“हां! मैं कविता हूं”
हां! मैं कविता हूं भावनाओं के गर्भ से जन्मी शब्दों की सौगात हूं जिसमें अवगुंठित है हृदय की पीड़ा भी मधुर भावों की भीनी सुगंध भी मैं कल्पना का असीमित…
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हां! मैं कविता हूं भावनाओं के गर्भ से जन्मी शब्दों की सौगात हूं जिसमें अवगुंठित है हृदय की पीड़ा भी मधुर भावों की भीनी सुगंध भी मैं कल्पना का असीमित…
मुझ तुम संग रहने की आदत है। मुझ तुमसे बाते करने की आदत है। मुझ तुम संग सब कहने की आदत है। मुझ तुम संग जीने की आदत है मुझ…
बड़े-बड़े सिकंदरयहाँ आयेमानते थे खुद कोबड़े बलशाली धुरंधर। फिर भी बचा न सकेअपने अस्तित्व कोसमेट लियामिट्टी ने अपने अंदर। खुद को खुदा जाना थेमगर औरों कोसदा गधा पहचानते थे। खुदा…
तेरी दोस्ती ने हमको जीवन जीना सिखा दिया उदास रहता था मेरा चेहरा उसको मुस्कुराना सिखा दिया। न मिली मोहब्बत जीवन में इसका अब कोई गम नहीं रहा तेरी दोस्ती…
एक इल्जाम मेरे नाम आया है न होते हुए भी मोहब्बत सरेआम मेरा नाम आया है। मैं ढूंढता रहा हर जगह खुद को ही न जाने क्यों फिर भी मेरा…
मेरे कदमों की आहट से वर्तमान ठहर जाएगा और भविष्य का चुपके से आगमन होगा। मेरे कदमों की आहट से देवी शक्तियां मोहित होगी और दुष्ट शक्तियों स्थानांतरण करेंगी। मेरे…
तुम वो फूल होजिसको मैं बिना स्पर्श केखिलता हुआऔर महकता हुआदेखना चाहता हूं। तुम मेरी वोअधूरी ख्वाहिश होजिसके पूरे होने काइंतजार मैंने कईयुगों तक किया है। तुम मेरे जीवन कावो…
इंतजार है ज़ब कोई अपनी खुशी से हमसे बात करें। इंतजार है ज़ब कोई समझें हम इतने बुरे भी नहीं है। इंतजार है ज़ब कोई समझें साथ खड़ा व्यक्ति मानव…
नए साल की शुरुआत हे!माँ काली तेरे विश्वास पर करता हूँ। मानता हूँ कि मैं खास नहीं मगर तेरे ऐतबार पर नए साल पर एक नई शुरुआत करता हूँ। छोड़…
आखिर मैं ही क्योंदबी कुचली रहुँ इस समाज मेंक्या मेरा कोई अस्तित्व नहीं ? आखिर मैं ही क्योंअपनी पीड़ा को अंतर मन में रखूँक्या मेरी संवेदनाओ का कोई वजूद नहीं?…