शुक्रवार को बाजार बंद होते समय शेयर बाजार में अचानक भारी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स और निफ्टी समेत सभी प्रमुख सूचकांक दबाव में थे। दोपहर करीब 3 बजे निफ्टी लगभग 400 अंक टूटकर 23,500 पर पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स 1,150 अंक की गिरावट के साथ 74,800 के ऊपर कारोबार कर रहा था। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखा गया, जहां मुनाफा वसूली का दौर जारी रहा। बीएसई के टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 4 शेयर मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि बाकी 26 शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। खास तौर पर इंडिगो, टाटा स्टील और पावरग्रिड जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। कारोबार बंद होने तक निफ्टी 360 अंक या 1.50% की गिरावट के साथ 23,547 पर बंद हुआ, वहीं सेंसेक्स 1,092 अंक या 1.45% कमजोर होकर 74,775 पर आ गया। बैंक निफ्टी में भी 600 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
5.56 लाख करोड़ रुपये का नुकसान बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) के मार्केट कैपिटलाइजेशन के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को बीएसई का मार्केट कैप 470.75 लाख करोड़ रुपये था। हालांकि, यह आज 5.56 लाख करोड़ रुपये घटकर 465.19 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। इसका सीधा मतलब है कि निवेशकों की संपत्ति में 5.56 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई है।
शेयर बाजार में गिरावट की वजह क्या रही? अमेरिका-ईरान तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बनी स्थिति अब भी अनिश्चितता से घिरी हुई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों ने गुरुवार को अपने युद्धविराम को बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर लगे प्रतिबंधों को हटाने पर सहमति जरूर जताई है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब तक इस समझौते को मंजूरी नहीं दी है, और ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। इंडिया VIX बढ़ा: इंडिया VIX में जोरदार उछाल देखा गया, जो 6% बढ़कर 15.91 के स्तर पर पहुंच गया। यह शेयर बाजार में संभावित बड़ी गिरावट का संकेत देता है।
FII की बिकवाली: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली का सिलसिला जारी है। 2026 में अब तक की सबसे अधिक बिकवाली दर्ज की गई है, जिसकी कुल राशि 2.20 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक हो चुकी है। पिछले बुधवार को ही 1040 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए।
मुनाफावसूली का दबाव: बाजार में हालिया गिरावट का मुख्य कारण मुनाफावसूली माना जा रहा है, खासतौर पर दो दिनों की छुट्टियों के चलते। वैश्विक परिस्थितियों के प्रभाव से अधिकांश सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। ऑटो, फाइनेंशियल, मेटल तथा ऑयल एंड गैस जैसे क्षेत्रों में 2% से अधिक की गिरावट रही। हालांकि, आईटी और कंज़्यूमर गुड्स सेक्टर ने कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की, लेकिन वे इस बड़ी गिरावट को रोकने में सफल नहीं हो सके।
मानसून में देरी की आशंका: बाजार में गिरावट की एक अन्य प्रमुख वजह मानसून के देर से आने का अनुमान है। देश के बड़े हिस्से में गर्मी की तीव्र लहरें जारी हैं और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए अपने पूर्वानुमान को घटाकर दीर्घकालिक औसत के 92% से 90% कर दिया है। इसका मतलब यह है कि जून से सितंबर के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना बढ़ गई है, जो आर्थिक गतिविधियों और फसलों के उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

