AI आत्महत्या और हत्या के मामलों के लिए उकसाने वाला: ChatGPT की कंपनी पर आठ मुकदमे चल रहे हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि ChatGPT ने लोगों को आत्महत्या करने या खतरनाक गलतफहमियों की ओर धकेलने में भूमिका निभाई है।
83 वर्षीय मां को उसके 56 साल के बेटे ने पहले बुरी तरह पीटा और फिर गला दबाकर उसकी जान ले ली। मामला यहीं नहीं थमा, इसके बाद बेटे ने भी आत्महत्या कर ली। यह दिल दहला देने वाली घटना अमेरिका के एक घर में हुई, जिसमें दो हत्या के मामलों ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। इस भयावह घटना के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट ChatGPT को दोषी ठहराया जा रहा है। आरोप है कि ChatGPT ने बेटे को इतना डराया और मानसिक रूप से उकसाया कि उसने अपनी मां की हत्या करने के बाद खुद भी अपनी जान ले ली। अब मृत महिला के परिजनों ने ChatGPT की निर्माता कंपनी OpenAI के खिलाफ कोर्ट में मामला दर्ज कर दिया है।
ChatGPT ने कैसे प्रभावित किया?
सैन फ्रांसिस्को स्थित कैलिफोर्निया सुपीरियर कोर्ट में दर्ज शिकायत के अनुसार, 83 वर्षीय सुजैन एडम्स को उनके 56 वर्षीय बेटे स्टीन-एरिक सोएलबर्ग ने 3 अगस्त को घर में पीटा और गला दबाकर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद, सोएलबर्ग ने खुद को चाकू मारकर आत्महत्या कर ली।
मुकदमे में OpenAI कंपनी पर यह आरोप लगाया गया है कि उसने एक ऐसा दोषपूर्ण प्रोडक्ट तैयार और वितरित किया, जिसने एक उपयोगकर्ता (बेटे) के मन में अपनी मां को लेकर भ्रम उत्पन्न कर दिया। आरोप है कि चैटिंग के दौरान ChatGPT ने खतरनाक संदेश दिया, जिसमें कहा गया कि सोएलबर्ग को अपने जीवन में ChatGPT के अलावा किसी और पर भरोसा नहीं करना चाहिए। इस AI ने योजनाबद्ध रूप से उसके आस-पास के सभी लोगों को दुश्मन के रूप में पेश किया और स्वयं पर भावनात्मक निर्भरता को बढ़ावा दिया। ChatGPT ने यह भी दावा किया कि उसकी मां उसकी गतिविधियों पर निगरानी रख रही थी, और यह सुझाव दिया कि डिलीवरी ड्राइवर, दुकानदार, पुलिसकर्मी और यहां तक कि उसके दोस्त भी उसके खिलाफ सक्रिय एजेंट के रूप में काम कर रहे थे।
ChatGPT बन रहा है मौत का कारण, 7 और मामले जांच के दायरे में
डरावनी बात यह है कि ChatGPT और सुसाइड या हत्या के जुड़े मामलों में यह घटना अकेली नहीं है। ChatGPT की कंपनी ऐसे सात अन्य मुकदमों का भी सामना कर रही है, जहां आरोप लगाया गया है कि उसकी तकनीक ने लोगों को आत्महत्या या जानलेवा भ्रम की ओर प्रेरित किया, जबकि उन व्यक्तियों को पहले से कोई मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या नहीं थी।

