शुक्रवार, 24 अप्रैल। दिल्ली विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता और विभाजन अध्ययन केंद्र (सीआईपीएस) के सहयोग से हंसराज कॉलेज में शुक्रवार को “भारत का विभाजन” विषय पर एक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हंसराज कॉलेज की प्राचार्या प्रो. रमा ने अपने स्वागत भाषण में, दर्शकों और प्रतिभागियों से इतिहास के वास्तविक स्वरूप को समझने के लिए निरंतर प्रयास करने तथा 2047 तक राष्ट्र को ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। सीआईपीएस के निदेशक प्रो. रविंदर कुमार ने अपने परिचयात्मक संबोधन में विभाजन के कारणों पर प्रकाश डाला और युवा पीढ़ी से देश की एकता और विविधता को अक्षुण्ण बनाए रखने का आह्वान किया।
प्रतियोगिता के दौरान “भारत के विभाजन के कारण और परिस्थितियाँ (1946-1947) ”, “विभाजन की हिंसा में फँसे लोग: लैंगिक परिप्रेक्ष्य” और जीवन का पुनर्निर्माण: स्वतंत्र भारत के समाज में पुनर्वास की समस्याएँ विषयों पर विद्यार्थियों ने अपने अपने उद्बोधन प्रस्तुत किए।
इस प्रतियोगिता में दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों/विभागों/केंद्रों में छात्रों ने भाग लिया और विभाजन पर अपने अनूठे दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। कुल 38 प्रतिभागियों का मूल्यांकन सीआईपीएस की शासी निकाय से गठित निर्णायक मंडल द्वारा निर्धारित मानदंडों के आधार पर किया गया; इन मानदंडों में विषय की प्रासंगिकता, मौलिकता, रचनात्मकता, विषय-वस्तु की गहनता, शोध की गुणवत्ता, प्रस्तुतीकरण की सुव्यवस्था एवं स्पष्टता, भाषा-शैली तथा समग्र प्रस्तुति शामिल थे। प्रतियोगिता के समापन के उपरांत, प्रो. अमृत कौर बसरा ने अपने संबोधन में इस बात पर ज़ोर दिया कि विभाजन के पीड़ितों को “शरणार्थी” मानने के बजाय, उनके लिए संशोधित शब्दावली “विस्थापित आबादी” का प्रयोग किया जाना चाहिए।
प्रो. युथिका मिश्रा ने दर्शकों को भारत के विभाजन के उस मनमाने फ़ैसले के लगातार जारी गंभीर नतीजों की याद दिलाई, जिसे ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों ने दुर्भावनापूर्ण इरादों से लिया था। डॉ. वरुण गुलाटी ने भाषण कला में शोध और निष्पक्षता के महत्व पर ज़ोर दिया, और इस बात को रेखांकित किया कि तैयारी और प्रस्तुति भावनात्मकता के बजाय ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान सीआईपीएस के निदेशक प्रो. रविंदर और संयुक्त निदेशक प्रो. ज्योति त्रेहन शर्मा, हंसराज कॉलेज की प्राचार्या प्रो. रमा, निर्णायक मंडल में प्रो. अमृत कौर बसरा, प्रो. युथिका मिश्रा और डॉ. वरुण गुलाटी सहित कार्यक्रम के संयोजक डॉ. प्रबल सरन अग्रवाल; हंसराज कॉलेज की मोटिवेशनल सोसाइटी ‘उड़ान’ के संयोजक डॉ. विकास सिंह; हंसराज कॉलेज की डिबेटिंग सोसाइटी ‘प्रस्ताव’ के संयोजक डॉ. प्रशांत सिंह; तथा छात्र स्वयंसेवकों और प्रतिभागियों ने भाग लिया।–

Anoop Lather
Consultant
Media Relations/ PRO
University of Delhi

