कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी उनके साथ मौजूद थे। सिद्धारमैया ने कहा कि उनके लिए राज्य का हित सर्वोपरि है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके इस निर्णय से सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं।
इस दौरान सिद्धारमैया ने एक बड़ा एलान करते हुए कहा कि हाईकमान की ओर से राज्यसभा जाने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे उन्होंने विनम्रतापूर्वक ठुकरा दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता ने उन्हें पांच साल के लिए चुना है और वे राज्य में रहकर ही राजनीति करना जारी रखेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी दृढ़ता के साथ कहा कि वे सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे और साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।
राज्यपाल के आने पर इस्तीफे की प्रक्रिया होगी पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिद्धारमैया ने बताया कि हाईकमान के निर्देश मिलने से पहले ही उन्होंने अपना इस्तीफा तैयार कर लिया था और आज इसे सौंप दिया है। उन्होंने भरोसा जताया कि जब राज्यपाल पहुंचेंगे, तो वह इस्तीफे को स्वीकार करेंगे, क्योंकि इस पूरे निर्णय को संविधान के तहत लिया गया है।
बेंगलुरु में नदारद हैं राज्यपाल
सिद्धारमैया ने बताया कि फिलहाल राज्यपाल बेंगलुरु में मौजूद नहीं हैं। उनके दफ्तर से सूचना मिली है कि वे आज देर रात लौटेंगे। इस कारण मैंने अपने इस्तीफे को उनके सचिव के सुपुर्द कर दिया है। राज्यहित सर्वोपरि उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही राज्यपाल बेंगलुरु वापस आएंगे, मेरा इस्तीफापत्र स्वीकृत कर देंगे, इसका मुझे पूरा भरोसा है। राज्यहित को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने साफ किया कि उनके लिए जनता और प्रशासन का कल्याण सबसे महत्वपूर्ण है।
सोनिया, राहुल और खरगे के प्रति कृतज्ञता सिद्धारमैया ने कहा कि हमारी पार्टी को पूर्ण बहुमत प्राप्त है, अतः संविधान के अनुसार हमें सरकार बनाने का अवसर मिलना चाहिए। साथ ही, उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का हार्दिक धन्यवाद व्यक्त किया, जिन्होंने उन पर भरोसा जताया और यह जिम्मेदारी सौंपी।
मेरा राजनीतिक जीवन बिल्कुल खुली किताब की तरह – सिद्धारमैया सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने कभी भी पद या धन-संपत्ति के पीछे दौड़ नहीं लगाई। उनके अनुसार, मतदाताओं की सेवा ही उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने अपने 50 वर्षों के राजनीतिक करियर में पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता बनाए रखी है। उनका कहना है कि उनका राजनीतिक जीवन हमेशा से सबके सामने एक खुली किताब जैसा रहा है।

