Category: Poet

नारी की पीड़ा – डॉ.राजीव डोगरा

आखिर मैं ही क्योंदबी कुचली रहुँ इस समाज मेंक्या मेरा कोई अस्तित्व नहीं ? आखिर मैं ही क्योंअपनी पीड़ा को अंतर मन में रखूँक्या मेरी संवेदनाओ का कोई वजूद नहीं?…

दिव्य प्रेम- राजीव डोगरा

जब मैं शांत हो जाऊंगातुम अशांत हो उठोगेहृदय के अंतकरण तक। मेरा मौनसदा के लिए तुम्हारे हृदय मेंअशांति को विद्यमान कर देगा। मेरे प्रेम की अभिव्यक्तितुम्हारे लिए करनाकठिन से भी…