कुलपति को पुनः नियुक्ति मिलने पर सभी एसी सदस्यों ने दी बधाई, चार वर्ष में 200 अंक उठी डीयू की क्यूएस रैंकिंग: प्रो. योगेश सिंह , पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व डूसू प्रधान अरुण जेटली के नाम पर शुरू होगी स्कॉलरशिप
नई दिल्ली, 24 जुलाई। दिल्ली विश्वविद्यालय अकादमिक परिषद (एसी) की 1027वीं बैठक का आयोजन कुलपति प्रो. योगेश सिंह की अध्यक्षता में 24 जुलाई, 2026 को हुआ। प्रो. योगेश सिंह को दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए पुनः नियुक्ति मिलने पर बैठक में मौजूद सभी सदस्यों ने दी बधाई। गौरतलब है कि डीयू के वे पहले कुलपति हैं, जिन्हें दूसरा कार्यकाल मिला है। बैठक के आरंभ में कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की उपलब्धियों गिनाते हुए कहा कि पिछले महीने जारी हुई क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग-2027 में डीयू ने अपनी स्थिति पहले से काफी बेहतर की है। प्रो. सिंह ने बताया कि इस बार डीयू ने वैश्विक स्तर पर 322 वीं ग्लोबल रैंक हासिल की है, जबकि 2022 में जारी की गई क्यूएस रैंकिंग में दिल्ली विश्वविद्यालय 521-530 के ब्रैकेट में था। उन्होंने बताया कि भारतीय विश्वविद्यालयों में डीयू पहले स्थान पर है। कुलपति ने कहा कि क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में डीयू का कुल स्कोर 43.8 जो 2022 में जारी रैंकिंग में 23.5 था।
अकादमिक परिषद (एसी) की बैठक में डीयू के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) का नाम बदलकर सीडीओई करने सहित कई मुद्दों को मंजूरी प्रदान की गई। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व डूसू प्रधान स्वर्गीय अरुण जेटली के नाम पर डीयू में स्कॉलरशिप शुरू की जाएगी। ऐसे कई फैसले डीयू अकादमिक परिषद की बैठक में लिए गए हैं। बैठक के आरंभ में ज़ीरो ऑवर के दौरान अकादमिक परिषद के सदस्यों ने अनेकों मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की और अपने-अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए। रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता द्वारा एजेंडा प्रस्तुत किया गया जिस पर सभी सदस्यों द्वारा चर्चा हुई।
बैठक के दौरान विभिन्न विभागों के पाठ्यक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया गया। बौद्ध अध्ययन विभाग में शैक्षणिक सत्र 2026-2027 से ‘कोर्स सर्टिफिकेट इन संस्कृत बुद्धिजम’ और ‘डिप्लोमा कोर्स इन संस्कृत बुद्धिजम’ के कोर्स शुरू करने को एकेडमिक काउंसिल ने मंजूरी प्रदान कर दी है। बैठक के दौरान पंडित दीनदयाल उपाध्याय नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पर्सन्स विद फिजिकल डिसेबिलिटीज [(PDUNIPPD (D)] में शैक्षणिक सत्र 2026-2027 से ‘मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी’ (MOT) कोर्स शुरू करने को लेकर ‘नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थ केयर प्रोफेशन्स’ (NCAHP) के नियमों के अनुसार करिकुलम, स्पेशलिटीज़ के नाम, इनटेक, योग्यता और एडमिशन के तरीके को अपनाने की मंजूरी प्रदान की गई है।
अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क 2022 (UGCF) के आधार पर ‘स्किल एनहांसमेंट कोर्सेस’ के पूल में कोर्सों को जोड़ने/उनमें बदलाव करने के बारे में ‘स्किल एनहांसमेंट कोर्सेस कमिटी’ के चेयरपर्सन की सिफारिश को मंजूर करते हुए अकादमिक काउंसिल द्वारा “एंटरप्रेन्योरियल माइंडसेट एंड अपॉर्चुनिटी डिस्कवरी”, “डिज़ाइन थिंकिंग एंड वेंचर डेवलपमेंट”, “वेंचर बिज़नेस डिज़ाइन एंड गो-टू-मार्केट स्ट्रैटेजी”, “एंटरप्रेन्योरियल कम्युनिकेशन एंड इन्वेस्टर पिचिंग” और “लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन लिटरेसी स्किल्स (L&ILS)” कोर्सों को भी मंजूरी प्रदान की गई।

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व डूसू प्रधान अरुण जेटली के नाम पर शुरू होगी स्कॉलरशिप
डीयू ईसी द्वारा तय किए गए संस्थान की स्कॉलरशिप/अवॉर्ड/कैपिटल एसेट्स के लिए डोनेशन से जुड़े संशोधित नियमों/गाइडलाइंस के अनुसार, तीन अंडर ग्रेजुएट स्पोर्ट्स स्टूडेंट्स के लिए “स्वर्गीय श्री अरुण जेटली” स्कॉलरशिप शुरू किए जाने पर भी एसी की इस बैठक में विचार किया गया। स्कॉलरशिप कमेटी ने सिफारिश की है कि इस स्कॉलरशिप का उद्घाटन कार्यक्रम 13 अगस्त, 2026 को आयोजित किया जाए। हर साल अवॉर्ड सेरेमनी 13 अगस्त को होगी।
गाइडलाइंस के अनुसार यह स्कॉलरशिप स्पोर्ट्स स्टूडेंट्स के लिए बीस साल की अवधि के लिए होगी। स्वर्गीय अरुण जेटली के नाम पर स्पोर्ट्स स्टूडेंट्स के लिए तीन स्कॉलरशिप होंगी। इनकी कुल वैल्यू 50,000 रुपये होगी, जो तीन स्पोर्ट्स स्टूडेंट्स में बांटी जाएगी। यह 10,00,000 रुपये (दस लाख रुपये) की मूल राशि से बीस साल की अवधि के लिए दी जाएगी। इन तीन स्कॉलरशिप में से कम से कम एक स्कॉलरशिप छात्रा के लिए होगी। ये स्कॉलरशिप उन अंडरग्रेजुएट विद्यार्थियों को दी जाएगी जो खेलों में भाग ले रहे हैं और अंतर्राष्ट्रीय/ राष्ट्रीय स्तर के गेम खेल रहे हैं। स्कॉलरशिप की राशि मूल राशि से 50,000 रुपये और यूनिवर्सिटी की गाइडलाइंस के अनुसार हर साल फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिले कुल ब्याज का योग होगी। यह राशि तीन विजेताओं में बराबर बांटी जाएगी।
डीयू एसओएल होगा अब सीडीओई!
दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ ओपन लर्निंग (एसओएल) का नाम बदलकर “सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन” (सीडीओई) किया जाएगा। इसके साथ ही स्कूल ऑफ़ ओपन लर्निंग के प्रिंसिपल का पदनाम भी बदलकर डायरेक्टर, सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन होगा। इस आशय की सिफारिश स्कूल ऑफ़ ओपन लर्निंग की गवर्निंग बॉडी की बैठक में की गई थी। वर्णनीय है कि स्कूल ऑफ़ ओपन लर्निंग को यह नाम 24 नवंबर, 2003 को डीयू ईसी के एक प्रस्ताव के तहत दिया गया था जिसे यूजीसी द्वारा 2021 में मंज़ूरी मिली थी। इससे पहले इस संस्थान का नाम “स्कूल ऑफ़ कॉरेस्पोंडेंस कोर्सेज एंड कंटीन्यूइंग एजुकेशन” था। गौरतलब है कि यूजीसी के 2022 के संशोधित प्रावधानों के अनुसार, ओपन यूनिवर्सिटी के अलावा कोई भी हायर एजुकेशन संस्थान, जो डिस्टेंस और ऑनलाइन मोड में प्रोग्राम चलाना चाहता है, उसके पास ‘सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन (सीडीओई)’ होना चाहिए। और इस सेंटर के हेड एक डायरेक्टर होंगे, जो फुल-टाइम काम करने वाले रेगुलर अधिकारी होंगे और जिनका पद एसोसिएट प्रोफेसर से कम नहीं होगा। इसे ध्यान में रखते हुए ही स्कूल ऑफ़ ओपन लर्निंग की गवर्निंग बॉडी ने यूजीसी रेगुलेशन का पालन करते हुए यह सिफारिश की है। यह बदलाव मौजूदा शर्तों और नियमों के तहत किया जाएगा।
चार वर्ष की ग्रेजुएशन वाले विद्यार्थी भी कर सकेंगे पीएचडी
रिसर्च इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल (आरआईईसी) की सिफारिशों पर विचार करने के उपरांत डॉक्टर ऑफ़ फिलॉसफी (पीएचडी) को लेकर नियमों में भी कुछ संशोधन किए गए हैं। इनका अकादमिक परिषद की मंजूरी मिल गई है। नए नियमों के अनुसार अब चार वर्षीय ग्रेजुएशन करने वाले विद्यार्थियों को भी पीएचडी करने का अवसर मिल सकेगा। इसके लिए आवश्यक प्रावधानों को भी विस्तृत चर्चा के पश्चात मंजूरी दी गई।–
Anoop Lather
University of Delhi

