नया साल – डॉ.राजीव डोगरा
नए साल की शुरुआत हे!माँ काली तेरे विश्वास पर करता हूँ। मानता हूँ कि मैं खास नहीं मगर तेरे ऐतबार पर नए साल पर एक नई शुरुआत करता हूँ। छोड़…
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नए साल की शुरुआत हे!माँ काली तेरे विश्वास पर करता हूँ। मानता हूँ कि मैं खास नहीं मगर तेरे ऐतबार पर नए साल पर एक नई शुरुआत करता हूँ। छोड़…
आखिर मैं ही क्योंदबी कुचली रहुँ इस समाज मेंक्या मेरा कोई अस्तित्व नहीं ? आखिर मैं ही क्योंअपनी पीड़ा को अंतर मन में रखूँक्या मेरी संवेदनाओ का कोई वजूद नहीं?…
मृत्यु तुम करो न भक्षण मेरा मैंने भी देखना है काल बड़ा है या काली। भाग्यविधाता लिखो ना भाग्य मैंने भी देखना है कर्म बड़ा है या कर्मदाता। समय बदलो…
टूटे हुए लफ्ज़ों को बटोर कर मैंना लिखना सिखा हैं। बहतें अश्कों के दरिया में डूबकर मैंना तैरना सिखा है। जिस मिट्टी में मेरे अपनों ने ही मुझे मिट्टी किया,…