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फिर वही मौसम बुलाए

फिर वही मौसम बुलाए, फिर वही शामें मिलें,तेरी बातों की महक से, ये हवाएँ फिर खिलें।खामोश बैठे देखते रहें, चाँदनी के सिलसिले,दिल के इन रास्तों पर, तेरे कदमों के काफ़िले।…

दिव्य प्रेम- राजीव डोगरा

जब मैं शांत हो जाऊंगातुम अशांत हो उठोगेहृदय के अंतकरण तक। मेरा मौनसदा के लिए तुम्हारे हृदय मेंअशांति को विद्यमान कर देगा। मेरे प्रेम की अभिव्यक्तितुम्हारे लिए करनाकठिन से भी…

कविता – कुछ सिखा है

टूटे हुए लफ्ज़ों को बटोर कर मैंना लिखना सिखा हैं। बहतें अश्कों के दरिया में डूबकर मैंना तैरना सिखा है। जिस मिट्टी में मेरे अपनों ने ही मुझे मिट्टी किया,…