9 जनवरी 2026 को अमेरिकन सुप्रीम कोर्ट का एक महत्वपूर्ण फैसला आने की संभावना है, जो पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ की वैधता को लेकर होगा। कोर्ट यह तय करेगा कि ट्रंप प्रशासन ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत जो टैरिफ लगाए थे, वे कानूनी रूप से सही थे या नहीं। इस फैसले से पहले विश्व भर के बाजारों में दबाव देखा जा रहा है। यदि फैसला ट्रंप प्रशासन के खिलाफ आता है, तो भारत सहित वैश्विक बाजारों में सोमवार को तेज उछाल देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रंप के खिलाफ आने की संभावना अधिक है। ऐसे में यह फैसला सोमवार को बाजार की दिशा निर्धारित करेगा, और अगर फैसला ट्रंप प्रशासन के खिलाफ जाता है, तो भारतीय शेयर बाजार को विशेष रूप से लाभ हो सकता है।
पूरी दुनिया की नजरें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हुई हैं, क्योंकि कुछ ही घंटों में टैरिफ से जुड़े अहम फैसले की घोषणा होने वाली है। अप्रैल 2025 में अमेरिकी प्रशासन ने कई देशों पर 10 से 50 प्रतिशत तक के टैरिफ लगा दिए थे। इन टैरिफों को कई अदालतों में चुनौती दी गई थी, जिसमें तर्क दिया गया था कि राष्ट्रपति के पास संविधान के तहत इतनी व्यापक शक्तियां नहीं हैं।
अमेरिका ने अपनी सहूलियत के अनुसार कई देशों पर टैरिफ लगाए थे, जिसे लेकर काफी विरोध हो रहा है। इन टैरिफ का प्रभाव अब खुद अमेरिका में भी नजर आने लगा है, और मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है। शुक्रवार की रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है, क्योंकि इसे ‘फैसले का दिन’ माना जा रहा है। इस फैसले पर न सिर्फ कई देशों के शेयर बाजारों की नजरें टिकी हुई हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था भी इसकी ओर ध्यान लगाए हुए है।
भारतीय शेयर बाजार में लगातार 5वें दिन कमजोरी देखी गई, और शुक्रवार को भी गिरावट के साथ कारोबार समाप्त हुआ। इस हफ्ते सेंसेक्स लगभग 2200 अंक गिर चुका है, जबकि निफ्टी में 2.5% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को इस नुकसान का भारी झटका लगा है। शुक्रवार को सेंसेक्स 604 अंक टूटकर 83,576 पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी 193 अंकों की गिरावट के साथ 25,683.30 पर आ गया। अगर ट्रंप प्रशासन के पक्ष में कोई निर्णय आता है, तो इसका दबाव बाजार पर जारी रह सकता है। यह फैसला न सिर्फ अमेरिका बल्कि कई अन्य देशों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा।
यदि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन के खिलाफ निर्णय सुनाता है, जिसमें ट्रंप के कार्यकाल में लगाए गए टैरिफ को अवैध माना जाता है, तो इसका कानूनी, आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इस स्थिति में अमेरिकी सरकार को कंपनियों और आयातकों से टैरिफ के नाम पर वसूले गए पैसे लौटाने होंगे, जिससे अरबों डॉलर का रिफंड देना पड़ सकता है। अनुमान के मुताबिक, यह राशि 100 से 150 अरब डॉलर (लगभग 8–12 लाख करोड़ रुपये) तक हो सकती है, जिसमें अमेरिकी वित्तीय प्रबंधन पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।
दूसरी ओर, यदि सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला सुनाता है, यह मानते हुए कि राष्ट्रपति को आपातकालीन कानून (IEEPA) के तहत टैरिफ लगाने का अधिकार है, तो ट्रंप द्वारा लगाए गए सभी विवादित टैरिफ कानूनी रूप से वैध माने जाएंगे। ऐसे में कंपनियों और आयातकों को कोई रिफंड नहीं मिलेगा और सरकार का अरबों डॉलर का राजस्व सुरक्षित रहेगा। इसके बाद ट्रंप अपनी टैरिफ रणनीति को और अधिक आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा सकते हैं। उनकी America First नीति और सख्त व्यापार नीति को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी। साथ ही, चीन, रूस और भारत जैसे देशों पर दबाव बनाने की रणनीति को अधिक समर्थन प्राप्त होगा।

