दिल्ली में पिछले एक दशक के दौरान कई वार्डों में भूमि का तापमान तेजी से बढ़ा है. अप्रैल के महीने में भाटी वार्ड में तापमान में सबसे अधिक 6.1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है. पूरे शहर का औसत भूमि सतह तापमान 3.5 डिग्री तक बढ़ गया है. अत्यधिक शहरीकरण और हरित क्षेत्रों में कमी के कारण स्थानीय स्तर पर गर्मी का असर बढ़ रहा है. विशेषज्ञों ने इस स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर हरियाली को बढ़ावा देने और गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए ठोस योजनाएं तैयार करने की सलाह दी है.

थिंक टैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण दिल्ली के भाटी वार्ड में अप्रैल महीने के दौरान जमीन के तापमान में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जो 6.1 डिग्री सेल्सियस थी। इसके बाद, मदनपुर खादर ईस्ट और बदरपुर में तापमान में 5.9 डिग्री, गौतमपुरी में 5.7 डिग्री, और मीठापुर, देवली, संगम विहार-बी और सैदुलाजैब में 5.4 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हुई है।

इन क्षेत्रों में निर्माण कार्य बहुत तेजी से हुआ है, जिससे हरे-भरे इलाकों में कमी आई है और स्थानीय गर्मी में वृद्धि हुई है। इसके विपरीत, उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के मुबारिकपुर और निठारी वार्ड में तापमान में मामूली कमी दर्ज की गई है, जो क्रमशः 0.6 और 0.4 डिग्री तक है। वहीं, रानी खेड़ा और साबरपुर में तापमान में सबसे कम बदलाव देखने को मिला है।

लैंड सरफेस टेम्परेचर (LST) किसी क्षेत्र की सतह का वह तापमान है जो सीधे सूर्य की किरणों से प्रभावित होता है.

यह तापमान आमतौर पर आसपास की हवा के तापमान से अधिक होता है. सैटेलाइट डेटा के माध्यम से यह समझा जा सकता है कि शहर के कौन से हिस्से सबसे अधिक गर्म हो रहे हैं. एनवायरोकैटेलिस्ट्स के संस्थापक और प्रमुख विश्लेषक सुनील दहिया के अनुसार, यह डेटा उन स्थानों की पहचान करने में उपयोगी है जहां स्थानीय स्तर पर हीट एडाप्टेशन प्लान तैयार किए जा सकते हैं, ताकि बढ़ती गर्मी के प्रभाव को कम किया जा सके.

सुनील दहिया के अनुसार, गर्मी बढ़ने के पीछे कई कारक हैं, जिनमें सबसे प्रमुख कारण भूमि उपयोग में बदलाव है। जहां पहले पार्क, पानी के तालाब या छोटी-छोटी हरियाली से भरपूर जगहें होती थीं, अब उनकी जगह पर कंक्रीट के विशाल भवन, चौड़ी सड़कें और शॉपिंग मॉल नजर आते हैं। कंक्रीट, ग्रेनाइट और धातु जैसी निर्माण सामग्रियां गर्मी को अधिक मात्रा में सोखती हैं और बाद में उसे धीरे-धीरे छोड़ती हैं। इसका परिणाम यह होता है कि स्थानीय स्तर पर अत्यधिक गर्मी का अनुभव होने लगता है। इसके अलावा, हरित क्षेत्रों की कमी और तेजी से होता शहरीकरण भी इस समस्या के मुख्य कारणों में शामिल हैं।

अप्रैल के महीने में दिल्ली में UTCI सूचकांक में 3.4 डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई है। यह सूचकांक स्वास्थ्य विभाग, शहरी योजना और गर्मी से बचाव के उपायों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होता है क्योंकि यह यह दर्शाता है कि लोग वास्तविक रूप से कितनी गर्मी महसूस कर रहे हैं। सुनील दहिया ने इस ओर इशारा किया है कि जबकि प्रदूषण पर ध्यान दिया जा रहा है, बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए भी ठोस और गंभीर कदम उठाने की आवश्यकता है।

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