दिल्ली,06 जुलाई 2026। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास करते हुए बहुत बड़ा काम किया जा सकता है। ‘सहकार से समृद्धि‘ की सोच के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2021 में सहकारिता मंत्रालय बनाया और सहकारिता क्षेत्र को प्राणवायु प्रदान की। जिससे देश के कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आए। रोडमैप बनाकर सहकारी क्षेत्र में मौजूद रिक्तता को भरने का काम किया गया। साथ ही, सहकारी व्यवस्था को तकनीकी रूप से सक्षम एवं पारदर्शी बनाया गया। उन्होंने कहा कि पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण समिति) को तकनीक आधारित बनाते हुए ई-पैक्स विकसित किए गए हैं, जिसके जरिए कार्य एवं अंकेक्षण आसान हो गया है। वहीं, डिजिटल पेमेंट सिस्टम से भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता आई है।

केंद्रीय मंत्री अमित शाह सहकारिता मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सहकारिता से ग्रामीणों, किसानों, पशुपालकों एवं महिलाओं को आर्थिक संबल मिलने के साथ ही सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ा है। उन्होंने देश के किसानों से ऑर्गेनिक खेती को ज्यादा से ज्यादा अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि भूमि के संरक्षण की जिम्मेदारी भी हमारी है। केमिकल और फर्टिलाइजर से उत्पादन बढ़ने की बजाय जमीन की उर्वरता को नुकसान होता है।

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर नमन करते हुए कहा कि उन्हीं की राष्ट्रवादी सोच के कारण कश्मीर, असम और प. बंगाल आज भारत का हिस्सा हैं। उन्होंने देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धारा 370 हटाकर उनका सपना पूरा किया है।

सहकारिता के क्षेत्र में हो रहे अभूतपूर्व कार्य
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में देश में अभूतपूर्व कार्य हो रहा है। ‘सहकार से समृद्धि‘ के मंत्र के साथ सहकारिता देश के करोड़ों किसानों, पशुपालकों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण भारत के आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम बन गई है।

उन्होंने सहकारिता के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे नवाचारों और उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि सहकारिता आंदोलन राजस्थान के हर गांव-ढाणी तक पहुंच गया है। राज्य में लगभग 42 हजार से अधिक सहकारी समितियां हैं, जिनसे एक करोड़ 35 लाख से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। वहीं, सहकार सदस्‍यता अभियान के तहत 8 लाख 90 हजार नवीन सदस्‍य सहकारी समितियों में जोड़े गए हैं। साथ ही, सभी ग्राम पंचायतों में सहकारी समितियों के गठन का लक्ष्य तय किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का डेयरी सहकारिता मॉडल लाखों पशुपालक परिवारों के लिए आर्थिक संबल का आधार बन चुका है। डबल इंजन की सरकार के प्रयासों से प्रदेश में घाटे में चल रहे डेयरी संघ मुनाफे में आ गये हैं। वहीं, 10 हजार करोड़ का रिकॉर्ड टर्नओवर भी हासिल किया गया है। आरसीडीएफ व जिला दुग्‍ध संघों के कुल लाभ और टर्नओवर पिछले 47 वर्षों के इतिहास में सर्वाधिक है।

ग्रामीण आत्मनिर्भरता का माध्यम बनी सहकारिता
उन्होंने कहा कि सहकारिता से महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता दोनों लक्ष्‍यों को साधा जा रहा है। राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन तथा जिला दुग्ध संघों से 9 लाख 40 हजार दुग्ध उत्पादक सदस्य जुड़े हुए हैं, जिनमें 4 लाख 20 हजार से अधिक महिलाएं हैं। प्रदेश में हजारों नए दुग्ध संग्रह केन्द्र प्रारम्भ किए गए, नई दुग्ध उत्पादक समितियों का गठन हुआ और हजारों नए पशुपालक इस आंदोलन से जुड़े हैं। इससे दूध उत्पादन, किसानों की आय बढ़ने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। प्रदेश का दुग्‍ध संकलन 38 लाख लीटर से बढ़कर 45 लाख लीटर तक पहुंच गया है। दुग्‍ध सहकारिता से जुड़े नये सदस्‍यों की संख्‍या में 70 प्रतिशत की अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

5 हजार 646 से ज्यादा बने ई-पैक्स, 10 करोड़ से अधिक हुए ऑनलाइन लेनदेन
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने सहकारिता को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए पैक्‍स कम्प्यूटरीकरण अभियान को भी नई गति दी है। प्रथम चरण में 5 हजार 646 पैक्‍स को ई-पैक्स बनाया जा चुका है। इनके माध्यम से 10 करोड़ से अधिक ऑनलाइन लेनदेन हुए हैं, जो पूरे देश के कुल ट्रांजेक्‍शन का लगभग एक तिहाई है और देश में सबसे ज्‍यादा हैं। प्रदेश की लगभग 4 हजार 875 पैक्स तीन या उससे अधिक व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रही हैं। इनके माध्यम से कॉमन सर्विस सेंटर, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र, किसान उत्पादक संगठन और जन औषधि केंद्र जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक पंचायत में सहकारी समिति गठन की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत राजस्थान में अब तक 5 हजार 279 नई बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का गठन किया गया है। इनमें 1 हजार 977 एम-पैक्स का गठन कर प्रदेश ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। साथ ही, भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की सदस्यता दिलाने में भी राजस्थान देश में पहले स्थान पर है।

केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी एवं पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि सहकारिता जितनी मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था उतनी ही सशक्त होगी। यह केंद्र सरकार के सकारात्मक प्रयासों का परिणाम है कि आज हमारा देश दुग्ध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। वहीं, सहकारी समितियों द्वारा संकलित किए जाने वाले दूध की गुणवत्ता में भी गुणात्मक सुधार हो रहा है। साथ ही, किसानों और पशुपालकों की आय में भी सुधार हुआ है।

सहकार की मजबूती के लिए नवाचार
इस अवसर पर 50 हजार पैक्स का ई-पैक्स में रूपांतरण किया गया। साथ ही, अन्न भंडारण योजना के तहत 135 गोदामों का हस्तांतरण, 85 गोदामों का लोकार्पण एवं 47 गोदामों का शिलान्यास किया गया। इसके अलावा भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड के टिश्यू कल्चर सुविधाओं का ई-भूमि पूजन किया गया। वहीं, राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस पोर्टल 3.0, जियो टैग मोबाइल एप एवं एनडीडीबी के दूध सप्लाई समीक्षा डैशबोर्ड पोर्टल का शुभारंभ और कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन मल्टीस्टेट लिमिटेड, गोमय सहकारी समिति मल्टी स्टेट लिमिटेड का उद्घाटन भी किया गया। कार्यक्रम में सहकारिता पर आधारित प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। वहीं, डेयरी सहकारी समितियों के लिए आदर्श उप-विधियों, सहकारिता मंत्रालय की 5 वर्ष की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।

राजस्थान को मिलीं सौगातें
* 10 नए अन्न भंडारण गोदामों का शिलान्यास
* 50 गोदामों का लोकार्पण
* 100 गोदामों का राज्य भंडारण निगम को हस्तांतरण

‘सहकार वन’ का हुआ ई-भूमि पूजन
* जयपुर के सुमेल गांव में बनेगा ‘सहकार वन’
* 64 एकड़ जमीन पर होगा विकसित
* खेजड़ी, रोहिड़ा, नीम वृक्ष जैसे लगाए जाएंगे
* मियावाकी और सामान्य प्रणाली से होगा वृक्षारोपण

समारोह में केन्द्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, केंद्रीय सहकारिता और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल, सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित केंद्रीय सहकारिता एवं कृषि मंत्रालय के उच्चाधिकारी तथा बड़ी संख्या में सहकार संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

(Dr. Shivram Meena)

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