वीबी-ग्राम जी (VB-GRAM G) अधिनियम को पेश करने और लागू करने के तरीके पर नरेगा संघर्ष मोर्चा (NSM) कड़ा ऐतराज जताता है। वीबी-ग्राम जी कानून को एक हफ़्ते से भी कम समय में संसद के दोनों सदनों में जल्दबाजी में पास कर दिया गया, जिसमें मनरेगा मज़दूरों या नागरिक समाज को भाग लेने के लिए कोई सार्थक मौका नहीं दिया गया।
यही रुख वीबी-ग्राम जी अधिनियम के ड्राफ़्ट नियमों पर जनता से राय लेने की प्रक्रिया में भी जारी रहा। इन नियमों को 23 मई 2026 को जारी किया गया था और प्रतिक्रिया देने की अंतिम तिथि 21 जून तय की गई थी — फिर भी ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) पहले ही घोषणा कर चुका है कि वीबी-ग्राम जी को 1 जुलाई से लागू कर दिया जाएगा। यह परामर्श पूरी तरह से एक ढोंग है; मंत्रालय का जनता के सुझावों पर गंभीरता से विचार करने का कोई इरादा नहीं है।
NSM मांग करता है कि वीबी-ग्राम जी अधिनियम को लागू करने का काम तुरंत रोका जाए और इस अधिनियम के नियमों पर मज़दूरों के प्रतिनिधियों तथा नागरिक समाज के साथ उचित परामर्श किया जाए। इसके लिए हाल के ही कई उदाहरण मौजूद हैं — जैसे कि डीपीडीपी (DPDP) अधिनियम के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की हितधारक बैठकें और टिप्पणी के लिए दी गई पर्याप्त समय सीमा। इसके बिल्कुल उलट, वीबी-ग्राम जी के ड्राफ्ट नियमों को अपारदर्शी तरीके से तैयार किया गया, जिसमें हितधारकों को इन्हें देखने और अपनी राय देने के लिए बहुत कम या बिल्कुल भी समय नहीं दिया गया।
इसके अलावा, ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा बार-बार दिए गए इन आश्वासनों के बावजूद कि वीबी-ग्राम जी शुरू होने तक मनरेगा को बिना किसी रुकावट के जारी रखा जाएगा, ज़मीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। स्थानीय अधिकारी काम की मांग के आवेदन स्वीकार नहीं कर रहे हैं और न ही कार्यस्थल खोल रहे हैं, और वित्तीय वर्ष 25-26 के 3,200 करोड़ रुपये से अधिक के मज़दूरी भुगतान अभी भी रूके हुए हैं। काम में रुकावट के बहुत सारे सबूत हैं: MoRD के अपने आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2025 और अप्रैल 2026 के बीच मनरेगा रोजगार में 57% की गिरावट आई थी, और वही मई में 49% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त, चेहरे की पहचान (फेशियल रिकग्निशन) से जुड़ी समस्याएं उपस्थिति दर्ज करने में भारी परेशानी खड़ी कर रही हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोग काम से वंचित हो रहे हैं।
हमारी मांगें:
● वीबी-ग्राम जी को लागू करने का काम तुरंत और बिना किसी शर्त के रोका जाना चाहिए।
● इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले, एक निष्पक्ष और पारदर्शी सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। इसमें मज़दूर प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के संगठनों को सार्थक रूप से भाग लेने के लिए पर्याप्त समय और मौका मिलना चाहिए।
● टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और मज़दूरी की दरों को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं पर ध्यान देते हुए, संबंधित पक्षों के साथ वास्तविक बातचीत के ज़रिए नियमों के ड्राफ़्ट में बदलाव किया जाना चाहिए।
बिना सही सलाह-मशविरे की प्रक्रिया के आगे बढ़ने से निश्चित रूप से अव्यवस्था पैदा होगी और इससे मज़दूरों और उनके परिवारों को और भी नुकसान होगा जिसकी भरपाई नहीं हो सकेगी। NSM किसी भी जल्दबाजी में किए गए कार्यान्वयन के नतीजों के लिए सरकार को जवाबदेह ठहराता है।
NREGA Sangharsh Morcha

