दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि शिक्षक की कोई जाति नहीं होती। शिक्षक की जाति पढ़ाना है। उसका सामाजिक कर्तव्य ज्ञान और शिक्षा प्रदान करना है। अगर कोई शिक्षक आपस में या विद्यार्थियों के साथ भेदभाव करता है तो वह ठीक नहीं। प्रो. योगेश सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों से संवाद के दौरान बोल रहे थे। कुलपति ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे ध्यान रखें कि विश्वविद्यालय में कोई भी ऐसी अप्रिय घटना न हो जिससे सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचे। विद्यार्थियों को भी समझाएं और स्वयं भी इस विषय इस पर गंभीरता से ध्यान दें। इस दौरान कुलपति ने कॉलेजों व विभागों के विभिन्न वर्गों के शिक्षकों और विद्यार्थियों से अलग-अलग संवाद किया। कुलपति ने कहा कि यूजीसी के जो नए नियम आए हैं वह अभी माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उन्हें लेकर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं की जानी चाहिए।

नई दिल्ली,16 फरवरी। इस अवसर पर दिल्ली यूनिवर्सिटी वुमेन्स एसोसिएशन की अध्यक्ष प्रो. गीता सहारे ने कहा कि समाज में शांति बनाए रखने के लिए शिक्षकों की अहम भूमिका है। हमारा फर्ज है कि हम बच्चों को समझाएं, कि यह देश हमारा है। गांधी भवन के निदेशक प्रो. केपी सिंह ने कहा कि समाज में संवाद जरूरी है। शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि डीयू कुलपति गत दिनों विश्वविद्यालय में हुई अप्रिय घटना को लेकर बहुत संजीदा हैं; वह अपना निजी नुकसान देख सकते हैं, लेकिन देश का नहीं; और यह मुद्दा देश का है। प्रो. केपी सिंह ने कहा कि कॉलेज, विभाग और फ़ैकल्टि विश्वविद्यालय की बेसिक यूनिट्स होती हैं। हम सब सद्भाव के साथ रहते हैं; अगर कोई विद्यार्थी समस्या लेकर आता है तो हम उसे गंभीरता से सुनें। कोई ये न कहे कि मेरी बात सुनी नहीं गई। इस अवसर पर डीन ऑफ कॉलेजेज़ प्रो. बलराम पाणी, दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी, चीफ विजिलेंस ऑफिसर गजेन्द्र सिंह, चेयरमैन इंटरनेशनल रिलेशन प्रो. नीरा अग्निमित्रा, प्रॉक्टर प्रो. मनोज कुमार और डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. रंजन त्रिपाठी सहित अनेकों शिक्षकों ने भी विश्वविद्यालय व कॉलेज में सामाजिक सद्भाव मजबूत करने पर अपने-अपने सकारात्मक विचार रखे।    

Anoop Lather

Consultant

Media Relations/ PRO

University of Delhi

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