प्रधानमंत्री मोदी की अपील के दूसरे दिन और डोनाल्ड ट्रंप के बयान के असर के चलते भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। आज सेंसेक्स 1500 अंक लुढ़क गया, जिससे निवेशकों को करीब 11 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
ईरान-अमेरिका के बीच संभावित संघर्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शांति अपील के बावजूद शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी रहा. दूसरे दिन भी बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली, जिसमें सेंसेक्स करीब 1500 अंक लुढ़क गया और निफ्टी 400 अंकों से अधिक गिर गया. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तीव्र गिरावट रही, जबकि रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया.
इस घटनाक्रम से सबसे ज्यादा प्रभाव निफ्टी आईटी सेक्टर पर पड़ा, जो करीब 3.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ. एनएसई पर लगभग सभी सेक्टर इंडेक्स, जैसे मेटल, तेल और गैस, और पब्लिक सेक्टर बैंक को छोड़कर, गिरावट के दबाव में दिखे. निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स भी क्रमशः 1.26 प्रतिशत और 0.81 प्रतिशत नीचे आ गए. बीएसई सेंसेक्स में 1456 अंक यानी 1.92 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 74,559 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 436 अंक या 1.83 प्रतिशत टूटकर 23,380 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी बैंक में 884 अंकों की बड़ी गिरावट नजर आई.
11 लाख करोड़ का झटका
बीएसई के टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 3 में मामूली तेजी देखने को मिली, जबकि शेष 27 शेयर घाटे के साथ बंद हुए। अडानी पोर्ट, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल जैसे प्रमुख शेयरों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। इस जबरदस्त गिरावट का नतीजा यह हुआ कि निवेशकों की संपत्ति में 11 लाख करोड़ रुपये की भारी कमी आई। बीएसई का मार्केट कैप 467 लाख करोड़ रुपये से गिरकर 456 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
शेयर बाजार में गिरावट के पीछे इन प्रमुख कारकों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है:
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 2.45 प्रतिशत बढ़कर 106.75 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई है। कच्चे तेल की दरों में इस तरह की वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने की संभावना है और कंपनियों की कमाई पर दबाव पड़ सकता है। इसके साथ ही, अमेरिका-ईरान तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि ईरान के साथ युद्धविराम एक चिंताजनक स्थिति में है, जहां हालात “बहुत नाजुक” बने हुए हैं।
जानकारों का मानना है कि होर्मुज जलक्षेत्र लंबे समय तक बाधित रह सकता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, आईटी सेक्टर पर भी भारी दबाव देखने को मिला, जिसमें 3.70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसकी एक वजह बनती है ओपनएआई द्वारा नई कंपनी लॉन्च करने की घोषणा, जो एआई विकसित करने और लागू करने में कंपनियों को 4 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का समर्थन देगी। यह घोषणा आईटी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकती है, जिससे इस क्षेत्र में निवेशकों की भावना प्रभावित हुई है।
इन घटनाक्रमों के चलते शेयर बाजार में नकारात्मकता का माहौल है और निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।

