मेरे लफ़्ज़ों की आख़िरी बात तू,
मेरी ख़ामोशी का हर राज़ तू,
तुझसे ही चलती है ये धड़कन,
मेरे होने का एहसास तू
तेरे बिना सब फीका सा लगे,
जैसे कोई सपना अधूरा लगे,
तू जो मिले तो रंग भर जाएँ,
वरना हर पल बस धुंधला लगे
तू पास आए तो दिल ये कहे,
अब और कुछ भी ज़रूरी ना रहे
मेरे लफ़्ज़ों की आख़िरी बात तू,
मेरी ख़ामोशी का हर राज़ तू,
तुझसे ही जुड़ी मेरी हर कहानी,
मेरे जीने की हर वजह तू
तेरे ख्यालों में बहता रहूँ,
तेरे साथ ही ठहरता रहूँ,
तू जो मिले तो सब मिल जाए,
तेरे बिना क्यों जीता रहूँ
जब तू साथ है तो कमी क्या है,
तेरे बिना हर खुशी अधूरी सी है
मेरे लफ़्ज़ों की आख़िरी बात तू,
मेरी रूह का गहरा राज़ तू,
तुझमें ही सिमटा मेरा हर सफर,
मेरी दुनिया, मेरा आज तू
“राहत टीकमगढ़”

