चीन ने चांदी को लेकर एक अहम कदम उठाया है, जिसके चलते भारत सहित पूरी दुनिया में चांदी की कीमतों में उछाल देखा जा सकता है। इसके साथ ही, चांदी की आपूर्ति भी बाधित हो सकती है। आइए समझते हैं कि चीन ने ऐसा क्या किया है और क्या इससे चांदी भविष्य में दुर्लभ तत्वों (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) की श्रेणी में आ सकती है।
चीन कई बार अपने निर्णयों से दुनिया को चौंका चुका है। हाल ही में रेयर अर्थ एलिमेंट्स से जुड़ा एक फैसला लेकर उसने लोगों को हैरान किया था, और अब चांदी को लेकर एक नया नियम लागू किया गया है। इस नए नियम के चलते चांदी के दामों में तेज़ी की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब चांदी के सस्ती होने की उम्मीद कम ही रह गई है, क्योंकि चीन के इस कदम से वैश्विक स्तर पर चांदी की खपत घट सकती है, जबकि मांग में इज़ाफा हो सकता है।
दरअसल, चीन वैश्विक चांदी आपूर्ति का एक प्रमुख नियंत्रक है। दुनिया की चांदी का बड़ा हिस्सा चीन के पास मौजूद है। हालांकि वह केवल 13 प्रतिशत चांदी का खनन करता है, लेकिन परिष्करण और उत्पादन के मामले में चीन वैश्विक सिल्वर के 60 से 70 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करता है।
चांदी पर भी रेयर अर्थ की तरह नियंत्रण?
चीन ने चांदी को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए नया नियम लागू करने का फैसला लिया है, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा। इस नियम के तहत अब बिना सरकारी लाइसेंस के कोई भी कंपनी चीन से बाहर चांदी का निर्यात नहीं कर सकेगी। इसके साथ ही, इस फैसले से वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई है। विशेषज्ञ चीन के इस कदम की तुलना उस तरीके से कर रहे हैं, जैसे उसने पहले रेयर अर्थ मिनरल्स पर नियंत्रण किया था।
किस तरह की कंपनियों को चीन देगा यह लाइसेंस
चांदी के निर्यात संबंधी कुछ शर्तें चीन ने तय की हैं। केवल कुछ मान्यता प्राप्त बड़ी सरकारी कंपनियों को ही इस कार्य की अनुमति दी जाएगी, और इसके लिए सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। लाइसेंस प्राप्त करने के लिए कंपनियों को उत्पादन क्षमता, क्रेडिट लाइन जैसी कड़ी आवश्यकताएं पूरी करनी होंगी। अब तक केवल 44 कंपनियों को ही इस बात की अनुमति दी गई है।
चीन के इस फैसले का प्रभाव क्या होगा?
वैश्विक स्तर पर चीन चांदी उत्पादन का 60 से 70 प्रतिशत नियंत्रित करता है। ऐसे में जैसे ही चीन ने चांदी के निर्यात पर नियंत्रण बढ़ाने का निर्णय लिया है, दुनिया भर में चांदी की आपूर्ति में कमी आ जाएगी, जबकि इसकी मांग लगातार बढ़ती ही जाएगी। यह स्थिति तब उत्पन्न हो रही है जब इंडस्ट्रियल क्षेत्र में चांदी की मांग पहले ही अपने उच्चतम स्तर पर है। इस वजह से चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। वर्तमान में चांदी की कीमत अपने रिकॉर्ड स्तर के करीब है और भविष्य में इसमें और तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
चीन ऐसा क्यों कर रहा है?
चीन के लिए चांदी केवल एक औद्योगिक या निवेश संपत्ति नहीं है, बल्कि वह इसे एक रणनीतिक संसाधन के रूप में देखता है। चांदी की मदद से चीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फायदेमंद सौदे कर सकता है या अपनी बात मनवाने के साधन के रूप में इसका उपयोग कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही मुख्य कारण है कि चीन चांदी पर नियंत्रण बढ़ा रहा है। इसके अलावा, चीन में घरेलू स्तर पर भी चांदी की भारी मांग बनी हुई है।
चीन वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माता है. इन सभी उद्योगों में चांदी की बड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है. इसी कारण चीन ने औद्योगिक मांग को बढ़ावा दिया है और चांदी की आपूर्ति के साथ उसके निर्यात पर भी अपना प्रभुत्व स्थापित किया है. इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर कई क्षेत्रों में अपना वर्चस्व मजबूत करना है.

