी 

चुपचाप फिरता रहूंगा 

सीने में दफन की 

तेरी खामोश यादों को ले संग।

मैं लिखता रहूंगा

हर जगह इश्क़

लोग पूछेंगे मुझे 

कौन है हमराही तेरा?

तो मैं चुपचाप हंसता रहूंगा,

तेरी मुस्कुराहट को याद कर।

डॉ.राजीव डोगरा

कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)

(हिंदी  अध्यापक)

पता-गांव जनयानकड़, पिन कोड -176038, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

rajivdogra1@gmail.com

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