पीएफ के नए नियम: अगर बच्चों की पढ़ाई या शादी के लिए पैसे की कमी होती है, तो लोग अक्सर पीएफ खाते से रकम निकाल लेते हैं। घर खरीदने की जरूरत हो, तो वर्षों से जमा की गई इस पूंजी का उपयोग कर लिया जाता है। आज के समय में देश के अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए पीएफ की राशि मुख्य रूप से ऐसे ही कामों में खर्च हो रही है।
हमारे देश में अधिकांश लोग रिटायरमेंट फंड के प्रति पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाते। पेंशन व्यवस्था पर चर्चा करना तो दूर, अधिकतर नौकरीपेशा लोग इस विषय के प्रति जागरूक नहीं हैं और न ही उनके पास इसकी पर्याप्त जानकारी है। इसे पढ़े-लिखे वर्ग की समस्या कहें या उनकी स्थिति की मजबूरी, लेकिन सच्चाई यही है। खासतौर पर प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों में रिटायरमेंट फंड और पेंशन को लेकर उदासीनता सबसे अधिक देखने को मिलती है।
प्राइवेट नौकरी में कार्यरत लोगों के लिए पीएफ का पैसा एक महत्वपूर्ण सहारा होता है। हर महीने की छोटी-छोटी बचत से यह राशि धीरे-धीरे एक बड़े फंड में तब्दील हो जाती है। खासकर प्राइवेट जॉब करने वाले व्यक्तियों के लिए पीएफ का पैसा मुश्किल समय में मददगार साबित होता है। नौकरी छूटने की स्थिति में यही राशि आर्थिक चुनौतियों से थोड़ा राहत दिला देती है। यदि परिवार में कोई बीमार हो जाए, तो कर्ज लेने के बजाय लोग पीएफ से पैसा निकालकर इलाज करवाने को प्राथमिकता देते हैं। बच्चों की पढ़ाई या शादी के खर्च पूरे करने में भी यह रकम काम आती है। घर खरीदने जैसी बड़ी योजनाओं के लिए लोग पीएफ खाते में वर्षों से जमा अपनी पूंजी का उपयोग करते हैं। मौजूदा समय में अधिकतर मध्यमवर्गीय परिवार अपने पीएफ फंड का उपयोग इन्हीं आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कर रहे हैं। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि देश में अधिकांश लोग प्राइवेट सेक्टर में ही कार्यरत हैं।
आज PF राशि पर चर्चा का प्रमुख कारण सरकार द्वारा उठाया गया नया कदम है। सरकार ने घोषणा की है कि चंद महीनों के भीतर पीएफ फंड निकालने की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया जाएगा। इसके अनुसार, EPFO खातों को UPI और ATM से जोड़ दिया जाएगा, और यह पूरी योजना मार्च 2026 तक लागू करने का दावा किया गया है। PF निकासी प्रक्रिया को सहज बनाना निश्चित रूप से एक सकारात्मक पहल है, खासकर जब वर्तमान में लोगों को अपनी PF राशि निकालने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकार का कहना है कि जिस तरह से लोग अपने बैंक खातों से रकम निकालते हैं, उसी प्रकार की सुविधा PF फंड के लिए भी उपलब्ध करवाई जाएगी।
इस दिशा में काम तेज गति से चल रहा है। डिजिटल युग में PF खाते से रकम निकालना भले ही बहुत आसान हो जाएगा, लेकिन इसके साथ एक बड़ी चुनौती भी सामने आएगी। यह बदलाव लोगों की बचत आदतों पर गंभीर असर डाल सकता है। जब पीएफ अकाउंट से कभी भी पैसे निकालने की सुविधा उपलब्ध होगी, तो विचार करें कि ऐसे कितने लोग होंगे जो वर्षों तक अपनी राशि बचाकर रखेंगे। छोटी-छोटी जरूरतों के चलते लोग आसानी से ATM तक पहुंच सकते हैं, जिससे PF राशियां लंबे समय तक खातों में टिक पाएंगी या नहीं, यह प्रश्न खड़ा हो जाता है। वर्तमान में घर खरीदने, गंभीर बीमारी, शिक्षा या शादी जैसे महत्वपूर्ण मौकों पर PF फंड एक बड़ा सहारा बनता है। लेकिन भविष्य में यदि लगातार निकासी के कारण फंड बचा ही नहीं रहेगा, तो यह विकल्प भी खो सकता है। ऐसे में यह बदलाव भले ही तकनीकी सुविधा प्रदान करता हो, लेकिन बचत के उद्देश्य को कमजोर कर सकता है।
सेविंग्स को लेकर क्या हो विकल्प?
तुरंत पीएफ निकासी की सुविधा लागू होते ही, कई लोग अपने पीएफ अमाउंट को निकालने में आसानी महसूस करेंगे। चाहे उनके खाते में 10 लाख रुपये जमा हों या मात्र 10 हजार। मोबाइल खरीदारी और शॉपिंग जैसे जरूरतों के लिए भी लोग बिना झिझक पीएफ से पैसे निकालने लगेंगे। इस आदत के चलते स्थिति इतनी खराब हो सकती है कि हर महीने सैलरी की तरह, जैसे ही पीएफ अकाउंट में पैसे जमा होंगे, कुछ ही दिनों में वो खुद जाकर निकाल लेंगे। पहले से ही देश में रिटायरमेंट फंड को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है। आज भले ही निकासी की प्रक्रिया जटिल होने के कारण कई लोग पीएफ फंड नहीं निकाल पाते, लेकिन इसी वजह से उनके खाते में एक अच्छी राशि जमा हो रही है। परन्तु, यदि तुरंत निकासी की सुविधा मिल गई, तो 20 साल की नौकरी के बाद भी अधिकांश लोगों के ईपीएफ खाते में बमुश्किल ही कुछ पैसे बचेंगे। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि वे समय-समय पर यूपीआई और एटीएम का उपयोग करके पीएफ से पैसा निकालते रहेंगे।
अब हम कुछ आंकड़ों पर नज़र डालते हैं, जो यह स्पष्ट करेंगे कि कैसे बचत पर असर पड़ सकता है। नियमों के अनुसार, कर्मचारी और नियोक्ता दोनों कर्मचारी के मूल वेतन का 12% भविष्य निधि (PF) में जमा करते हैं, जिसमें से कुछ हिस्सा पेंशन फंड (EPS) में भी जाता है। वित्त वर्ष 2023-24 में EPFO के तहत कुल 7.37 करोड़ सदस्य थे, जिसका मतलब है कि मौजूदा समय में लगभग 8 करोड़ लोग इस संगठन से जुड़े हुए हैं। EPFO का कुल भविष्य निधि कोष (FY25) करीब 25 लाख करोड़ रुपये है, जो इसे भारत के सबसे बड़े रिटायरमेंट सेविंग फंड्स में से एक बनाता है। यह फंड हर साल बढ़ रहा है। हालांकि, नई व्यवस्था शुरू होने के बाद यह कोष घटने लगेगा। ऐसे में सवाल उठता है, यह पैसा आखिर कहां जाएगा?
लोग अब अपनी बचत को अधिक लाभकारी विकल्पों में लगाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। ऐसा संभव है कि भविष्य में लोग भविष्य निधि (PF) के धन को शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने लगें, क्योंकि वर्तमान में PF पर 8.25% की ब्याज दर मिल रही है। इसके विपरीत, म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश से बेहतर रिटर्न की उम्मीद की जाती है। शेयर बाजार में निवेश करते समय व्यक्ति अक्सर PF पर मिलने वाले ब्याज दर से कई गुना अधिक रिटर्न की आशा कर लेता है। नतीजतन, एक सुरक्षित निवेश विकल्प को छोड़कर जोखिम भरे विकल्पों में पैसा लगाने का रुझान बढ़ सकता है। हालांकि, PF के मुकाबले म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से कितना वास्तविक लाभ मिलेगा, यह तो समय ही तय करेगा। भारत में बचत के आंकड़े भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। देश की कुल सकल बचत दर लगभग 31% है, लेकिन सेबी के हालिया सर्वेक्षण के मुताबिक, केवल 10% भारतीय परिवार ही अपने धन को म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और बॉन्ड जैसे वित्तीय उत्पादों में निवेश करते हैं।
शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 15% तक पहुंचता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह केवल 6% है। हालांकि, युवाओं के बीच बचत का रुझान बढ़ रहा है, लेकिन वे तेजी से जोखिम वाले शेयर बाजार की ओर आकर्षित हो रहे हैं। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, अभी भी लगभग 69% भारतीय घर बैंक जमा या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में अपनी बचत करना पसंद करते हैं। इसके अलावा, एक अन्य रिपोर्ट से पता चलता है कि करीब 40% शहरी लोग अब तक रिटायरमेंट की योजना के लिए कोई निवेश नहीं कर पाए हैं, और ग्रामीण इलाकों में यह स्थिति और भी खराब है। देश में आधी से अधिक आबादी के पास रिटायरमेंट फंड की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं पेंशन की बात करें तो 140 करोड़ आबादी वाले देश में केवल लगभग 2% लोग ही पेंशन कवरेज के दायरे में आते हैं।
इसी क्रम में अटल पेंशन योजना (APY) आती है, जिसमें लगभग 8.34 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं, लेकिन इसमें अधिकतम 5000 रुपये मासिक पेंशन की सुविधा प्रदान की जाती है. इस योजना का लाभ पाने के लिए अभी लंबा समय इंतजार करना पड़ेगा. ऐसे में पीएफ, जो मुश्किल वक्त में एकमात्र सहारा बनता है, वह भी अब कुछ ही महीनों बाद समाप्त होने की कगार पर है.

