आत्म-मंथन – आरुषि | बारहवीं कक्षा की छात्रा
मैं—मैं में नहीं, मुझसे हूँ। हिम्मत नहीं है मुझमें फिर भी कहूँगी। समझ नहीं है मुझमें फिर भी लिखूँगी। अक्सर लोग निकाल देते हैं मेरे विचार को दिमाग से क्योंकि…
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मैं—मैं में नहीं, मुझसे हूँ। हिम्मत नहीं है मुझमें फिर भी कहूँगी। समझ नहीं है मुझमें फिर भी लिखूँगी। अक्सर लोग निकाल देते हैं मेरे विचार को दिमाग से क्योंकि…
मुझे नफ़रत ज़रा सोच समझ कर करना मोहब्बत होने के आसार होते हैं। मेरी बात औरों से ज़रा सोच समझ कर करना इश्क होने पर सब कुर्बान होते हैं। दिल…