भारत में सिम बाइंडिंग का नियम जल्द ही लागू होने वाला है, जिसका सीधा असर अधिकांश व्हाट्सएप उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा। हालांकि यह नियम केवल व्हाट्सएप तक सीमित नहीं है। इससे वे सभी ऐप्स प्रभावित होंगे जो फोन नंबर पर आधारित काम करते हैं, खासकर मैसेजिंग ऐप्स, जिन्हें ओटीटी ऐप्स भी कहा जाता है।
1 मार्च की निर्धारित समय सीमा को लेकर सरकार का रुख काफी कठोर नजर आ रहा है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने OTT मैसेजिंग ऐप्स को स्पष्ट निर्देश दिया है कि यूजर का अकाउंट एक सक्रिय SIM से जुड़ा होना अनिवार्य है। इसका मतलब यह हुआ कि यदि फोन में वह SIM कार्ड मौजूद नहीं है जिससे WhatsApp या Telegram पंजीकृत है, तो उन ऐप्स का उपयोग सीमित हो सकता है या यूज कर पाना पूरी तरह से बंद हो सकता है।
भारत में WhatsApp के सबसे अधिक यूजर्स हैं, जिनमें से कई एक ही नंबर का उपयोग विभिन्न डिवाइसेज पर करते हैं। इस स्थिति में, करोड़ों ऐसे यूजर्स प्रभावित हो सकते हैं जिन्होंने एक ही अकाउंट को कई डिवाइसेज पर सक्रिय रखा हुआ है। रिपोर्ट्स में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयान का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और SIM-बाइंडिंग नियमों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल धोखाधड़ी और फर्जी नंबरों के माध्यम से होने वाले अपराधों को रोकने के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है।
सिम बाइंडिंग का प्रभाव किन पर पड़ेगा?
वे उपयोगकर्ता जो एक ही सिम का उपयोग कर अलग-अलग डिवाइस पर व्हाट्सऐप चलाते हैं और अक्सर सिम कार्ड बदलते रहते हैं, सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। WhatsApp Web हर छह घंटे बाद स्वचालित रूप से लॉगआउट हो जाएगा, और इसे दोबारा चालू करने के लिए QR कोड स्कैन करना होगा। इसके अतिरिक्त, छोटे व्यवसायों का लगभग 60-80% हिस्सा इसके कारण ऑपरेशनल रुकावटों का सामना कर सकता है।
क्या सिम बाइंडिंग के बाद WhatsApp का लिंक्ड डिवाइस फीचर काम करेगा?
WhatsApp का लिंक्ड डिवाइस फीचर एक बड़ी सुविधा है, जिससे एक ही नंबर पर कई डिवाइस पर व्हाट्सऐप चलाना संभव होता है। लेकिन सिम बाइंडिंग नियम लागू होने के बाद इसमें कुछ सीमाएं आ जाएंगी। अब WhatsApp केवल उसी फोन में काम करेगा, जिसमें वह सिम होगा जिससे खाता बनाया गया था। यदि डिवाइस से सिम निकाल दिया जाता है, तो व्हाट्सऐप चलना बंद हो सकता है। अभी तक, व्हाट्सऐप 14 दिनों तक लिंक्ड रहता है, लेकिन नए नियम लागू होने पर इसे बार-बार वेरिफिकेशन की जरूरत होगी। इससे व्हाट्सऐप के कार्यों में रुकावट आ सकती है।
क्या सिम बाइंडिंग से डिजिटल धोखाधड़ी कम होगी? हाल ही के वर्षों में ऑनलाइन ठगी, फेक कॉल सेंटर और नकली प्रोफाइल के जरिए धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। सरकार का मानना है कि अगर हर मैसेजिंग अकाउंट को एक सक्रिय और असली सिम से जोड़ा जाए, तो जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों को पकड़ना आसान हो सकता है। इसी कारण इसे साइबर सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
SIM बाइंडिंग को लेकर टेक कंपनियों का विरोध
दूसरी ओर, कुछ अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों और उद्योग संगठनों ने इस बारे में अपनी चिंता व्यक्त की है। कुछ रिपोर्ट्स का कहना है कि वैश्विक मैसेजिंग कंपनियों ने दूरसंचार विभाग (DoT) के इन नियमों पर सवाल उठाते हुए इसे कानूनी सीमा से परे बताया है। कुछ कंपनियों ने इन नियमों को निजता (प्राइवेसी) के उल्लंघन से भी जोड़ा है। इसके बावजूद, सरकार का रुख वर्तमान में स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि इन नियमों को वापस लेने या इनके लागू होने में देरी का कोई विचार नहीं है।
WhatsApp उपयोगकर्ताओं पर क्या प्रभाव होगा?
सूत्रों के अनुसार, 1 मार्च की डेडलाइन खास महत्व रखती है क्योंकि इसे बाद नियम पूरी तरह से लागू माने जाएंगे। पहले यह बात कही गई थी कि कंपनियों को अपने सिस्टम में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने के लिए समय दिया गया है। लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है कि यह समय सीमा जल्द ही समाप्त होने वाली है। यदि ये नियम 1 मार्च से लागू हो जाते हैं, तो WhatsApp Web या अन्य उपकरणों पर लॉगिन करने के लिए प्रक्रियाएं सख्त हो सकती हैं। बिना सक्रिय SIM के ऐप का उपयोग करना संभवतः कठिन हो जाएगा। हालांकि, अभी तक आम उपयोगकर्ताओं के लिए कोई आधिकारिक सार्वजनिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। इस कारण, बहुत से लोग अब भी यह जानने का इंतजार कर रहे हैं कि आखिरकार क्या अंतिम व्यवस्था लागू की जाएगी।
यह मामला केवल WhatsApp तक सीमित नहीं है, बल्कि Telegram, Signal और अन्य मैसेजिंग ऐप्स भी इसकी परिधि में शामिल हैं। इसका मतलब है कि यह एक व्यापक नीति परिवर्तन हो सकता है, जो पूरे डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम को प्रभावित करेगा। वर्तमान स्थिति से यही संकेत मिलता है कि SIM-बाइंडिंग नियम के मामले में सरकार पीछे हटने के मूड में नहीं है। 1 मार्च की तारीख नज़दीक आ रही है, और टेक कंपनियों के साथ-साथ करोड़ों यूजर्स की नजरें भी इस पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह नियम किस स्वरूप में लागू होगा और आम उपयोगकर्ता के अनुभव में कितना परिवर्तन आएगा।

