NEET पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों को नासिक, हरियाणा, जयपुर, जमवारामगढ़ और सीकर जैसे स्थानों से कथित लीक रूट का पता चला है. सूत्रों के अनुसार, सीकर एक बड़े गेस पेपर हब के रूप में उभरकर सामने आया है, जहां से पेपर जम्मू-कश्मीर, बिहार, केरल और उत्तराखंड तक पहुंचाया गया. जांच में कोचिंग नेटवर्क, MBBS काउंसलिंग, हॉस्टल और डिजिटल चैट्स की भूमिका का खुलासा हुआ है. अब सीबीआई इस मल्टी-स्टेट रैकेट की पूरी गहराई से जांच कर रही है.

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET अब एक साधारण पेपर लीक विवाद से कहीं अधिक गंभीर मामला बन चुकी है, और जांच एजेंसियां इसे एक संगठित मल्टी-स्टेट नेटवर्क का हिस्सा होने का अंदेशा जता रही हैं. राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, केरल, जम्मू-कश्मीर और बिहार समेत कई राज्यों में फैली जांच से संकेत मिल रहे हैं कि कथित पेपर लीक के पीछे एक सुनियोजित चेन कार्यरत थी.

सूत्रों के अनुसार शुरुआती पड़ताल में अधिकारियों को जो सुराग हाथ लगे हैं, उन्होंने पूरे तंत्र को झकझोर दिया है. बताया जा रहा है कि कथित पेपर पहले नासिक से लीक हुआ, फिर हरियाणा पहुंचा और वहां से जयपुर, जमवारामगढ़ और फिर सीकर तक इसका प्रसार हुआ. सीकर से यही पेपर जम्मू-कश्मीर, बिहार, केरल और उत्तराखंड तक फैलाया गया. फिलहाल इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है, और राजस्थान ATS-SOG लगातार इससे संबंधित जानकारी साझा कर रही है.

पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा राजस्थान के सीकर क्षेत्र की हो रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि पेपर का सबसे बड़ा प्रसार यहीं से हुआ। कोटा के बाद, हाल के वर्षों में सीकर देश के प्रमुख कोचिंग हब के रूप में तेजी से उभरा है। मेडिकल और इंजीनियरिंग परीक्षाओं की तैयारी के लिए हर साल यहां हजारों छात्र विभिन्न राज्यों से आते हैं। इसी भीड़ और कोचिंग नेटवर्क के माध्यम से कथित गेस पेपर फैलाया गया। सूत्रों के अनुसार, छात्रों को यह कहकर पढ़ाया गया कि यही प्रश्न परीक्षा में आएंगे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जांच के दौरान सामने आया है कि बायोलॉजी के सभी 90 और केमिस्ट्री के सभी 45 प्रश्न परीक्षा से पहले कुछ चुनिंदा लोगों तक पहुंच गए थे। यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो इसे केवल गेस पेपर नहीं, बल्कि एक पूर्ण पेपर लीक का मामला माना जाएगा।

600 अंकों तक का खेल: सवालों का मैच और पेपर लीक का खुलासा

जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित प्रश्न बैंक में शामिल बड़ी संख्या में सवाल वास्तविक परीक्षा में हूबहू मिल गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, लगभग 140 सवाल सीधे तौर पर परीक्षा से मेल खाए। चूंकि NEET में हर सवाल के चार अंक होते हैं, इसलिए छात्रों को लगभग 600 अंकों तक का फायदा मिलने की संभावना थी। इस कारण मामला अत्यधिक गंभीर माना जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों की राय है कि किसी गेस पेपर से कुछ सवालों का मेल खाना सामान्य हो सकता है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में सवालों का मेल अकल्पनीय है और इसे महज संयोग नहीं कहा जा सकता।

पेपर लीक: दिल्ली से हुई संदिग्ध कॉल

इस मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के दौरान पाया गया कि परीक्षा से पहले कुछ छात्रों को फोन कर यह बताया गया कि “पेपर आ गया है”। बताया जा रहा है कि यह कॉल दिल्ली से आया था और इसके तुरंत बाद सीकर में कथित पेपर तेजी से सर्कुलेट होने लगा। शुरू में यह सामग्री लाखों रुपये में बेची गई। हालांकि, जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आई, कई छात्रों ने इस सामग्री को खुद ही 5,000 से 30,000 रुपये तक के रेट में आगे बेचना शुरू कर दिया। इस तरह पूरा नेटवर्क लालच और कमीशन के जाल में बदल गया।

जांच में पता चला है कि कथित पेपर केवल WhatsApp तक ही सीमित नहीं था. इसे कई अन्य एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से भी साझा किया गया है. कुछ मोबाइल फोनों पर Forwarded Many Times टैग देखा गया है, जिससे यह समझा जा सकता है कि यह सामग्री व्यापक रूप से लोगों के पास पहुंच चुकी थी. अब SOG सोशल मीडिया चैट्स, कॉल डिटेल्स, बैंक लेन-देन और डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही है.

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