मौरिस नगर में इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो मेडिकल साइंसेज के लिए बनेगा नया भवन
दिल्ली विश्वविद्यालय कार्यकारी परिषद (ईसी) की 1282 वीं बैठक का आयोजन बुधवार, 29 अप्रैल, 2026 को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह की अध्यक्षता में हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज द्वारा विभिन्न विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की सीधी भर्ती की प्रक्रिया में शॉर्टलिस्टिंग मानदंड के उल्लंघन पर डीयू ईसी में गंभीर संज्ञान लिया गया। डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक कमेटी गठित करने का सुझाव दिया जिसे ईसी ने स्वीकार कर लिया। ईसी ने इस बारे में एक कमेटी का गठन किया है जो मामले को देखेगी।
विश्वविद्यालय में दाखिलों के दौरान कॉलेजों में खाली सीटों को लेकर यह निर्णय लिया गया है कि जिन संयोजनों के लिए प्राप्त प्राथमिकताएं कम हैं, या जिनमें सीटें खाली रह गई हैं, उन पर कॉलेजों द्वारा पुनर्विचार किया जा सकता है। हालांकि, कोई भी मौजूदा प्रोग्राम बंद नहीं किया जाएगा। दिल्ली विश्वविद्यालय के मौरिस नगर में इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो मेडिकल साइंसेज के लिए 174.20 करोड़ रुपये की लागत से भवन निर्माण को भी डीयू ईसी में मंजूरी प्रदान की गई है।
बैठक के आरंभ में डीयू कुलसचिव डॉ विकास गुप्ता ने पिछली ईसी बैठक के मिनट्स और एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत की। गत 15 अप्रैल को आयोजित हुई डीयू एकेडमिक काउंसिल की बैठक में की गई सिफारिशों पर विचार करने के उपरांत उन्हें भी स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में शून्य काल के दौरान सदस्यों ने अपने अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए। डीयू अकादमिक परिषद की 15 अप्रैल को हुई बैठक में पारित किए गए विभिन्न संकायों के पाठ्यक्रमों को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
चार वर्षीय स्नातक का चौथा वर्ष पूर्ण होने को देखते हुए कई विभागों के लिए एक वर्षीय स्नातकोत्तर के पाठ्यक्रमों को भी ईसी द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई। दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा ‘बौद्ध अध्ययन में उन्नत अध्ययन केंद्र’ (Centre for Advanced Studies in Buddhist Studies) स्थापित किया जाएगा। ‘प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम’ (PMJVK) योजना के अंतर्गत इस परियोजना के ‘प्रथम चरण’ (Phase-I) के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय से प्रशासनिक अनुमोदन पहले ही प्राप्त हो चुका है।
सेंट स्टीफंस के मामले में ईसी द्वारा कमेटी गठित
दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज द्वारा विभिन्न विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की सीधी भर्ती की प्रक्रिया में शॉर्टलिस्टिंग मानदंड के उल्लंघन पर डीयू ईसी में गंभीर संज्ञान लिया गया। विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की बैठक में कॉलेज द्वारा शॉर्टलिस्टिंग मानदंड के इस उल्लंघन का विषय उठाए जाने पर कार्यकारी परिषद ने यह निर्णय लिया कि कॉलेज को अनुशंसित उम्मीदवारों को नियुक्ति आदेश जारी करने से रोका जाए और इस संबंध में परामर्श दिया जाए, क्योंकि कॉलेज द्वारा अपनाया गया शॉर्टलिस्टिंग मानदंड विश्वविद्यालय के नियमों के अनुरूप नहीं है और त्रुटिपूर्ण है।
इसे लेकर ईसी द्वारा इस मामले में एक कमेटी का गठन किया गया है। डीयू रजिस्ट्रार द्वारा सेंट स्टीफंस कॉलेज के प्रिंसिपल को एक पत्र के द्वारा सूचित किया गया है। बैठक के दौरान सदस्यों द्वारा बताया गया कि कॉलेज द्वारा प्रत्येक अनारक्षित रिक्ति के लिए 70 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने के मानदंड का पालन किया जा रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद और कार्यकारी परिषद ने असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए इंटरव्यू हेतु उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग के लिए एक मानदंड पारित किया हुआ है।
इस मानदंड के अनुसार प्रत्येक रिक्ति के लिए 40 उम्मीदवारों को और बाद की रिक्तियों के लिए 20 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाना होता है। इस मुद्दे की जांच हेतु कार्यकारी परिषद द्वारा गठित कमेटी में कार्यकारी परिषद (ईसी) में कुलाधिपति के नामित सदस्य प्रो. इंदर मोहन कपाही अध्यक्ष होंगे। उनके साथ ईसी सदस्य अमन कुमार, ईसी सदस्य डॉ. मोनिका अरोड़ा, ईसी सदस्य डॉ. एल.एस. चौधरी सदस्य होंगे और संयुक्त रजिस्ट्रार (कॉलेज) कमेटी के सचिव बनाए गए हैं।
‘सेमेस्टर अवे प्रोग्राम’ पर कमेटी गठित
यूजीसीएफ़-2022 के तहत किसी विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान के साथ ‘सेमेस्टर अवे प्रोग्राम’ शुरू करने के प्रस्ताव पर ईसी द्वारा एक कमेटी का गठन किया गया है। डीयू के डीन ऑफ कॉलेजेज़ प्रो. बलराम पाणी की अध्यक्षता में यह कमेटी इस विषय पर संबंधित लोगों से चर्चा करके अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। गौरतलब है कि सेमेस्टर अवे प्रोग्राम (एसएपी) के अंतर्गत विश्वविद्यालय में नामांकित विद्यार्थी (अर्थात् दिल्ली विश्वविद्यालय के किसी विभाग/केंद्र/कॉलेज में नामांकित विद्यार्थी) अपने अध्ययन कार्यक्रम का एक सेमेस्टर किसी विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान (एफ़एचईआई) में पूरा कर सकते हैं। विद्यार्थी द्वारा एफ़एचईआई से अर्जित क्रेडिट को डिप्लोमा/डिग्री प्रदान करने के उद्देश्य से गिना जाएगा, बशर्ते कि ये क्रेडिट ऐसे कोर्स कंटेंट/पाठ्यक्रम से अर्जित न किए गए हों जो एक-दूसरे से मेल खाते हों।

कॉलेज खाली सीटों के लिए कर सकते हैं कुछ विषयों का मूल्यांकन
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विभिन्न कॉलेजों में बीए प्रोग्राम के पाठ्यक्रमों और उनके संयोजनों के पुनर्संरेखण/पुनर्गठन की जांच हेतु गठित समिति की सिफारिशों को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। समिति ने सिफ़ारिश की है कि कॉलेजों को उन विभिन्न विषयों का मूल्यांकन करना चाहिए जो वे अपने बीए प्रोग्राम के हिस्से के रूप में प्रस्तुत करते हैं। जिन संयोजनों के लिए प्राप्त प्राथमिकताएं कम हैं, या जिनमें सीटें खाली रह गई हैं, उन पर पुनर्विचार किया जा सकता है। कॉलेज कुछ विषयों को एक ही बीए प्रोग्राम संयोजन के तहत संयोजित करने पर विचार कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए, उर्दू/अरबी/फ़ारसी/बंगाली/तेलुगु जैसे विषयों को किसी अन्य विषय के साथ मिलाकर, एक एकल बीए प्रोग्राम संयोजन के रूप में पेश किया जा सकता है। इसी तरह, कोई कॉलेज सोशल वर्क/सोशियोलॉजी/एजुकेशन के साथ कोई अन्य लोकप्रिय विषय जैसा कि बीए प्रोग्राम संयोजन पेश कर सकता है। वर्तमान में पेश किए जा रहे कुछ विषय, जैसे OMSP, AMSP आदि पर वाणिज्य विभाग द्वारा पुनर्विचार किया जा सकता है। कॉलेज किसी भी प्रोग्राम की स्वीकृत कुल प्रवेश क्षमता (इंटेक कपॅसिटी) में कोई बदलाव नहीं करेंगे।
हालांकि, कोई कॉलेज किसी मौजूदा प्रोग्राम में अतिरिक्त सीटें पेश कर सकता है, बशर्ते कि उन अतिरिक्त आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त संकाय सदस्य और बुनियादी ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध हों। कोई भी नया प्रोग्राम शुरू नहीं किया जाएगा, और इसी तरह, कोई भी मौजूदा प्रोग्राम बंद नहीं किया जाएगा।
मौरिस नगर में इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो मेडिकल साइंसेज के लिए 174.20 करोड़ रुपये से बनेगा नया भवन
दिल्ली विश्वविद्यालय के मौरिस नगर में इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो मेडिकल साइंसेज के लिए भवन का निर्माण किया जाएगा। इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो मेडिकल साइंसेज के भवन निर्माण के लिए सैद्धांतिक रूप से 174.20 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करते हुए विस्तृत अनुमान तथा डीपीआर तैयार करने का कार्य सीपीडबल्यूडी को सौंपने की मंजूरी प्रदान कर दी गई है। भवन समिति द्वारा ढाका कॉम्प्लेक्स में स्टूडियो अपार्टमेंट के निर्माण के लिए 233.35 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान को स्वीकृत किया गया है। ढाका कॉम्प्लेक्स में छात्रावास के लिए उक्त निर्माण को शिक्षा मंत्रालय द्वारा पहले ही स्वीकृत किया जा चुका है, जिसके तहत एचईएफ़ए से ऋण प्रदान करने हेतु 161.00 करोड़ रुपये की अनुमानित राशि निर्धारित की गई थी।
डीयू के उत्तरी परिसर स्थित दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में दो शैक्षणिक खंडों के निर्माण हेतु संशोधित निर्मित क्षेत्र को लगभग 4406.12 वर्ग मीटर के रूप में स्वीकृत किया गया है। यह संशोधन 67 पेड़ों को हटाने के पिछले प्रस्ताव के स्थान पर, केवल 33 पेड़ों को हटाने/स्थानांतरित करने के कारण किया गया है। यह प्रस्ताव पहले से स्वीकृत अनुमानित लागत 246.80 करोड़ रुपये की सीमा के भीतर ही है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय की चल रही भवन निर्माण परियोजनाओं (जो पूरी हो चुकी हैं या जल्द ही पूरी होने वाली हैं) की प्रगति की रिपोर्ट भी चीफ़ इंजीनियर द्वारा प्रस्तुत की गई।
स्वयं इसी मूक पाठ्यक्रमों से प्राप्त कर सकेंगे 5% क्रेडिट
डीयू ईसी ने स्वयं और मूक ऑनलाइन शिक्षण पाठ्यक्रमों से 5% तक क्रेडिट स्कीम को भी मंजूरी प्रदान की है। इसके तहत अंडर ग्रेजुएट (यूजी) या पोस्टग्रेजुएट (पीजी) प्रोग्राम कर रहे विद्यार्थियों को यह छूट होगी कि वे अपने प्रोग्राम के लिए तय कुल क्रेडिट का 5% तक क्रेडिट, SWAYAM/ या विश्वविद्यालय द्वारा समय-समय पर मंज़ूर किए गए इसी तरह के MOOC प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध चुनिंदा ऑनलाइन लर्निंग कोर्स से हासिल कर सकें (जिन्हें आगे ‘डिजिटल लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म’ (डीएलपी) कहा जाएगा)।
गौरतलब है कि यूजीसी (SWAYAM के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए क्रेडिट फ्रेमवर्क) विनियम, 2016 के तहत ‘Study Webs of Active Learning for Young Aspiring Minds (SWAYAM) द्वारा उपलब्ध कराए गए ऑनलाइन शिक्षण पाठ्यक्रमों से 20% तक क्रेडिट अर्जित करने की अनुमति दी थी। इसे वर्ष 2019 में विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद और कार्यकारी परिषद द्वारा अपनाया गया था। डीयू ने इसमें विद्यार्थियों की सुविधा के अनुरूप किसी कार्यक्रम के लिए निर्धारित कुल क्रेडिट का 5% तक क्रेडिट अर्जित करने हेतु छात्रों को लचीलापन प्रदान करने का मामला, 05 जुलाई, 2025 को आयोजित बैठक में विचारार्थ अकादमिक परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। अकादमिक परिषद द्वारा यह सुझाव दिया गया कि इस मामले की आगे जांच एक समिति द्वारा की जाए। इस संबंध में एक समिति का गठन किया गया था जिसके आधार पर इसे लागू किया गया है।
इसके अनुसार चार साल के यूजी प्रोग्राम के छात्र 8 क्रेडिट तक (176 क्रेडिट का 5%) हासिल कर सकते हैं, दो साल के पीजी प्रोग्राम के छात्र 4 क्रेडिट तक (88 क्रेडिट का 5%) हासिल कर सकते हैं और एक साल के पीजी प्रोग्राम के छात्र 2 क्रेडिट तक (44 क्रेडिट का 5%) हासिल कर सकते हैं। पीएचडी प्रोग्राम में दाखिला लेने वाले शोधार्थियों के मामले में, डीएलपी से 4 क्रेडिट तक हासिल किए जा सकते हैं। कोर्स के लिए विश्वविद्यालय का हर विभाग अनुभवी फैकल्टी सदस्यों का एक पैनल बनाएगा, जो डीएलपी पर उपलब्ध सही कोर्स की पहचान करेगा और उनकी सिफारिश करेगा।
हर विभागीय पैनल में संबंधित विभाग का प्रमुख अध्यक्ष होगा, उनके साथ कुलपति द्वारा नामित सदस्य, विभाग का पूर्व प्रमुख (ठीक पहले वाला) और विभाग का सबसे वरिष्ठ प्रोफेसर सदस्य होंगे। कॉलेज का सबसे वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य, जो विभाग की कोर्स समिति का सदस्य हो, एचओडी द्वारा नामित एक प्रोफेसर, एचओडी द्वारा नामित एक एसोसिएट प्रोफेसर, एचओडी द्वारा नामित एक असिस्टेंट प्रोफ़ेसर सदस्य होंगे और विभाग का डिजिटल लर्निंग कोऑर्डिनेटर सचिव होगा। —
Anoop Lather
Consultant
Media Relations/ PRO
University of Delhi

