नारी की पीड़ा – डॉ.राजीव डोगरा
आखिर मैं ही क्योंदबी कुचली रहुँ इस समाज मेंक्या मेरा कोई अस्तित्व नहीं ? आखिर मैं ही क्योंअपनी पीड़ा को अंतर मन में रखूँक्या मेरी संवेदनाओ का कोई वजूद नहीं?…
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आखिर मैं ही क्योंदबी कुचली रहुँ इस समाज मेंक्या मेरा कोई अस्तित्व नहीं ? आखिर मैं ही क्योंअपनी पीड़ा को अंतर मन में रखूँक्या मेरी संवेदनाओ का कोई वजूद नहीं?…
मृत्यु तुम करो न भक्षण मेरा मैंने भी देखना है काल बड़ा है या काली। भाग्यविधाता लिखो ना भाग्य मैंने भी देखना है कर्म बड़ा है या कर्मदाता। समय बदलो…
हां मैं बुरा हूं क्योंकि मैं चाहता हूं कि तुम हमेशा खुश रहो। हां मैं बुरा हूं क्योंकि मैं चाहता हूं कि तुम बुरे लोगों से सदा दूर रहो। हां…
जब मैं शांत हो जाऊंगातुम अशांत हो उठोगेहृदय के अंतकरण तक। मेरा मौनसदा के लिए तुम्हारे हृदय मेंअशांति को विद्यमान कर देगा। मेरे प्रेम की अभिव्यक्तितुम्हारे लिए करनाकठिन से भी…