तमिलनाडु में राजनीतिक अस्थिरता जारी है. टीवीके ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर अपनी ताकत दिखाई है, लेकिन बहुमत से 10 सीटें कम होने के कारण सरकार गठन की राह में यह सबसे बड़ा अवरोध बन गया है. स्पष्ट बहुमत की कमी और अब तक अन्य दलों से ठोस समर्थन न मिलने के चलते सरकार बनाने की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है.

शनिवार को प्रस्तावित थलपति विजय का शपथ ग्रहण समारोह एक बार फिर रद्द कर दिया गया है। यह दूसरी बार है जब विजय का शपथ ग्रहण कार्यक्रम रद्द हुआ है। इससे पहले 7 मई को भी यही स्थिति बनी थी, जब उनके कई समर्थक वहां इकठ्ठा हुए थे, लेकिन निराश होकर लौटना पड़ा। राज्यपाल ने विजय को तीन बार किया अस्वीकार इतना ही नहीं, राज्यपाल ने अब तक थलपति विजय की सरकार बनाने के दावे को तीन बार खारिज कर दिया है। पहली बार जब विजय सरकार बनाने का दावा पेश करने राज्यपाल के पास पहुंचे, तो उन्हें लौटा दिया गया। दरअसल, चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने की घोषणा की थी। इससे कांग्रेस की पांच सीटें जोड़कर विजय को कुल 113 विधायकों का समर्थन प्राप्त हो गया। लेकिन राज्यपाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें 118 विधायकों के समर्थन हस्ताक्षर लाने होंगे। ये घटनाएं 4 मई से 6 मई के बीच घटीं।

7 मई: पहली बार टला संभावित शपथ ग्रहण

7 मई को विजय ने लगातार दूसरे दिन राज्यपाल से मुलाकात की. राज्यपाल ने एक बार फिर 118 विधायकों का समर्थन प्रस्तुत करने को कहा. इस दौरान, विजय के शपथ ग्रहण की तैयारियां भी चल रही थीं, और सात मई को शपथ ग्रहण की तारीख मानी जा रही थी. हालांकि, राज्यपाल ने अपने विवेकाधिकार का उपयोग करते हुए फैसला लिया, जिससे विजय के शपथ ग्रहण का कार्यक्रम पहली बार टाल दिया गया. इसके अलावा, राज्यपाल ने दूसरी बार भी उनके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया.

8 मई: सरकार बनाने का न्योता अभी भी अधूरा

8 मई को भी टीवीके को राज्यपाल की ओर से सरकार बनाने का आमंत्रण नहीं मिला. इसके साथ ही, राज्यपाल के ‘118 विधायकों के हस्ताक्षर’ को लेकर जोर देने पर बहस तेज हो गई. विशेषज्ञों का कहना था कि विजय की पार्टी टीवीके को फ्लोर टेस्ट का अवसर दिया जाना चाहिए और यह परीक्षण विधानसभा में ही होना चाहिए, न कि अन्यत्र किसी स्थान पर. हालांकि, राज्यपाल ने यह दलील दी कि वह किसी अस्थिर सरकार के गठन को टालना चाहते हैं ताकि बनने के तुरंत बाद सरकार के गिरने की स्थिति न बने.

टीवीके ने बहुमत का समर्थन जुटाने का किया दावा

8 मई की शाम को यह खबर सामने आई कि थलपति विजय की अगुवाई वाली पार्टी टीवीके ने सरकार बनाने के लिए आवश्यक समर्थन हासिल कर लिया है। कांग्रेस के समर्थन से पहले ही उन्हें पांच सीटें मिल चुकी थीं। इसके अतिरिक्त, सीपीआई और सीपीएम के दो-दो विधायक तथा वीसीके के दो विधायकों ने भी टीवीके का समर्थन करने की पुष्टि की। इस आधार पर टीवीके ने दावा किया कि वह बहुमत के आंकड़े से आगे निकल चुकी है। देर रात आई एक और जानकारी के मुताबिक, IUML ने भी अपने दो विधायकों के साथ टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया। अब तक टीवीके के पास कुल 121 विधायकों के समर्थन होने का दावा किया जा रहा है।

9 मई को शपथ ग्रहण के लिए नई तारीख सामने आई, और उसी के साथ टीवीके ने एक बार फिर सरकार बनाने का ऐलान किया। इस खबर से टीवीके समर्थक उत्साह में थे और इस पल को सेलिब्रेट कर रहे थे। लेकिन जल्द ही ये दावे कमजोर पड़ने लगे, जब यह स्पष्ट हुआ कि वीसीके और IUML की ओर से अभी तक समर्थन प्राप्त नहीं हुआ है। इस घटनाक्रम ने तमिलनाडु में विजय की राजनीतिक पारी को शुरू होने से पहले ही संकट में डाल दिया।

लेकिन इससे पहले ही संकट और गहरा गया

थलपति विजय, जिन्हें शनिवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेनी थी, अब उनके शपथ ग्रहण पर सस्पेंस छा गया है। 8 मई की शाम सूत्रों के अनुसार जानकारी मिली कि दो अहम पार्टियों का समर्थन पत्र अब तक नहीं पहुंचा है। VCK ने घोषणा की है कि वे शनिवार को अपना फैसला सुनाएंगे, जबकि IUML ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका समर्थन DMK के साथ है, न कि विजय के साथ। इस बीच, प्रदेश कांग्रेस के विधायकों के देर रात बेंगलुरु पहुंचने की खबरें भी सामने आईं, जिससे स्थिति और पेचीदा हो गई है।

पूरी रात राजनीति में खिंचतान और उतार-चढ़ाव

शुक्रवार रात से लेकर शनिवार दोपहर तक तमिलनाडु की राजनीति में लगातार नाटकीय मोड़ देखने को मिल रहे हैं। TVK की ओर से प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह एक बार फिर रद्द करना पड़ा। विजय ने राज्यपाल को 116 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा है, जिसमें TVK के 107 विधायक, कांग्रेस के 5 और CPI-CPM के 4 विधायक शामिल हैं। हालांकि, सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन आवश्यक है, और विजय अब भी दो विधायकों की कमी का सामना कर रहे हैं। 9 मई को विजय ने तीसरी बार राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से मुलाकात की, लेकिन राज्यपाल ने फिर से 118 विधायकों के हस्ताक्षर लाने की बात दोहराई। इस तरह, तीसरी बार भी थलपति विजय राज्यपाल से बिना किसी ठोस परिणाम के लौटने को मजबूर हो गए।

शनिवार को तमिलनाडु में AMMK प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने TVK पार्टी पर अपने एकमात्र विधायक, कामराज के समर्थन में फर्जी पत्र राज्यपाल को सौंपने का गंभीर आरोप लगाया। चेन्नई में मीडिया से बातचीत करते हुए दिनाकरन ने कहा कि उनकी पार्टी का एकमात्र विधायक NDA और AIADMK के साथ है और एडप्पडी के. पलानीस्वामी ही मुख्यमंत्री पद के सही उम्मीदवार हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि TVK नेताओं ने पहले फर्जी समर्थन पत्र प्रस्तुत किया और बाद में विधायक पर दबाव डालकर समर्थन प्राप्त करने की कोशिश की।

दिनाकरन ने इन आरोपों के संदर्भ में राज्यपाल और पुलिस से शिकायत करने की जानकारी दी। दूसरी ओर, TVK ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी ने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि AMMK विधायक कामराज ने अपनी मर्जी से पार्टी को समर्थन देने का पत्र लिखा था।

इस बीच, विधायक कामराज ने दिनाकरन के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह गायब नहीं थे और न ही TVK ने राज्यपाल को कोई फर्जी दस्तावेज सौंपा। कामराज ने कहा कि वह लगातार संपर्क में थे और पुडुचेरी से लौटने के बाद व्यक्तिगत रूप से राज्यपाल के सचिव से मिले थे। अपने बयान में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भ्रम केवल इस कारण हुआ क्योंकि वह अपने कई फोन में से एक पर व्हाट्सऐप का उपयोग नहीं कर रहे थे। कामराज ने इस मुद्दे पर मीडिया और राजनीति में फैलाई जा रही “भ्रामक” खबरों के खिलाफ कानूनी परामर्श लेने और औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की बात कही।

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